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समाज में ज्ञान एवं संस्कारों की पुनर्स्थापना आवश्यक: जगद्गुरु देवाचार्य
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ललितपुर। नगर के श्री लक्ष्मी नृसिंह मंदिर में श्री गुरु पूर्णिमा महोत्सव के उपलक्ष्य में धर्मसभा व सत्संग समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान जगद्गुरु द्वाराचार्य मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज ने कहा कि वैदिक संस्कृति की रक्षा के लिए समाज में ज्ञान और संस्कारों की पुन: स्थापना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में शिक्षा एवं संस्कारों को सर्वाधिक महत्व दिया गया है लेकिन वर्तमान में मनुष्य धर्म से दूर होता जा रहा है। मनुष्य के अपवित्र आचरण से प्राकृतिक आपदाएं झेलनी पड़ रही हैं। आपदाओं का मुकाबला नैतिक संस्कारों और ईश्वर की साधना से किया जा सकता है। देश की संस्कृति एवं धर्म को बचाने के लिए सत्य संकल्प की आवश्यकता है।
इस अवसर पर महंत राम बालक दास महाराज, महंत गंगा दास महाराज, राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ, धर्मेंद्र रावत, गिरीश पाठक, विवेक सड़ैया, गोविंद नारायण रावत, नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि घनश्याम साहू, रामेश्वर प्रसाद सड़ैया, दिनेश गोस्वामी, निखिल तिवारी, राजेश दुबे, विष्णु अग्रवाल, बल्लू अग्रवाल, दिवाकर शर्मा, ज्योति सिंह कल्पनीत लोधी, राजेंद्र वाजपेयी, दुर्गा प्रसाद पाठक, भगवत नारायण वाजपेई, अनूप मोदी, जयशंकर प्रसाद द्विवेदी, रामसेवक पाठक, रामनारायण पाठक, जुगल किशोर रावत, जयशंकर प्रसाद द्विवेदी, नरेश विदुआ, नरेश शेखावत, संजय अवस्थी, राहुल शुक्ला, अंतु पारौल, कुंदन पाल, संजू श्रोती, विजय जैन, विलास पटैरिया, श्रीकांत करौलिया, मनीष जैन, उमाकांत शर्मा, प्रशांत तिवारी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। संचालन डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री ने किया। अंत में महंत गंगा दास ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में शिक्षा एवं संस्कारों को सर्वाधिक महत्व दिया गया है लेकिन वर्तमान में मनुष्य धर्म से दूर होता जा रहा है। मनुष्य के अपवित्र आचरण से प्राकृतिक आपदाएं झेलनी पड़ रही हैं। आपदाओं का मुकाबला नैतिक संस्कारों और ईश्वर की साधना से किया जा सकता है। देश की संस्कृति एवं धर्म को बचाने के लिए सत्य संकल्प की आवश्यकता है।
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इस अवसर पर महंत राम बालक दास महाराज, महंत गंगा दास महाराज, राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ, धर्मेंद्र रावत, गिरीश पाठक, विवेक सड़ैया, गोविंद नारायण रावत, नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि घनश्याम साहू, रामेश्वर प्रसाद सड़ैया, दिनेश गोस्वामी, निखिल तिवारी, राजेश दुबे, विष्णु अग्रवाल, बल्लू अग्रवाल, दिवाकर शर्मा, ज्योति सिंह कल्पनीत लोधी, राजेंद्र वाजपेयी, दुर्गा प्रसाद पाठक, भगवत नारायण वाजपेई, अनूप मोदी, जयशंकर प्रसाद द्विवेदी, रामसेवक पाठक, रामनारायण पाठक, जुगल किशोर रावत, जयशंकर प्रसाद द्विवेदी, नरेश विदुआ, नरेश शेखावत, संजय अवस्थी, राहुल शुक्ला, अंतु पारौल, कुंदन पाल, संजू श्रोती, विजय जैन, विलास पटैरिया, श्रीकांत करौलिया, मनीष जैन, उमाकांत शर्मा, प्रशांत तिवारी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। संचालन डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री ने किया। अंत में महंत गंगा दास ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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