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महामना का मन हिमालय से भी ऊंचा और सागर से भी विशाल था: कमलेश चौधरी
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ललितपुर। राष्ट्रभक्त, स्वाधीनता सेनानी, सजग पत्रकार, कुशल अधिवक्ता और ‘श्रीमद्भागवत’ महापुराण, वेद-वेदांत पाठी महामना मदन मोहन मालवीय की जयंती श्री दीपचंद्र चौधरी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में मनाई गई। उनके चित्र के समक्ष पुष्प एवं दीप जलाकर महाविद्यालय के संस्थापक प्रबंधक कमलेश चौधरी ने कहा कि लगभग सौ साल पहले इस महान राष्ट्रविभूति ने पराधीन भारत में एक शहर से दूसरे शहर तक घूम-घूमकर उस समय एक करोड़ साठ लाख का दान लेकर उत्कृष्ट विवि. को खड़ा किया था।
महाविद्यालय के आचार्य भगवत नारायण शर्मा ने कहा कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के शुभारंभ महोत्सव के मौके पर गांधीजी को आमंत्रित करके उनका ऐसा उद्बोधन कराया गया था कि अध्यक्षता कर रहा अंग्रेज वायसराय तिलमिला उठा। गांधी जी को बोलने से जब रोका गया तो जनता एक स्वर से चिल्ला उठी कि उन्हें बोलने दिया जाय। भारत की जंग-ए-आजादी का वह लम्हा मदन मोहल मालवीय की चतुराई के कारण मील का पत्थर साबित हुआ। प्राचार्य डॉ. जेएस तोमर, प्रबंध निदेशक नरेंद्र चौधरी, प्रवीण चौधरी, प्रदीप चौधरी भारतीय जनता पार्टी के जिला महामंत्री गौरव चौधरी, विकास चौधरी, प्रतीक चौधरी एवं अन्य आचार्यगणों में प्रो. आदित्य मिश्रा, प्रो. अभिषेक रावत, प्रो. केपी कोरी, प्रो. एकता शर्मा, प्रो. सुमिता पांडेय, प्रो. पुष्पेंद्र वर्मा, प्रो. पलक जैन, प्रो. विनीता जैन, भावना चढार, सपना चक्रवती, प्रो. महेंद्र कुमार झां, डॉ. रामेंद्र कुमार, यासमीन जहां, मयूरी शर्मा, फरहीन बानो, रीमा यादव, नीलेश नामदेव, आकाश, प्रदीप कुमार गंगेले, सुमन कुमार आदि की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम का संचालन प्रवक्ता राकेश कुमार राजन ने किया।
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महाविद्यालय के आचार्य भगवत नारायण शर्मा ने कहा कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के शुभारंभ महोत्सव के मौके पर गांधीजी को आमंत्रित करके उनका ऐसा उद्बोधन कराया गया था कि अध्यक्षता कर रहा अंग्रेज वायसराय तिलमिला उठा। गांधी जी को बोलने से जब रोका गया तो जनता एक स्वर से चिल्ला उठी कि उन्हें बोलने दिया जाय। भारत की जंग-ए-आजादी का वह लम्हा मदन मोहल मालवीय की चतुराई के कारण मील का पत्थर साबित हुआ। प्राचार्य डॉ. जेएस तोमर, प्रबंध निदेशक नरेंद्र चौधरी, प्रवीण चौधरी, प्रदीप चौधरी भारतीय जनता पार्टी के जिला महामंत्री गौरव चौधरी, विकास चौधरी, प्रतीक चौधरी एवं अन्य आचार्यगणों में प्रो. आदित्य मिश्रा, प्रो. अभिषेक रावत, प्रो. केपी कोरी, प्रो. एकता शर्मा, प्रो. सुमिता पांडेय, प्रो. पुष्पेंद्र वर्मा, प्रो. पलक जैन, प्रो. विनीता जैन, भावना चढार, सपना चक्रवती, प्रो. महेंद्र कुमार झां, डॉ. रामेंद्र कुमार, यासमीन जहां, मयूरी शर्मा, फरहीन बानो, रीमा यादव, नीलेश नामदेव, आकाश, प्रदीप कुमार गंगेले, सुमन कुमार आदि की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम का संचालन प्रवक्ता राकेश कुमार राजन ने किया।
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