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मंथरा ने भरे कान, कैकेयी ने मांगे दो वरदान
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महरौनी (ललितपुर) श्री रामयश कीर्तन मंडली के तत्वावधान में चल रहे श्री रामलीला महोत्सव में श्रीराम वनगमन की लीला का मंचन हुआ, जिसे देखकर दर्शक भावविभोर हो गए। लीला मंचन में भगवान के स्वरूपों की प्रथम पांव पखराई का सौभाग्य मुन्नी किन्नर, चांदनी किन्नर व शागिर्दों को मिला।
लीला मंचन में राजा दशरथ के चारों कुमारों के विवाह संस्कार संपन्न होते हैं। द्वारचार टीका और पांव पखराई की रस्मों को निभाने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इसके बाद बरात अयोध्या वापस लौटती है और तीनों रानियां अपनी चारों पुत्र बधुओं की अगवानी करती हैं।
इधर, राजा दशरथ सभासदों के समक्ष श्रीराम को युवराज पद देने का प्रस्ताव रखते हैं और सभी उस पर अपनी सहमति देते हैं। धूमधाम से राम के राज तिलक की तैयारियां चलती हैं इसी बीच कुटिल मंथरा दासी जाकर रानी कैकई के कान भरती है। तब रानी अपनी दासी मंथरा की बातों में आकर आभूषण शृंगार आदि त्यागकर कोप भवन में चली जाती हैं। जानकारी पाकर राजा दशरथ वहां जाकर रानी से इसका कारण पूछते हैं। रानी कैकई राम की शपथ दिलाकर राजा से दो वर भरत को राजगद्दी और राम को वनवास मांगती हैं। यह सुनकर राजा हतप्रभ रह जाते हैं लेकिन रानी की हठ के आगे उनकी एक नहीं चलती। जब यह समाचार राम को मिलता है तो वह अपने पिता की आज्ञा से सहर्ष ही वन जाने को तैयार हो जाते हैं। वहीं सीता जी और लक्ष्मण भी उनके साथ वन जाने की हठ करते हैं। वनवास के लिए निकलते हैं। रास्ते में अयोध्या वासी उनको रोकने का भरपूर प्रयास करते हैं लेकिन भगवान राम रुके नहीं। वन पथ पर श्री राम की भेंट निषाद राज से होती है और निषाद राज उनका जोरदार स्वागत करते हैं। निषादराज के विनय करने पर श्रीराम श्रंगवेरपुर में प्रवास करते हैं। रामलीला महोत्सव में आज दिन शुक्रवार को भरत मिलाप और पंचवटी प्रवास की लीला होगी।
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इनका रहा सहयोग
अशोक रिछारिया, बाबूलाल नायक,श्यामस्वरूप पालीबाल ,रामेश्वर रिछारिया, कृष्णस्वरूप पटैरिया, रामेश्वर सोनी ,महेंद्र सिंह, आशाराम तिवारी, संजय पांडेय, कुलदीप खरे, जानकी पेंटर,आनंद त्रिपाठी, हृदयेश गोस्वामी, मनोज भौंडेले, शैलेंद्र नायक, मुकेश नायक, सोनू पाठक, नितिन जैन, हरिहर मोहन तिवारी, सुरेंद्र तिवारी, राजू सेन , राजू पेंटर, सतेंद्र पालीवाल, सुरेश श्रीवास्तव, महिपाल सिंह, दुष्यंत नायक, शंकर सिंह आदि।
इन्होंने निभाई भूमिका
लीला मंचन में प्रखर मिश्रा-राम,सूर्या नायक-लक्ष्मण, मानवेंद्र सिंह-सीता,सूर्यकांत त्रिपाठी-मंथरा,रजनीश रिछरिया -दशरथ, शैलेश चतुर्वेदी-वशिष्ठ, कृष्णकांत नायक-सुमंत, दिनेश राय- कैकई , रामू तिवारी-कौशल्या, बलराम राय- सुमित्रा, हरिहर मोहन तिवारी- विश्वामित्र, नितिनजय सिसौदिया- जनक, अखिलेश सोनी- सुनैना, अभय दुबे -सतानंद, भगवत भौंड़ेले -निषादराज सहित अमित नायक, राजबहादुर खरे, कल्लू राजा,विनोद कुशवाहा आदि पुरवासियों का अभिनय सराहनीय रहा।
