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मिड डे मील : वसूूली में शिक्षा विभाग का यू- टर्न
ब्यूरो ललितपुर।
Updated Wed, 18 Nov 2015 01:54 AM IST
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ललितपुर। बेसिक शिक्षा विभाग ने ग्राम प्रधानों से मिड डे मील की वसूली पर यू- टर्न ले लिया है। वर्तमान ग्राम प्रधानों को नहीं छेड़ा जाएगा, सिर्फ वर्ष 2005 के 139 बकाएदार ग्राम प्रधानों से ही वसूली की जाएगी। वर्तमान ग्राम प्रधानों से बकाए की वसूली ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। इन हालतों में वर्तमान ग्राम प्रधानों को चुनाव में उतरने के लिए शिक्षा विभाग से क्लीन चिट मिल गई है।
जिले के 1,560 विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना ठीक से संचालित नहीं हो पा रही है। इसकी प्रमुख वजह जनप्रतिनिधियों की जेब में योजना का लाखों रुपए चला गया है। सालों बीतने के बाद भी शिक्षा विभाग उस बकाए की वसूली नहीं कर सका है। बीते सालों में तत्कालीन बीएसए देवेंद्र कुमार सिंह ने वर्ष 2005 से 2010 तक के कार्यकाल में हुए गड़बड़झाले की वास्तविकता तक पहुंचने के उद्देश्य से लेखा- जोखा तैयार कराया था, जिसमें जिले की 340 में से 285 ग्राम सभाओं पर दो करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया निकला था। इस पर तत्कालीन बीएसए ने ग्राम पंचायतवार बकाएदारों पर वसूली का शिकंजा कसा। तमाम पूर्व प्रधानों पर प्राथमिकी दर्ज कराई, जिससे पूर्व प्रधानों में हड़कंप मच गया था। इस प्रक्रिया में करीब 65 लाख रुपए की वसूली हो गई थी।
लेकिन, 129 पूर्व प्रधानों ने वसूली की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए फूटी कौड़ी जमा नहीं की थी, जो आज भी लंबित बनी हुई है। इस तरह जिले के पूर्व प्रधानों पर करीब दो करोड़ रुपये का बकाया चल रहा है। इसे वसूलने की कसरत फिर शुरू हो गई है। जिला व क्षेत्र पंचायत के समय तत्कालीन बीएसए रामपाल सिंह ने शार्टकर्ट रास्ता अपनाया था। इसके तहत पंचायत चुनाव में उतरने वाले उम्मीदवारों से मिड डे मील का अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की सिफारिश की गई थी, जिसे जिला पंचायत राज अधिकारी दिनेश प्रसाद ने सिरे से खारिज कर दिया था। उनका कहना था कि जिलाधिकारी का आदेश कराए बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना संभव नहीं है।
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अब बीएसए ने वर्ष 2010 से 2015 का कार्यकाल पूरा कर चुके ग्राम प्रधानों का लेखाजोखा तैयार कराया, जिसमें करीब 152 प्रधान वसूली के लपेटे में आ गए थे। चिह्नित प्रधानों के खिलाफ वसूली की कार्रवाई शुरू होती कि बीएसए ने एक से पांच कुंतल अनाज अनाज हजम करने वालों को भी वसूली के दायरे में लेने का आदेश दे दिया। इस पर काम चल रहा था कि अब शिक्षा विभाग के अफसरों ने वसूली के मामले में यू- टर्न ले लिया। वर्तमान ग्राम प्रधानों से वसूली की कार्रवाई को फिलहाल टाल दिया गया है। अब सिर्फ वर्ष 2005 के प्रधानों से ही बकाया की वसूली पर जोर रखने का निर्णय लिया गया है।
वर्ष 2005 के चिह्नित प्रधानों को नए सिरे से सूचीबद्ध किया जा रहा है, जिसमें बकाया जमा करने वाले प्रधान का नाम व बकाएदार प्रधानों के नाम शामिल होंगे। इस सूची को मध्याह्न भोजन प्राधिकरण व चुनाव आयोग को भेजा जाएगा। जिला समन्वयक कपिल दुबे का कहना है कि मध्याह्न भोजन प्राधिकरण और निर्वाचन आयोग को बकाएदारों के नाम भेजने की प्रक्रिया चल रही है।
