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चार साल से अधर में लटका मुख्य नाला
ब्यूरो ललितपुर।
Updated Sat, 24 Oct 2015 02:04 AM IST
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ललितपुर। शहर के मुहल्ला आजादपुरा-तुवन टीला होते हुए गंदे पानी की निकासी के लिए बनाया जाने वाला नाला चार साल बाद भी पूर्ण नहीं हो सका। इससे गंदे पानी का जलभराव होने के कारण वहां रहने वाले लोगों को परेशान होना पड़ रहा है।
वर्णी कालेज, रिसाला मंदिर, आजादपुरा द्वितीय और भरतपुरा हाउस और आसपास का गंदा पानी भरतपुरा हाउस स्थित अंडर ग्राउंड नाले से निकलकर बीच के बंध में मिल जाता है। बीच के बंध से नाले को तालाब पुरा होते हुए नदी में पहुंचाए जाने की योजना थी। लेकिन, साल दर साल आजादपुरा व तुवन टीला में भवन बनते चले गए। नाले के दोनों ओर वर्तमान में 200 से अधिक भवन बने हुए हैं।
इससे निचले स्थान पर कई मुहल्लों से आने वाला गंदा पानी भरना शुरू हो गया, जिससे भवन स्वामियों के सामने समस्या आ गई। इस पर नगर पालिका ने करीब चार साल पहले नाला निर्माण की योजना बनाई। लगभग 600 मीटर लंबे, छह फुट चौड़े व छह फुट गहरे नाले के लिए 45 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। इसके बाद नाले का निर्माण कार्य शुरू हुआ और शनि मंदिर से शारदा मंदिर तक नाले का निर्माण कार्य पूर्ण हो गया। इस पर करीब 16 लाख रुपये खर्च हुए। इसके बाद आगे नाला निर्माण शुरू करने पर एक प्राइवेट कालोनी स्वामी व प्लाट मालिक इसका विरोध करने लगे। इस पर नाले का निर्माण कार्य बीच में ही रोक दिया गया और नगर पालिका ने नाले की शेष धनराशि को चांदमारी सहित अन्य मुहल्लों में निर्माण कार्य के लिए हस्तांतरित कर दी और नाले से प्रभावित मुहल्लावासियों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया।
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जलभराव होने से आसपास के रहने वाले भवन स्वामियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के दौरान उनके घरों में जहरीले कीड़े- मकोड़े घुस जाते हैं। साथ ही गंदा पानी भरा रहने से बदबू आती है, जिससे आसपास वाले परेशान हैं।
मुहल्लेवासियों की मानें तो पूर्व में हुई बरसात के कारण जलभराव होने से कई मकान जलमग्र हो गए थे। इससे कई दिनों तक समस्या बनी रही। वर्तमान में भी बहुत से परिवार गंदे पानी के किनारे रहने के लिए मजबूर हैं। हालांकि, निर्माण को लेकर अफसरों ने कई बार निरीक्षण किया, लेकिन कोई बात नहीं बन सकी। जानकारों की मानें तो प्राइवेट कालोनी का निर्माण होने से वहां पर ऊंचाई अधिक हो गई, जबकि नाला काफी गहरा है। ऐसे में पानी की निकासी को देखते हुए नाला निर्माण करना आसान नहीं है। इसीलिए नगर पालिका भी निर्माण कार्य करने से कतरा रही है।
लेकिन, पालिका की इस ढील का फायदा अवैध कब्जाधारक उठा रहे हैं। नहर के नीचे से निकले मुख्य चेंबर को एक भवन स्वामी ने कब्जा करके निर्माण कर लिया। इससे सफाई करने में परेशानी हो रही है। साथ ही आने वाले समय में उक्त चैंबर चोक होने की संभवना है। ऐसे में विकराल समस्या खड़ी हो जाएगी। लेकिन, जिम्मेदारों का इस ओर कतई ध्यान नहीं है।
.... तो विकराल होगी समस्या
ललितपुर। दो सैकड़ा से अधिक भवन स्वामी मुख्य नाले के दोनों ओर निवास कर रहे हैं। कई तो गंदे पानी के आसपास रह रहे हैं। ऐसे में नाले का निर्माण आवश्यक है। इसका निर्माण नहीं किया गया तो बरसात के सीजन में समस्या होगी। साथ ही गंदे पानी के भराव से संक्रामक बीमारियां भी फैल सकती हैं। पिछले साल तो इन स्थानों पर डेंगू के लार्वा भी मिल चुके हैं। ऐसी स्थिति में बड़ी संख्या में लोग बीमार हो सकते हैं।
इनका कहना है-
नाले को बनाने के लिए मुख्य सफाई निरीक्षक के साथ कई बार निरीक्षण किया गया, लेकिन अभी भी लोग विरोध कर रहे हैं। इससे समस्या हल नहीं हो पा रही है। जमीन मालिक लिखकर दें तो बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा। आम सहमति के बाद ही नाले का निर्माण किया जाएगा।
- विपिन कुमार, अवर अभियंता नगर पालिका।
इनका कहना है-
