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हिंदुत्व प्रेमी महाराणा प्रताप एवं महाराजा छत्रसाल का मना जन्मोत्सव
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ललितपुर। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में सनातन धर्म की रक्षा करने वाले महाराजा महाराणा प्रताप एवं बुंदेलखंड केसरी महाराजा छत्रसाल जूदेव की जयंती मनाई गई।
कार्यक्रम में महापुरुषों के चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलित किया गया। कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि महाराणा प्रताप ने 17 वर्ष की आयु में हल्दी घाटी का युद्ध लड़ा था। जिलाध्यक्ष बृजेन्द्र सिंह परमार ने कहा कि बुंदेलखंड केसरी महाराजा छत्रसाल जूदेव का जन्म पन्ना जिले के मोर पहाड़ी गांव में 1648 ईसवी में हुआ था। उनके पिता का नाम चंपतराय था। इसके अलावा भगवान सिंह चौहान, प्रदेश संगठन मंत्री भूपेंद्र सिंह तोमर और भगवत सिंह बैस ने भी संबोधित किया। कहा कि उन्होंने हमेशा क्षत्रिय समाज का मस्तक ऊंचा रखा और कभी हार न मानी। इस अवसर कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र सिंह चौहान, तहसील अध्यक्ष भगवान सिंह चौहान, बुंदेलखंड अध्यक्ष सुरेन्द्रपाल सिंह बघेल, महिला जिलाध्यक्ष बेवी राजा बुंदेला, भूपेंद्र सिंह तोमर, उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह, चंद्रपाल सिंह परमार, जयहिंद सिंह परमार, देवेंद्र सिंह चौहान, जंडेल सिंह परमार, ताहर सिंह परमार, हरेंद्र प्रताप सिंह उपस्थित रहे। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष ब्रजेंद्र सिंह परमार ने की और संचालन जिला महामंत्री भगवत सिंह बैस ने किया। अंत में बॉबी राजा पटसेमरा ने सभी का आभार व्यक्त किया।
महाराणा प्रताप की शूरवीरता सदैव की जाएगी याद
डोंगराखुर्द (ललितपुर)। कंपोजिट पूर्व माध्यमिक विद्यालय गुरयाना की वर्चुअल बैठक में 481 वीं जयंती पर महाराणा प्रताप के शौर्य, पराक्रम, त्याग और बलिदान को नमन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि महाराणा प्रताप की शूरवीरता को सदैव याद किया जाएगा।
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इस मौके पर अहिंसा सेवा संगठन के संस्थापक विशाल जैन पवा ने कहा कि महाराणा प्रताप का संघर्ष हमें प्रेरणा देता है। एआरपी शक्ति सिंह ने कहा कि यदि भारत के वीरों की बात की जाए तो महाराणा प्रताप का नाम अवश्य लिया जाता है। प्रधानाध्यापक संतोष कुशवाहा ने कहा कि महाराणा प्रताप ने अकबर को रणभूमि में कई बार टक्कर दी। यहां तक कि अपने परिवार के साथ जंगलों में विपरीत से विपरीत परिस्थितियां भी देखी पर अपनी पराजय नहीं कभी स्वीकारी। सअ संध्या ने कहा कि आज भी महाराणा प्रताप के शौर्य और वीरता की कहानियां सुनाई जाती हैं। उनका नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने युद्ध कौशल अपनी मां से ही सीखा था। सअ नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुगल बादशाह अकबर और महाराणा प्रताप के बीच युद्ध सन 1576 ई. में लड़ा गया था। अकबर के पास बहुत बड़ी सेना और हथियार थे पर महाराणा प्रताप के पास उनकी शौर्य, वीरता थी। महाराणा प्रताप का व्यक्तित्व और कृतित्व युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। इस मौके पर राघवेंद्र यादव, हाकम सिंह, प्रभा, अनीता तिवारी, विनीता पाठक मौजूद रहे।
शौर्य और राष्ट्र भक्ति की प्रतिमूर्ति हैं महाराणा प्रताप
ललितपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने ऑनलाइन कार्यक्रम कर महाराणा प्रताप की जयंती मनाई गई। इसमें वक्ताओं ने उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि महाराणा प्रताप शौर्य और राष्ट्र भक्ति की प्रतिमूर्ति हैं।
मुख्य वक्ता धर्मेंद्र सह विभाग कार्यवाह ने कहा कि महाराणा प्रताप का नाम लेते ही हमें गौरव की अनुभूति होती है। जिला कार्यवाह आशीष चौबे ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि हम सभी को मां भारती के ऐसे महान सपूत महाराणा प्रताप का अनुसरण करना चाहिए। जिला संघचालक रमेश सोनी आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में जिले के सभी खंडों से स्वयंसेवकों ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर विभाग कार्यकारिणी सदस्य सज्जन, विभाग प्रचार प्रमुख मनोज, विभाग संपर्क प्रमुख अमर सिंह, सह जिला कार्यवाह नरेंद्र, बौद्धिक शिक्षण प्रमुख हार्दय नारायण, प्रताप, जगदीश प्रसाद शर्मा, विक्रांत, सुरेंद्र मोहन, राकेश, राम प्रकाश मोदी, अनिल सिरसा, नारायण बंजारा, अवधेश