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कोरोना के फेर में मानसरोवर पर पसरा सन्नाटा
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कैप्सन - 1- मानसरोवर के मंदिर घाट पर पसरा सन्नाटा
- फोटो : TALDEHATE
तालबेहट। मई की शुरूआत से ही बच्चों और युवाओं की भीड़ से गुलजार रहने वाले नगर के ऐतिहासिक मानसरोवर तालाब पर इस बार सन्नाटा पसरा है। जबकि, सूर्य भगवान का तेज दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इसका प्रमुख कारण लोगों में कोरोना की चेन को तोड़ने के प्रति जागरूकता मान लिया जाए या उसकी दहशत, लेकिन मानसरोबर तालाब पर खामोशी है।
पूरे विश्व में कोरोना संक्रमण की दहशत है। देश में लॉकडाउन-4 का एक सप्ताह बीत चुका है। विश्व में इसके मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। महामारी के चलते लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्हें जीवन में कई बदलाव भी लाने पड़े हैं। कई प्राचीन परम्पराएं तक बदलने के लिए जनता को मजबूर होना पड़ा। धार्मिक स्थलों पर तालाबंदी करना पड़ी।
कोविड - 19 के कारण इस बार नगर के बच्चों के तैराकी सीखने और उसमें निखार लाने पर ताला लगा दिया गया। इस चक्कर में अबकी बार मानसरोबर तालाब के समस्त घाटों पर सन्नाटा पसरा है। गर्मियों में पिछले कई वर्षों से नगर में हर बार जलसंकट गहरा जाता है, जिससे लोगों को पानी की काफी किल्लत उठानी पड़ती है। इस कारण स्कूलों की छुटिट्यां होते ही अधिकांश परिवार अपने- अपने बच्चों के साथ तालाब पर स्नान करने आते हैं, जिससे सुबह से रात तक तालाब पर बच्चों एवं युवाओं की भीड़ लगी रहती थी। प्रतिवर्ष कई बच्चे तैराकी सीखते हैं और कुछ इस कला में निखार लाते हैं, परंतु इस बार कोरोना के फेर में सब कुछ ठप है। घाटों पर सन्नाटा पसरा है। भीषण गर्मी के दिनों में तो तालाब के घाटों का आलम यह रहता था कि पैर रखने तक की जगह नहीं रहती थी। परंतु, आज तालाब पर सन्नाटा पसरा हुआ है।
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मैंने पिछले सत्तर वर्ष में कभी इस तालाब पर इतना सन्नाटा नहीं देखा है। सूखे और जलसंकट के समय यह तालाब लोगों के लिए वरदान से कम साबित नहीं हुआ। कोरोना संक्रमण के चक्कर में इस बार सन्नाटा पसरा है।
- बृजबिहारी लाल, सेवानिवृत्त प्रवक्ता
इस बार कोरोना के फेर में सब कुछ रुक गया। भीषण जलसंकट के बावजूद नगर की जनता ने सरकार के निर्देश के क्रम में मजबूरी में तालाब जाना बंद किया है।
- नवल किशोर बिलगैंया, सेवानिवृत्त सीनियर टिकट क्लेक्टर
इस बार लोगों के कई रिश्तेदारों के बच्चों की तैराकी सीखने की मंशा कोरोना संक्रमण के चलते पूरी नहीं हो सकी। क्योंकि प्रत्येक गर्मी में बाहर से काफी बच्चे तालाब पर तैराकी सीखने आते थे।
- रवींद्र कुमार लिटौरिया, खेल प्रशिक्षक
इस बार तालाब पर सन्नाटा पसरा है। कुछ दिनों से शाम के समय कुछ लोग अवश्य मछली को दाना डालने जाने लगे हैं।
- दीपक बवेले, हटवारा
मन में हैं कई शंकाएं
तालबेहट। लोगों के मन में इस बार कई प्रकार की शंकाएं है। कुछ लोगों ने बताया कि लॉकडाउन में सरकार के निर्देशों के पालन के साथ-साथ सोशल डिस्टेंस बनाए रखने के लिए इस बार बच्चों को तालाब भेजना बंद कर दिया। वहां उन्हें तैराकी सिखाने वाला भी कोई नहीं मिल रहा है। नदी का पानी बहता है और तालाब का पानी स्थिर रहता है। ऐसे में स्थिर पानी में संक्रामक बीमारी फैलने का खतरा हो सकता है। कुछ लोगों का मानना है कि इस बार कोरोना संक्रमण के कारण रिश्तेदारों के बच्चे नहीं आ पाए हैं।