नाला निर्माण के लिए पिछले शासनकाल में काफी प्रयास किया गया, लेकिन पूर्ण नहीं हो सका। मुख्य कारण यह था कि कई लोग इसका विरोध कर रहे थे। इससे समस्या जस की तस बनी हुई है।
- राजेश दुबे, पूर्व पार्षद आजादपुरा।
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वर्णी कालेज, रिसाला मंदिर, आजादपुरा द्वितीय और भरतपुरा हाउस और आसपास का गंदा पानी भरतपुरा हाउस स्थित अंडर ग्राउंड नाले से निकलकर बीच के बंध में मिल जाता है। बीच के बंध से नाले को तालाब पुरा होते हुए नदी में पहुंचाए जाने की योजना थी। लेकिन, साल दर साल आजादपुरा व तुवन टीला में भवन बनते चले गए। नाले के दोनों ओर वर्तमान में 200 से अधिक भवन बने हुए हैं।
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इससे निचले स्थान पर कई मुहल्लों से आने वाला गंदा पानी भरना शुरू हो गया, जिससे भवन स्वामियों के सामने समस्या आ गई। इस पर नगर पालिका ने करीब चार साल पहले नाला निर्माण की योजना बनाई। लगभग 600 मीटर लंबे, छह फुट चौड़े व छह फुट गहरे नाले के लिए 45 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। इसके बाद नाले का निर्माण कार्य शुरू हुआ और शनि मंदिर से शारदा मंदिर तक नाले का निर्माण कार्य पूर्ण हो गया। इस पर करीब 16 लाख रुपये खर्च हुए। इसके बाद आगे नाला निर्माण शुरू करने पर एक प्राइवेट कालोनी स्वामी व प्लाट मालिक इसका विरोध करने लगे। इस पर नाले का निर्माण कार्य बीच में ही रोक दिया गया और नगर पालिका ने नाले की शेष धनराशि को चांदमारी सहित अन्य मुहल्लों में निर्माण कार्य के लिए हस्तांतरित कर दी और नाले से प्रभावित मुहल्लावासियों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया।
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जलभराव होने से आसपास के रहने वाले भवन स्वामियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के दौरान उनके घरों में जहरीले कीड़े- मकोड़े घुस जाते हैं। साथ ही गंदा पानी भरा रहने से बदबू आती है, जिससे आसपास वाले परेशान हैं।
मुहल्लेवासियों की मानें तो पूर्व में हुई बरसात के कारण जलभराव होने से कई मकान जलमग्र हो गए थे। इससे कई दिनों तक समस्या बनी रही। वर्तमान में भी बहुत से परिवार गंदे पानी के किनारे रहने के लिए मजबूर हैं। हालांकि, निर्माण को लेकर अफसरों ने कई बार निरीक्षण किया, लेकिन कोई बात नहीं बन सकी। जानकारों की मानें तो प्राइवेट कालोनी का निर्माण होने से वहां पर ऊंचाई अधिक हो गई, जबकि नाला काफी गहरा है। ऐसे में पानी की निकासी को देखते हुए नाला निर्माण करना आसान नहीं है। इसीलिए नगर पालिका भी निर्माण कार्य करने से कतरा रही है।
लेकिन, पालिका की इस ढील का फायदा अवैध कब्जाधारक उठा रहे हैं। नहर के नीचे से निकले मुख्य चेंबर को एक भवन स्वामी ने कब्जा करके निर्माण कर लिया। इससे सफाई करने में परेशानी हो रही है। साथ ही आने वाले समय में उक्त चैंबर चोक होने की संभवना है। ऐसे में विकराल समस्या खड़ी हो जाएगी। लेकिन, जिम्मेदारों का इस ओर कतई ध्यान नहीं है।
.... तो विकराल होगी समस्या
ललितपुर। दो सैकड़ा से अधिक भवन स्वामी मुख्य नाले के दोनों ओर निवास कर रहे हैं। कई तो गंदे पानी के आसपास रह रहे हैं। ऐसे में नाले का निर्माण आवश्यक है। इसका निर्माण नहीं किया गया तो बरसात के सीजन में समस्या होगी। साथ ही गंदे पानी के भराव से संक्रामक बीमारियां भी फैल सकती हैं। पिछले साल तो इन स्थानों पर डेंगू के लार्वा भी मिल चुके हैं। ऐसी स्थिति में बड़ी संख्या में लोग बीमार हो सकते हैं।
इनका कहना है-
नाले को बनाने के लिए मुख्य सफाई निरीक्षक के साथ कई बार निरीक्षण किया गया, लेकिन अभी भी लोग विरोध कर रहे हैं। इससे समस्या हल नहीं हो पा रही है। जमीन मालिक लिखकर दें तो बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा। आम सहमति के बाद ही नाले का निर्माण किया जाएगा।
- विपिन कुमार, अवर अभियंता नगर पालिका।
इनका कहना है-
नाला निर्माण के लिए पिछले शासनकाल में काफी प्रयास किया गया, लेकिन पूर्ण नहीं हो सका। मुख्य कारण यह था कि कई लोग इसका विरोध कर रहे थे। इससे समस्या जस की तस बनी हुई है।
- राजेश दुबे, पूर्व पार्षद आजादपुरा।