गोस्वामी, नगर प्रचारक यश, तालबेहट विस्तारक विकास, केएल मालवीय, रामकुमार व जिला प्रचार प्रमुख आशीष रिछारिया आदि मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में महापुरुषों के चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलित किया गया। कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि महाराणा प्रताप ने 17 वर्ष की आयु में हल्दी घाटी का युद्ध लड़ा था। जिलाध्यक्ष बृजेन्द्र सिंह परमार ने कहा कि बुंदेलखंड केसरी महाराजा छत्रसाल जूदेव का जन्म पन्ना जिले के मोर पहाड़ी गांव में 1648 ईसवी में हुआ था। उनके पिता का नाम चंपतराय था। इसके अलावा भगवान सिंह चौहान, प्रदेश संगठन मंत्री भूपेंद्र सिंह तोमर और भगवत सिंह बैस ने भी संबोधित किया। कहा कि उन्होंने हमेशा क्षत्रिय समाज का मस्तक ऊंचा रखा और कभी हार न मानी। इस अवसर कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र सिंह चौहान, तहसील अध्यक्ष भगवान सिंह चौहान, बुंदेलखंड अध्यक्ष सुरेन्द्रपाल सिंह बघेल, महिला जिलाध्यक्ष बेवी राजा बुंदेला, भूपेंद्र सिंह तोमर, उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह, चंद्रपाल सिंह परमार, जयहिंद सिंह परमार, देवेंद्र सिंह चौहान, जंडेल सिंह परमार, ताहर सिंह परमार, हरेंद्र प्रताप सिंह उपस्थित रहे। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष ब्रजेंद्र सिंह परमार ने की और संचालन जिला महामंत्री भगवत सिंह बैस ने किया। अंत में बॉबी राजा पटसेमरा ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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महाराणा प्रताप की शूरवीरता सदैव की जाएगी याद
डोंगराखुर्द (ललितपुर)। कंपोजिट पूर्व माध्यमिक विद्यालय गुरयाना की वर्चुअल बैठक में 481 वीं जयंती पर महाराणा प्रताप के शौर्य, पराक्रम, त्याग और बलिदान को नमन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि महाराणा प्रताप की शूरवीरता को सदैव याद किया जाएगा।
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इस मौके पर अहिंसा सेवा संगठन के संस्थापक विशाल जैन पवा ने कहा कि महाराणा प्रताप का संघर्ष हमें प्रेरणा देता है। एआरपी शक्ति सिंह ने कहा कि यदि भारत के वीरों की बात की जाए तो महाराणा प्रताप का नाम अवश्य लिया जाता है। प्रधानाध्यापक संतोष कुशवाहा ने कहा कि महाराणा प्रताप ने अकबर को रणभूमि में कई बार टक्कर दी। यहां तक कि अपने परिवार के साथ जंगलों में विपरीत से विपरीत परिस्थितियां भी देखी पर अपनी पराजय नहीं कभी स्वीकारी। सअ संध्या ने कहा कि आज भी महाराणा प्रताप के शौर्य और वीरता की कहानियां सुनाई जाती हैं। उनका नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने युद्ध कौशल अपनी मां से ही सीखा था। सअ नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुगल बादशाह अकबर और महाराणा प्रताप के बीच युद्ध सन 1576 ई. में लड़ा गया था। अकबर के पास बहुत बड़ी सेना और हथियार थे पर महाराणा प्रताप के पास उनकी शौर्य, वीरता थी। महाराणा प्रताप का व्यक्तित्व और कृतित्व युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। इस मौके पर राघवेंद्र यादव, हाकम सिंह, प्रभा, अनीता तिवारी, विनीता पाठक मौजूद रहे।
शौर्य और राष्ट्र भक्ति की प्रतिमूर्ति हैं महाराणा प्रताप
ललितपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने ऑनलाइन कार्यक्रम कर महाराणा प्रताप की जयंती मनाई गई। इसमें वक्ताओं ने उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि महाराणा प्रताप शौर्य और राष्ट्र भक्ति की प्रतिमूर्ति हैं।
मुख्य वक्ता धर्मेंद्र सह विभाग कार्यवाह ने कहा कि महाराणा प्रताप का नाम लेते ही हमें गौरव की अनुभूति होती है। जिला कार्यवाह आशीष चौबे ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि हम सभी को मां भारती के ऐसे महान सपूत महाराणा प्रताप का अनुसरण करना चाहिए। जिला संघचालक रमेश सोनी आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में जिले के सभी खंडों से स्वयंसेवकों ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर विभाग कार्यकारिणी सदस्य सज्जन, विभाग प्रचार प्रमुख मनोज, विभाग संपर्क प्रमुख अमर सिंह, सह जिला कार्यवाह नरेंद्र, बौद्धिक शिक्षण प्रमुख हार्दय नारायण, प्रताप, जगदीश प्रसाद शर्मा, विक्रांत, सुरेंद्र मोहन, राकेश, राम प्रकाश मोदी, अनिल सिरसा, नारायण बंजारा, अवधेश गोस्वामी, नगर प्रचारक यश, तालबेहट विस्तारक विकास, केएल मालवीय, रामकुमार व जिला प्रचार प्रमुख आशीष रिछारिया आदि मौजूद रहे।