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छह माह बीतने के बाद नहीं हो सकी अपात्रों से रिकवरी
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- फोटो : kisan.jpg
ललितपुर। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का डाटा दुरुस्त कराकर जिम्मेदार भले ही किसानों को लाभान्वित करने का दावा कर रहे हों, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। यहां कई पात्र योजनाओं के लाभ के लिए भटक रहे हैं, जबकि कई अपात्र कागजों में हेराफेरी कर लाभ ले चुके हैं। जांच में गलत पाए जाने पर 387 किसानों से 20 लाख 13 हजार की रिकवरी के आदेश हुए, लेकिन अब तक रिकवरी नहीं हो सकी है।
किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना चलाई गई है, जिसमें किसानों को वर्ष में तीन किस्तों में दो-दो हजार रुपये दिए जाते हैं। एक वर्ष में छह हजार रुपये का भुगतान किया जाता है। योजना के लाभ के लिए किसानों को कृषि विभाग में पंजीयन होना अधिक आवश्यक है। इसके बाद प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए अपना आधार कार्ड व बैंक खाता संख्या, भूमि के दस्तावेजों के साथ पोर्टल पर आवेदन करना होता है, जिसकी जांच के बाद सम्मान निधि की किस्तों का भुगतान किया जाता है। कृषि विभाग में जिले के दो लाख 43 हजार किसान पंजीकृत हैं। इनमें लगभग डेढ़ लाख किसान सम्मान निधि का लाभ पा रहे हैं। वहीं कई किसानों का डाटा गलत होने के चलते नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान में आठ हजार किसानों का डाटा ठीक कराया जा रहा है। इसके साथ कई किसानों केे सम्मान निधि न मिलने का कारण पता नहीं चल पा रहा है। इसके चलते सैकड़ों किसान आए दिन कृषि व राजस्व विभाग के अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। इसके बाद भी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
वहीं बीते वर्षों में दस्तावेजों में धोखाधड़ी कर भी कई अपात्र योजनाओं का लाभ पा चुके हैं। इसका खुलासा बीते वर्ष हुई जांच के दौरान हुआ। जिसमें 387 ऐसे अपात्र व्यक्ति पाए गए, जिन्होंने दस्तावेजों में गड़बड़ी कर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की किस्तों का लाभ लिया। सभी अपात्र 387 लोगों से 20 लाख 13 हजार रुपये की रिकवरी के आदेश बैंकों को किए गए थे, जिस पर छह माह बीतने के बाद भी रिकवरी नहीं हो सकी है। इससे जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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अपात्रों से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि की रिकवरी के लिए बैंकों को सूची उपलब्ध कराई गई है। रिकवरी बैंकों द्वारा की जाएगी। कुछ किसानों की कृषि विभाग द्वारा भी की गई है।
संतोष कुमार सविता, उप कृषि निदेशक
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किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना चलाई गई है, जिसमें किसानों को वर्ष में तीन किस्तों में दो-दो हजार रुपये दिए जाते हैं। एक वर्ष में छह हजार रुपये का भुगतान किया जाता है। योजना के लाभ के लिए किसानों को कृषि विभाग में पंजीयन होना अधिक आवश्यक है। इसके बाद प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए अपना आधार कार्ड व बैंक खाता संख्या, भूमि के दस्तावेजों के साथ पोर्टल पर आवेदन करना होता है, जिसकी जांच के बाद सम्मान निधि की किस्तों का भुगतान किया जाता है। कृषि विभाग में जिले के दो लाख 43 हजार किसान पंजीकृत हैं। इनमें लगभग डेढ़ लाख किसान सम्मान निधि का लाभ पा रहे हैं। वहीं कई किसानों का डाटा गलत होने के चलते नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान में आठ हजार किसानों का डाटा ठीक कराया जा रहा है। इसके साथ कई किसानों केे सम्मान निधि न मिलने का कारण पता नहीं चल पा रहा है। इसके चलते सैकड़ों किसान आए दिन कृषि व राजस्व विभाग के अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। इसके बाद भी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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वहीं बीते वर्षों में दस्तावेजों में धोखाधड़ी कर भी कई अपात्र योजनाओं का लाभ पा चुके हैं। इसका खुलासा बीते वर्ष हुई जांच के दौरान हुआ। जिसमें 387 ऐसे अपात्र व्यक्ति पाए गए, जिन्होंने दस्तावेजों में गड़बड़ी कर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की किस्तों का लाभ लिया। सभी अपात्र 387 लोगों से 20 लाख 13 हजार रुपये की रिकवरी के आदेश बैंकों को किए गए थे, जिस पर छह माह बीतने के बाद भी रिकवरी नहीं हो सकी है। इससे जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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अपात्रों से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि की रिकवरी के लिए बैंकों को सूची उपलब्ध कराई गई है। रिकवरी बैंकों द्वारा की जाएगी। कुछ किसानों की कृषि विभाग द्वारा भी की गई है।
संतोष कुमार सविता, उप कृषि निदेशक