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अदरक मंडी में बिजली न पानी, िकसानों को परेशानी

Sun, 15 Dec 2019 01:33 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 15 Dec 2019 01:33 AM IST
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light and watter not availble at ginger mandi
अदरक मंडी में फैला कीचड़ - फोटो : TALDEHATE
तालबेहट। लाखों रुपये का राजस्व देने वाली अदरक मंडी में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। बिल भुगतान नहीं करने के कारण बिजली और पानी का कनेक्शन कटा पड़ा है। सुरक्षा का उचित प्रबंध नहीं है। इस कारण कई बार चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं। व्यापारियों में नाराजगी है, परंतु कोई उनकी सुनने वाला नहीं है। किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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अदरक की खेती मौसम की अनुकूलता पर निर्भर रहने वाली खेती है। इसकी खेती पर बरसात की अधिकता, जल भराव और धूप का प्रभाव पड़ता है। मौसम यदि साफ रहे तो अदरक की पैदावार किसानों को अधिक लाभकारी होती है परंतु यदि मौसम साथ न दे तो यह खेती किसानों को बर्बाद करने का काम भी करती है। किसानों ने बताया कि क्षेत्र में इसकी पैदावार पहले से अधिक होने लगी है, परंतु दो वर्ष से फसल में रोग लगने के कारण माल की आवक कम हुई है। अदरक की पैदावार के लिए सितंबर का मौसम सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। पानी की अधिकता से अदरक गल जाता है और जमीन में पानी देने के बाद यदि बरसात होने के कुछ दिन बाद तेज धूप निकलती है तो भी अदरक में रोग लग जाता है। एक बार रोग लगने से उसे बचाना काफी मुश्किल होता है।
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मंडी में पहले गांव-गांव से किसान एक ही ट्रैक्टर में माल लेकर आते थे, जिससे मंडी में ट्रैक्टरों का मेला लगा रहता था। अब मंडी में ट्रैक्टरों का मेला नहीं नजर आता है। इसका प्रमुख कारण गांव-गांव में टैक्सी और आपे का चलना है। इसके कारण अधिकांश किसान टैक्सी का उपयोग करने लगे हैं, जिससे थोड़ा सा माल कम पैसों में आसानी से मंडी पहुंच जाता है। दो बोरे अदरक के लिए किसान मोटर साइकिलों का उपयोग करने लगे हैं।
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अव्यवस्थाओं की है भरमार
वर्तमान में अदरक मंडी में अव्यवस्थाओं की भरमार है। यहां किसानों के अदरक की मिट्टी की धुलाई की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। बिजली का बिल लगभग पचपन लाख रुपये हो जाने के कारण कनेक्शन कटा हुआ है। पानी का कनेक्शन कटा है और मंडी में लगे पांच हैंडपंप में से ज्यादातर खराब हैं। अदरक में लगी मिट्टी साफ करने के लिए समीप बने तालाब से किसान और आढ़तिया पानी लेकर काम चला रहे हैं। मंडी की सड़क पूरी तरह से उखड़ चुकी है। जगह-जगह गिट्टी उखड़ी पड़ी है। यात्री प्रतीक्षालय भी कूड़ाघर में तब्दील हो चुका है। दुकानों के ऊपर लगे टिनशेड भी कई जगह से टूट चुके हैं। जगह- जगह गंदगी के ढेर लगे हैं।
पर्याप्त सुरक्षा का भी है अभाव
यहां सुरक्षाकर्मियों के अलावा अधीनस्थ कर्मचारियों की भारी कमी है। मात्र दो पीआरडी के जवान मंडी की सुरक्षा की कमान संभाले हुए हैं। केवल मंडी प्रभारी ही पूरी मंडी का काम देख रहे हैं। आलम यह है कि मंडी प्रभारी के बाहर जाने पर प्राइवेट लोगों से काम लिया जा रहा है ।
नीलामी चबूतरा पर साफ होता है अदरक
तालबेहट। व्यापारियों के माल की बिक्री के लिए नीलामी चबूतरा बनाया गया है, पर, मंडी में नीलामी चबूतरा पर अदरक की धुलाई की जाती है और नीलामी दुकान के बाहर की जाती है। इससे कभी- कभी अधिक माल आने पर सड़क पर माल फैलाए जाने से आने- जाने का रास्ता तक बंद हो जाता है।
फोटो = 06
मंडी शुल्क और दुकान का किराया देने के बावजूद हम लोगों को बिजली और पानी की सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों को कई बार अवगत कराया, परंतु किसी ने आज तक कोई ध्यान नहीं दिया।
- राकेश गुप्ता, व्यापारी
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मंडी में सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। काफी समय से पुताई और सफाई तक नहीं कराई गई। सड़क भी पूरी तरह से उखड़ गई है। कई बार माल चोरी की घटनाएं हो चुकीं हैं। इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए।
-अल्लादीन, आढ़ती अदरक मंडी तालबेहट।
फोटो सहित =08
अदरक की खेती काफी साफ सफाई और मौसम के अनुकूलता पर निर्भर करती है। पिछले दो वर्ष से अदरक में रोग लगा रहा है। इससे किसान परेशान है। फसल की उत्पादकता कम हो रही है।

- सोनी कुुशवाहा, किसान आजादपुरा
फोटो सहित =09
दो माह में आई उपज
तालबेहट। इस बर्ष अक्टूबर में 2450 क्विंटल अदरक और 847 क्विंटल अरबी तथा नवंबर में 5226 क्विंटल अदरक और 3245 क्विंटल अरबी बिकने आई। जबकि, पिछले वर्ष 2018 के अक्तूबर में 9830 क्विंटल अदरक और 4475 क्विंटल अरबी तथा नवंबर में 3188 क्विंटल अदरक और 2277 क्विंटल अरबी का मंडी से लेन- देन हुआ। प्रत्येक जिंस पर 2.5 फीसदी टैक्स लिया जाता है। मंडी में अदरक की आवक बाहरी मंडी में जिंस की कीमतों पर निर्भर रहती है।
- मनोज सूरी, मंडी प्रभारी
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