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लीला मंचन में राजा दशरथ के चारों कुमारों के विवाह संस्कार संपन्न होते हैं। द्वारचार टीका और पांव पखराई की रस्मों को निभाने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इसके बाद बरात अयोध्या वापस लौटती है और तीनों रानियां अपनी चारों पुत्र बधुओं की अगवानी करती हैं।
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इधर, राजा दशरथ सभासदों के समक्ष श्रीराम को युवराज पद देने का प्रस्ताव रखते हैं और सभी उस पर अपनी सहमति देते हैं। धूमधाम से राम के राज तिलक की तैयारियां चलती हैं इसी बीच कुटिल मंथरा दासी जाकर रानी कैकई के कान भरती है। तब रानी अपनी दासी मंथरा की बातों में आकर आभूषण शृंगार आदि त्यागकर कोप भवन में चली जाती हैं। जानकारी पाकर राजा दशरथ वहां जाकर रानी से इसका कारण पूछते हैं। रानी कैकई राम की शपथ दिलाकर राजा से दो वर भरत को राजगद्दी और राम को वनवास मांगती हैं। यह सुनकर राजा हतप्रभ रह जाते हैं लेकिन रानी की हठ के आगे उनकी एक नहीं चलती। जब यह समाचार राम को मिलता है तो वह अपने पिता की आज्ञा से सहर्ष ही वन जाने को तैयार हो जाते हैं। वहीं सीता जी और लक्ष्मण भी उनके साथ वन जाने की हठ करते हैं। वनवास के लिए निकलते हैं। रास्ते में अयोध्या वासी उनको रोकने का भरपूर प्रयास करते हैं लेकिन भगवान राम रुके नहीं। वन पथ पर श्री राम की भेंट निषाद राज से होती है और निषाद राज उनका जोरदार स्वागत करते हैं। निषादराज के विनय करने पर श्रीराम श्रंगवेरपुर में प्रवास करते हैं। रामलीला महोत्सव में आज दिन शुक्रवार को भरत मिलाप और पंचवटी प्रवास की लीला होगी।
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इनका रहा सहयोग
अशोक रिछारिया, बाबूलाल नायक,श्यामस्वरूप पालीबाल ,रामेश्वर रिछारिया, कृष्णस्वरूप पटैरिया, रामेश्वर सोनी ,महेंद्र सिंह, आशाराम तिवारी, संजय पांडेय, कुलदीप खरे, जानकी पेंटर,आनंद त्रिपाठी, हृदयेश गोस्वामी, मनोज भौंडेले, शैलेंद्र नायक, मुकेश नायक, सोनू पाठक, नितिन जैन, हरिहर मोहन तिवारी, सुरेंद्र तिवारी, राजू सेन , राजू पेंटर, सतेंद्र पालीवाल, सुरेश श्रीवास्तव, महिपाल सिंह, दुष्यंत नायक, शंकर सिंह आदि।
इन्होंने निभाई भूमिका
लीला मंचन में प्रखर मिश्रा-राम,सूर्या नायक-लक्ष्मण, मानवेंद्र सिंह-सीता,सूर्यकांत त्रिपाठी-मंथरा,रजनीश रिछरिया -दशरथ, शैलेश चतुर्वेदी-वशिष्ठ, कृष्णकांत नायक-सुमंत, दिनेश राय- कैकई , रामू तिवारी-कौशल्या, बलराम राय- सुमित्रा, हरिहर मोहन तिवारी- विश्वामित्र, नितिनजय सिसौदिया- जनक, अखिलेश सोनी- सुनैना, अभय दुबे -सतानंद, भगवत भौंड़ेले -निषादराज सहित अमित नायक, राजबहादुर खरे, कल्लू राजा,विनोद कुशवाहा आदि पुरवासियों का अभिनय सराहनीय रहा।