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मेडिकल कॉलेज : रोज एक प्रसूता की जा रही रेफर
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जनपद में मेडिकल कॉलेज खुलने के बाद उम्मीद थी कि अब यहां के लोगों को अच्छा इलाज मिल सकेगा। लेकिन स्थित और खराब हो गई है। सुविधाओं का अभाव कहकर प्रसूताओं और गंभीर मरीजों को डॉक्टर हायर सेंटर रेफर कर देते हैं। हैरत की बात यह है कि सीएचसी से भी मरीज कभी झांसी तो कभी ललितपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किए जा रहे हैं। बीते दिन सियार काटने से घायल ग्रामीणों को सीएचसी बार से मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया, यहां उपचार के बाद उन्हें शाम को घर भेज दिया गया। विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रतिमाह 30 से 40 प्रसूताएं रेफर हो रहीं हैं। इधर, मेडिकल कॉलेज (जिला अस्पताल) से प्रतिदिन दो गंभीर सहित चार से पांच मरीज मेडिकल कॉलेज झांसी रेफर किए जा रहे हैं। ऐसे में अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। आरोप है कि महिला अस्पताल में कई प्रसूताओं को बिना देखे तो कई की पुरानी रिपोर्ट देखकर डॉक्टर रेफर कर देती हैं। सूत्रों के मुताबिक कई को प्रसव में समस्या होने का भय दिखाकर निजी नर्सिंग होम भेज दिया जाता है,जहां उनका सीजर ऑपरेशन से प्रसव कराया जाता है, इसका ताजा उदाहरण प्रसूता मालती को निजी नर्सिंग होम में भेजने और उसकी मौत से सामने आया है। जनपद में मेडिकल कॉलेज को मान्यता तो मिल गई लेकिन अब तक चिकित्सकों की कमी पूरी नहीं हो सकी है। वर्तमान में महज एक ही सहायक आचार्य हैं, जबकि आचार्य और सह आचार्य का पद रिक्त पड़ा हुआ है। यही नहीं वेंटीलेटर जैसी सुविधाएं नहीं हो सकी हैं। महज एक ही सहायक आचार्य है, जिसके सहारे अस्पताल चल रहा है। इसके अलावा एक एसआर चिकित्सक व सामान्य चिकित्सक हैं। ऐसे में प्रतिदिन प्रसूताओं को रेफर किया जा रहा है।
ललितपुर। जनपद में मेडिकल कॉलेज खुलने के बाद उम्मीद थी कि अब यहां के लोगों को अच्छा इलाज मिल सकेगा। लेकिन स्थित और खराब हो गई है। सुविधाओं का अभाव कहकर प्रसूताओं और गंभीर मरीजों को डॉक्टर हायर सेंटर रेफर कर देते हैं। हैरत की बात यह है कि सीएचसी से भी मरीज कभी झांसी तो कभी ललितपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किए जा रहे हैं। बीते दिन सियार काटने से घायल ग्रामीणों को सीएचसी बार से मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया, यहां उपचार के बाद उन्हें शाम को घर भेज दिया गया। विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रतिमाह 30 से 40 प्रसूताएं रेफर हो रहीं हैं। इधर, मेडिकल कॉलेज (जिला अस्पताल) से प्रतिदिन दो गंभीर सहित चार से पांच मरीज मेडिकल कॉलेज झांसी रेफर किए जा रहे हैं। ऐसे में अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। आरोप है कि महिला अस्पताल में कई प्रसूताओं को बिना देखे तो कई की पुरानी रिपोर्ट देखकर डॉक्टर रेफर कर देती हैं। सूत्रों के मुताबिक कई को प्रसव में समस्या होने का भय दिखाकर निजी नर्सिंग होम भेज दिया जाता है,जहां उनका सीजर ऑपरेशन से प्रसव कराया जाता है, इसका ताजा उदाहरण प्रसूता मालती को निजी नर्सिंग होम में भेजने और उसकी मौत से सामने आया है। जनपद में मेडिकल कॉलेज को मान्यता तो मिल गई लेकिन अब तक चिकित्सकों की कमी पूरी नहीं हो सकी है। वर्तमान में महज एक ही सहायक आचार्य हैं, जबकि आचार्य और सह आचार्य का पद रिक्त पड़ा हुआ है। यही नहीं वेंटीलेटर जैसी सुविधाएं नहीं हो सकी हैं। महज एक ही सहायक आचार्य है, जिसके सहारे अस्पताल चल रहा है। इसके अलावा एक एसआर चिकित्सक व सामान्य चिकित्सक हैं। ऐसे में प्रतिदिन प्रसूताओं को रेफर किया जा रहा है।