बेखौफ चुनाव लड़ेंगे बकाएदार प्रधान
ग्राम प्रधान के चुनाव में बकाएदार उम्मीदवार भी चुनाव लड़ने के पात्र होंगे। इसकी वजह शिक्षा विभाग ने वर्तमान प्रधानों से ध्यान हटा लिया है।
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जिले के 1,560 विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना ठीक से संचालित नहीं हो पा रही है। इसकी प्रमुख वजह जनप्रतिनिधियों की जेब में योजना का लाखों रुपए चला गया है। सालों बीतने के बाद भी शिक्षा विभाग उस बकाए की वसूली नहीं कर सका है। बीते सालों में तत्कालीन बीएसए देवेंद्र कुमार सिंह ने वर्ष 2005 से 2010 तक के कार्यकाल में हुए गड़बड़झाले की वास्तविकता तक पहुंचने के उद्देश्य से लेखा- जोखा तैयार कराया था, जिसमें जिले की 340 में से 285 ग्राम सभाओं पर दो करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया निकला था। इस पर तत्कालीन बीएसए ने ग्राम पंचायतवार बकाएदारों पर वसूली का शिकंजा कसा। तमाम पूर्व प्रधानों पर प्राथमिकी दर्ज कराई, जिससे पूर्व प्रधानों में हड़कंप मच गया था। इस प्रक्रिया में करीब 65 लाख रुपए की वसूली हो गई थी।
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लेकिन, 129 पूर्व प्रधानों ने वसूली की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए फूटी कौड़ी जमा नहीं की थी, जो आज भी लंबित बनी हुई है। इस तरह जिले के पूर्व प्रधानों पर करीब दो करोड़ रुपये का बकाया चल रहा है। इसे वसूलने की कसरत फिर शुरू हो गई है। जिला व क्षेत्र पंचायत के समय तत्कालीन बीएसए रामपाल सिंह ने शार्टकर्ट रास्ता अपनाया था। इसके तहत पंचायत चुनाव में उतरने वाले उम्मीदवारों से मिड डे मील का अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की सिफारिश की गई थी, जिसे जिला पंचायत राज अधिकारी दिनेश प्रसाद ने सिरे से खारिज कर दिया था। उनका कहना था कि जिलाधिकारी का आदेश कराए बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना संभव नहीं है।
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अब बीएसए ने वर्ष 2010 से 2015 का कार्यकाल पूरा कर चुके ग्राम प्रधानों का लेखाजोखा तैयार कराया, जिसमें करीब 152 प्रधान वसूली के लपेटे में आ गए थे। चिह्नित प्रधानों के खिलाफ वसूली की कार्रवाई शुरू होती कि बीएसए ने एक से पांच कुंतल अनाज अनाज हजम करने वालों को भी वसूली के दायरे में लेने का आदेश दे दिया। इस पर काम चल रहा था कि अब शिक्षा विभाग के अफसरों ने वसूली के मामले में यू- टर्न ले लिया। वर्तमान ग्राम प्रधानों से वसूली की कार्रवाई को फिलहाल टाल दिया गया है। अब सिर्फ वर्ष 2005 के प्रधानों से ही बकाया की वसूली पर जोर रखने का निर्णय लिया गया है।
वर्ष 2005 के चिह्नित प्रधानों को नए सिरे से सूचीबद्ध किया जा रहा है, जिसमें बकाया जमा करने वाले प्रधान का नाम व बकाएदार प्रधानों के नाम शामिल होंगे। इस सूची को मध्याह्न भोजन प्राधिकरण व चुनाव आयोग को भेजा जाएगा। जिला समन्वयक कपिल दुबे का कहना है कि मध्याह्न भोजन प्राधिकरण और निर्वाचन आयोग को बकाएदारों के नाम भेजने की प्रक्रिया चल रही है।
बेखौफ चुनाव लड़ेंगे बकाएदार प्रधान
ग्राम प्रधान के चुनाव में बकाएदार उम्मीदवार भी चुनाव लड़ने के पात्र होंगे। इसकी वजह शिक्षा विभाग ने वर्तमान प्रधानों से ध्यान हटा लिया है।