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मनरेगा का लेबर बजट बढ़ेगा
ब्यूरो
Updated Wed, 10 Feb 2016 12:50 AM IST
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ललितपुर। जनपद में सूखे के असर को कम करने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का सहारा लिया जा रहा है।
जॉब कार्डधारक श्रमिकों को मनरेगा के तहत ज्यादा से ज्यादा काम दिलाने के उद्देश्य से अगले वित्तीय वर्ष के लेबर बजट में तीन लाख मानव दिवस बढ़ाने की तैयारी है, जिससे लेबर बजट 72 करोड़ की जगह 81.24 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है।
बुंदेलखंड का अति पिछड़ा जनपद ललितपुर सूखा की चपेट में है। सैकड़ों एकड़ भूमि में फसल की बुवाई नहीं होने से कृषि आधारित रोजगार सिमटकर रह गया है, जिससे रोजगार की बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। तमाम मजदूर रोजगार के लिए या तो पलायन कर गए या फिर महानगरों की ओर कूच करने की तैयारी है।
विकास विभाग के अफसरों ने सूखे से निपटने के मकसद से मनरेगा का लेबर बजट बढ़ाने की योजना बना ली है, जिसपर उन्होंने काम आरंभ करते हुए अनुमानित लेबर बजट तैयार कर लिया है, इसमें 72 करोड़ के लेबर बजट को 81.24 करोड़ तक ले जाने के लिए मानव दिवस में बढ़ोत्तरी करने का निर्णय लिया गया है।
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वर्तमान वित्तीय वर्ष के 27.90 लाख के मुकाबले अगले वित्तीय वर्ष 2016-17 में 30.27 लाख मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दौरान जैविक खाद, बर्मी कंपोस्ट, पोल्ट्री फार्म, कूप, बंधी, गूल, शौचालय और पक्की सड़कें बनाई जाएंगी। इसके अलावा कृषि से संबंधित काम कराने पर जोर दिया गया है।
विभिन्न ब्लॉकों में क्षेत्र पंचायतों की बैठकें हो गई हैं, जिसमें लेबर बजट तय कर लिया गया है। अब इस बजट पर जिला स्तरीय समिति की अंतिम मुहर लगना बाकी है। यदि इस अनुमानित बजट का मामूली संशोधनों के साथ अनुमोदन हो जाता है तो श्रमिकों की रोजगार नहीं मिलने की समस्या का समाधान हो जाएगा।
लक्ष्य के करीब पहुंचे
वतर्मान वित्तीय वर्ष में 27.90 लाख के मुकाबले 24,95,749 मानव दिवस का सृजन हो चुका है, इसमें 64,791 परिवारों को रोजगार प्राप्त हो चुका है। इस समय 12,892 जॉब कार्डधारक परिवार काम कर रहे हैं।
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जॉब कार्डधारक श्रमिकों को मनरेगा के तहत ज्यादा से ज्यादा काम दिलाने के उद्देश्य से अगले वित्तीय वर्ष के लेबर बजट में तीन लाख मानव दिवस बढ़ाने की तैयारी है, जिससे लेबर बजट 72 करोड़ की जगह 81.24 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है।
बुंदेलखंड का अति पिछड़ा जनपद ललितपुर सूखा की चपेट में है। सैकड़ों एकड़ भूमि में फसल की बुवाई नहीं होने से कृषि आधारित रोजगार सिमटकर रह गया है, जिससे रोजगार की बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। तमाम मजदूर रोजगार के लिए या तो पलायन कर गए या फिर महानगरों की ओर कूच करने की तैयारी है।
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विकास विभाग के अफसरों ने सूखे से निपटने के मकसद से मनरेगा का लेबर बजट बढ़ाने की योजना बना ली है, जिसपर उन्होंने काम आरंभ करते हुए अनुमानित लेबर बजट तैयार कर लिया है, इसमें 72 करोड़ के लेबर बजट को 81.24 करोड़ तक ले जाने के लिए मानव दिवस में बढ़ोत्तरी करने का निर्णय लिया गया है।
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वर्तमान वित्तीय वर्ष के 27.90 लाख के मुकाबले अगले वित्तीय वर्ष 2016-17 में 30.27 लाख मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दौरान जैविक खाद, बर्मी कंपोस्ट, पोल्ट्री फार्म, कूप, बंधी, गूल, शौचालय और पक्की सड़कें बनाई जाएंगी। इसके अलावा कृषि से संबंधित काम कराने पर जोर दिया गया है।
विभिन्न ब्लॉकों में क्षेत्र पंचायतों की बैठकें हो गई हैं, जिसमें लेबर बजट तय कर लिया गया है। अब इस बजट पर जिला स्तरीय समिति की अंतिम मुहर लगना बाकी है। यदि इस अनुमानित बजट का मामूली संशोधनों के साथ अनुमोदन हो जाता है तो श्रमिकों की रोजगार नहीं मिलने की समस्या का समाधान हो जाएगा।
लक्ष्य के करीब पहुंचे
वतर्मान वित्तीय वर्ष में 27.90 लाख के मुकाबले 24,95,749 मानव दिवस का सृजन हो चुका है, इसमें 64,791 परिवारों को रोजगार प्राप्त हो चुका है। इस समय 12,892 जॉब कार्डधारक परिवार काम कर रहे हैं।