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पूरे विश्व में कोरोना संक्रमण की दहशत है। देश में लॉकडाउन-4 का एक सप्ताह बीत चुका है। विश्व में इसके मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। महामारी के चलते लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्हें जीवन में कई बदलाव भी लाने पड़े हैं। कई प्राचीन परम्पराएं तक बदलने के लिए जनता को मजबूर होना पड़ा। धार्मिक स्थलों पर तालाबंदी करना पड़ी।
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कोविड - 19 के कारण इस बार नगर के बच्चों के तैराकी सीखने और उसमें निखार लाने पर ताला लगा दिया गया। इस चक्कर में अबकी बार मानसरोबर तालाब के समस्त घाटों पर सन्नाटा पसरा है। गर्मियों में पिछले कई वर्षों से नगर में हर बार जलसंकट गहरा जाता है, जिससे लोगों को पानी की काफी किल्लत उठानी पड़ती है। इस कारण स्कूलों की छुटिट्यां होते ही अधिकांश परिवार अपने- अपने बच्चों के साथ तालाब पर स्नान करने आते हैं, जिससे सुबह से रात तक तालाब पर बच्चों एवं युवाओं की भीड़ लगी रहती थी। प्रतिवर्ष कई बच्चे तैराकी सीखते हैं और कुछ इस कला में निखार लाते हैं, परंतु इस बार कोरोना के फेर में सब कुछ ठप है। घाटों पर सन्नाटा पसरा है। भीषण गर्मी के दिनों में तो तालाब के घाटों का आलम यह रहता था कि पैर रखने तक की जगह नहीं रहती थी। परंतु, आज तालाब पर सन्नाटा पसरा हुआ है।
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मैंने पिछले सत्तर वर्ष में कभी इस तालाब पर इतना सन्नाटा नहीं देखा है। सूखे और जलसंकट के समय यह तालाब लोगों के लिए वरदान से कम साबित नहीं हुआ। कोरोना संक्रमण के चक्कर में इस बार सन्नाटा पसरा है।
- बृजबिहारी लाल, सेवानिवृत्त प्रवक्ता
इस बार कोरोना के फेर में सब कुछ रुक गया। भीषण जलसंकट के बावजूद नगर की जनता ने सरकार के निर्देश के क्रम में मजबूरी में तालाब जाना बंद किया है।
- नवल किशोर बिलगैंया, सेवानिवृत्त सीनियर टिकट क्लेक्टर
इस बार लोगों के कई रिश्तेदारों के बच्चों की तैराकी सीखने की मंशा कोरोना संक्रमण के चलते पूरी नहीं हो सकी। क्योंकि प्रत्येक गर्मी में बाहर से काफी बच्चे तालाब पर तैराकी सीखने आते थे।
- रवींद्र कुमार लिटौरिया, खेल प्रशिक्षक
इस बार तालाब पर सन्नाटा पसरा है। कुछ दिनों से शाम के समय कुछ लोग अवश्य मछली को दाना डालने जाने लगे हैं।
- दीपक बवेले, हटवारा
मन में हैं कई शंकाएं
तालबेहट। लोगों के मन में इस बार कई प्रकार की शंकाएं है। कुछ लोगों ने बताया कि लॉकडाउन में सरकार के निर्देशों के पालन के साथ-साथ सोशल डिस्टेंस बनाए रखने के लिए इस बार बच्चों को तालाब भेजना बंद कर दिया। वहां उन्हें तैराकी सिखाने वाला भी कोई नहीं मिल रहा है। नदी का पानी बहता है और तालाब का पानी स्थिर रहता है। ऐसे में स्थिर पानी में संक्रामक बीमारी फैलने का खतरा हो सकता है। कुछ लोगों का मानना है कि इस बार कोरोना संक्रमण के कारण रिश्तेदारों के बच्चे नहीं आ पाए हैं।