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मिड डे मील: पांच करोड़ की उधारी, शिक्षकाें की जेब पर पड़ रही भारी
Wed, 29 Mar 2023 12:18 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
Updated Wed, 29 Mar 2023 12:18 AM IST
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ललितपुर। परिषदीय स्कूलों में मिड डे मील उधारी पर पक रहा है। शासन से कन्वर्जन कॉस्ट न मिलने से पांच करोड़ रुपये की उधारी हो गई है। वहीं शिक्षक अपनी जेब से खर्च करके या उधार लाकर राशन और अन्य सामान की व्यवस्था कर रहे हैं। बड़ा उधार हो जाने पर दुकानदार भी शिक्षकों को राशन देने से मना कर रहे हैं। इसके साथ ही खाना पकाने वाली रसोइया का भी मानदेय नहीं आया है। हालांकि विभागीय अधिकारी जल्द कन्वर्जन कॉस्ट और रसोइयों का मानदेय मिलने का दावा कर रहे हैं।
जिले में संचालित 1354 परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले 1.80 लाख विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन दिया जाता है। एमडीएम को स्कूल में तैनात रसोइया पकाती हैं। साथ ही चावल और गेहूं राशन की दुकान से पहुंचाया जाता है। वहीं भोजन में प्रयुक्त होने वाले मसाले और अन्य सामान शिक्षक कन्वर्जन कॉस्ट की धनराशि से खरीदते हैं। इसके लिए प्राथमिक विद्यालय में 4.97 रुपये प्रति छात्र और उच्च प्राथमिक विद्यालय में 7.45 रुपये प्रति छात्र के हिसाब से धनराशि दी जाती है। सप्ताह में एक दिन मौसमी फल के लिए 4 रुपये प्रति छात्र दिया जाता है। लेकिन शासन ने पिछले चार महीने से कन्वर्जन कॉस्ट की धनराशि नहीं दी है। इसके चलते शिक्षक उधारी पर फल, मसाले, दूध और अन्य सामान खरीद रहे हैं। इससे स्कूलाें पर अब तक पांच करोड़ रुपये की उधारी हो गई है।
वहीं कई स्कूलों में खाना मीनू के अनुसार नहीं बन रहा है। बच्चों को फल और दूध भी नहीं दिया जा रहा है। सिर्फ सब्जी, रोटी या
तहरी बनाकर खिलाई जा रही है।
रसोइयों का दो माह का मानदेय बकाया
जनपद में मिड-डे मील योजना के तहत करीब 3922 रसोइया मानदेय पर तैनात हैं। रसोइयों को भी मानदेय पाने के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है। हाल में दो माह से रसोइयों को मानदेय नहीं मिला है। जिस कारण से वह आर्थिक संकट झेलने को मजबूर हैं।
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प्राथमिक विद्यालयों और जूनियर हाईस्कूल की कन्वर्जन कॉस्ट की धनराशि बकाया चल रही है। इसके लिए शासन से पत्राचार कर धनराशि की मांग की जा रही है। जिसके जल्द ही जारी होने की उम्मीद है।
कपिल दुबे, जिला समन्वयक, मध्याह्न भोजन
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जिले में संचालित 1354 परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले 1.80 लाख विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन दिया जाता है। एमडीएम को स्कूल में तैनात रसोइया पकाती हैं। साथ ही चावल और गेहूं राशन की दुकान से पहुंचाया जाता है। वहीं भोजन में प्रयुक्त होने वाले मसाले और अन्य सामान शिक्षक कन्वर्जन कॉस्ट की धनराशि से खरीदते हैं। इसके लिए प्राथमिक विद्यालय में 4.97 रुपये प्रति छात्र और उच्च प्राथमिक विद्यालय में 7.45 रुपये प्रति छात्र के हिसाब से धनराशि दी जाती है। सप्ताह में एक दिन मौसमी फल के लिए 4 रुपये प्रति छात्र दिया जाता है। लेकिन शासन ने पिछले चार महीने से कन्वर्जन कॉस्ट की धनराशि नहीं दी है। इसके चलते शिक्षक उधारी पर फल, मसाले, दूध और अन्य सामान खरीद रहे हैं। इससे स्कूलाें पर अब तक पांच करोड़ रुपये की उधारी हो गई है।
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वहीं कई स्कूलों में खाना मीनू के अनुसार नहीं बन रहा है। बच्चों को फल और दूध भी नहीं दिया जा रहा है। सिर्फ सब्जी, रोटी या
तहरी बनाकर खिलाई जा रही है।
रसोइयों का दो माह का मानदेय बकाया
जनपद में मिड-डे मील योजना के तहत करीब 3922 रसोइया मानदेय पर तैनात हैं। रसोइयों को भी मानदेय पाने के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है। हाल में दो माह से रसोइयों को मानदेय नहीं मिला है। जिस कारण से वह आर्थिक संकट झेलने को मजबूर हैं।
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प्राथमिक विद्यालयों और जूनियर हाईस्कूल की कन्वर्जन कॉस्ट की धनराशि बकाया चल रही है। इसके लिए शासन से पत्राचार कर धनराशि की मांग की जा रही है। जिसके जल्द ही जारी होने की उम्मीद है।
कपिल दुबे, जिला समन्वयक, मध्याह्न भोजन