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Lalitpur News: नवीन तकनीक से होगी पांच गावों में पैमाइश
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तालबेहट तहसील के चुने गए पांच गांव
संवाद न्यूज एजेंसी
तालबेहट। शासन ने जमीन की नापजोख में अंतर और पक्षपात पर विराम लगाने के लिए नवीन तकनीक डीजीपीएस (डिफरेंशियल ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम) के आधार पर पैमाइश कराने की कवायद शुरू की है। इसके लिए तालबेहट तहसील के पांच गांवों को ट्रायल टेस्टिंग के लिए चुना है।
बुंदेलखंड के सबसे पिछड़े जिले ललितपुर की तालबेहट तहसील में आजादी के बाद से अब तक चकबंदी नहीं हुई है। किसानों के चक नहीं बन पाए हैं। दबंग गरीबों एवं कमजोर की जमीन पर कब्जा जमाए हैं। अपनी जमीन की पैमाइश के लिए किसान वर्षों से तहसील का चक्कर लगा रहे हैं। हदबंदी, पैमाइश और बंटवारे के कई वाद विचाराधीन हैं।
कई गांवों में बंदोबस्ती नक्शा न होने के कारण शातिर लोग सिंचाई विभाग के नक्शे के आधार पर राजस्व कर्मचारियों से साठगांठ कर पैमाइश कराते हैं। इससे भारी अंतर आता है। जिनकी भूमि नाप से प्रभावित होती है, वह आपत्ति दर्ज कराते हैं। एडीएम वित्त एवं राजस्व अंकुर श्रीवास्तव ने बताया कि इस पर लगाम लगाने के लिए अब सेटेलाइट के माध्यम से जमीन की पैमाइश की जाएगी। तहसील तालबेहट के पांच गांव नगदा, सहसा, सहसूती, बदनपुर और भुजऊपुरा को इसके लिए चुना गया है।
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तालबेहट। शासन ने जमीन की नापजोख में अंतर और पक्षपात पर विराम लगाने के लिए नवीन तकनीक डीजीपीएस (डिफरेंशियल ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम) के आधार पर पैमाइश कराने की कवायद शुरू की है। इसके लिए तालबेहट तहसील के पांच गांवों को ट्रायल टेस्टिंग के लिए चुना है।
बुंदेलखंड के सबसे पिछड़े जिले ललितपुर की तालबेहट तहसील में आजादी के बाद से अब तक चकबंदी नहीं हुई है। किसानों के चक नहीं बन पाए हैं। दबंग गरीबों एवं कमजोर की जमीन पर कब्जा जमाए हैं। अपनी जमीन की पैमाइश के लिए किसान वर्षों से तहसील का चक्कर लगा रहे हैं। हदबंदी, पैमाइश और बंटवारे के कई वाद विचाराधीन हैं।
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कई गांवों में बंदोबस्ती नक्शा न होने के कारण शातिर लोग सिंचाई विभाग के नक्शे के आधार पर राजस्व कर्मचारियों से साठगांठ कर पैमाइश कराते हैं। इससे भारी अंतर आता है। जिनकी भूमि नाप से प्रभावित होती है, वह आपत्ति दर्ज कराते हैं। एडीएम वित्त एवं राजस्व अंकुर श्रीवास्तव ने बताया कि इस पर लगाम लगाने के लिए अब सेटेलाइट के माध्यम से जमीन की पैमाइश की जाएगी। तहसील तालबेहट के पांच गांव नगदा, सहसा, सहसूती, बदनपुर और भुजऊपुरा को इसके लिए चुना गया है।
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