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गुरुद्वारा में हर्षोल्लास से मना लोहड़ी पर्व
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- फोटो : gurudwara.jpg
ललितपुर। पंजाबी समाज का प्रमुख त्योहार लोहड़ी गुरुद्वारा में हर्षोल्लास से मनाया गया। ढोल नगाड़ों के बीच प्रसाद वितरित किया गया।
लोहड़ी के मौके पर लकड़ी के ढेर पर अग्नि जलाकर उसकी परिक्रमा की गई और खुशियों के गीत गाए गए। गीतों में दुल्ला भट्टी वालों की कहानी सुंदर मुंदरीये तेरा कौन सहारा... गीत गाए गए। दुल्ला भट्टी वाला के अनुसार मुगलकाल में अकबर के समय में कुछ अमीर व्यापारी सामान की जगह लड़कियों को बेचने का व्यापार करते थे। दुल्ला भट्टी वाले ने पंजाब में कई लड़कियों को व्यापारियों से बचाकर लड़कियों की शादी सुयोग्य वर ढूंढ कर करा दी थी, तब से दुल्ला भट्टी वाले की याद में पंजाबी लोकगीत गाया जा रहा है। पंजाब में जाड़े के मौसम में धान व चावल की फसल तैयार होकर घर में आती है। फुर्सत का समय होने पर किसान आग को जलाकर खुशी मनाते हैं। इस दौरान वैवाहिक जोड़े का प्रथम शादी का वर्ष होने पर और परिवार में प्रथम पुत्र या पुत्री पैदा होने पर उसकी खुशियां मनाते हुए अग्नि के फेरे लगाकर धान व जवाहर के फुल्ले, रेबड़ियां और मूंगफली का प्रसाद बांटा गया।
इस अवसर पर मुख्य ग्रंथी ज्ञानी मोकम सिंह ने सभी को लोहड़ी की बधाई दी। अध्यक्ष ओंकार सिंह सलूजा, संरक्षक जितेंद्र सिंह सलूजा, हरविंदर सिंह सलूजा, सुरजीत सिंह सलूजा, मनजीत सिंह सलूजा, परमजीत सिंह छतवाल, वीरेंद्र सिंह बीके, जसपाल सिंह, मनिंदर सिंह, चरणजीत सिंह, लवशीत सिंह अरोरा, दलजीत सिंह, सुखप्रीत सिंह, गुरदीप सिंह, नरेंद्र सिंह, अमरजीत सिंह, मनमीत सिंह, जगजीत सिंह बॉबी, राजू सिंधी, नानक सिंधी, संतोष डोडवानी, गोपीचंद डोंडवानी, वरुण कालरा, कन्हैयालाल सिंधी, सतीश अरोड़ा, नीटू कालरा आदि उपस्थित रहे।
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लोहड़ी के मौके पर लकड़ी के ढेर पर अग्नि जलाकर उसकी परिक्रमा की गई और खुशियों के गीत गाए गए। गीतों में दुल्ला भट्टी वालों की कहानी सुंदर मुंदरीये तेरा कौन सहारा... गीत गाए गए। दुल्ला भट्टी वाला के अनुसार मुगलकाल में अकबर के समय में कुछ अमीर व्यापारी सामान की जगह लड़कियों को बेचने का व्यापार करते थे। दुल्ला भट्टी वाले ने पंजाब में कई लड़कियों को व्यापारियों से बचाकर लड़कियों की शादी सुयोग्य वर ढूंढ कर करा दी थी, तब से दुल्ला भट्टी वाले की याद में पंजाबी लोकगीत गाया जा रहा है। पंजाब में जाड़े के मौसम में धान व चावल की फसल तैयार होकर घर में आती है। फुर्सत का समय होने पर किसान आग को जलाकर खुशी मनाते हैं। इस दौरान वैवाहिक जोड़े का प्रथम शादी का वर्ष होने पर और परिवार में प्रथम पुत्र या पुत्री पैदा होने पर उसकी खुशियां मनाते हुए अग्नि के फेरे लगाकर धान व जवाहर के फुल्ले, रेबड़ियां और मूंगफली का प्रसाद बांटा गया।
इस अवसर पर मुख्य ग्रंथी ज्ञानी मोकम सिंह ने सभी को लोहड़ी की बधाई दी। अध्यक्ष ओंकार सिंह सलूजा, संरक्षक जितेंद्र सिंह सलूजा, हरविंदर सिंह सलूजा, सुरजीत सिंह सलूजा, मनजीत सिंह सलूजा, परमजीत सिंह छतवाल, वीरेंद्र सिंह बीके, जसपाल सिंह, मनिंदर सिंह, चरणजीत सिंह, लवशीत सिंह अरोरा, दलजीत सिंह, सुखप्रीत सिंह, गुरदीप सिंह, नरेंद्र सिंह, अमरजीत सिंह, मनमीत सिंह, जगजीत सिंह बॉबी, राजू सिंधी, नानक सिंधी, संतोष डोडवानी, गोपीचंद डोंडवानी, वरुण कालरा, कन्हैयालाल सिंधी, सतीश अरोड़ा, नीटू कालरा आदि उपस्थित रहे।
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