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फसल बीमा कराने के लिए बाध्य नहीं होंगे केसीसी धारक
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किसान
- फोटो : ?????
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ललितपुर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत अब किसान क्रेडिट कार्ड के ऋणी किसान फसल बीमा कराने के लिए बाध्य नहीं होंगे। वह चाहें तो बैंक में एक प्रार्थनापत्र देकर प्रीमियम राशि काटने से रोक सकते हैं। इसके लिए बैंक किसानों को बाध्य नहीं कर सकते हैं।
आपदाओं से राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना संचालित की है, जिसमें किसानों को प्रीमियम राशि देकर बीमा कराना होता है। बीमा से किसानों को आपदाओं में नष्ट होने वाली फसलों के नुकसान का आकलन कर क्लेम दिया जाता है, जो किसानों के सीधे का बैंक खाते में जाता है। अब तक फसल बीमा दो प्रकार से होता रहा है। गैर ऋणी किसानों को आधार कार्ड, जमीन के दस्तावेज व बैंक की पास बुक के साथ बीमा कंपनी के पोर्टल पर विवरण दर्ज होने के बाद बीमा होता है। इसके अलावा जो किसान बैंकों में ऋणी होते हैं, उनका बैंक खाते से प्रीमियम राशि काट कर फसल बीमा कर दिया जाता है। लेकिन, अब फसल बीमा के नियमों में परिवर्तन कर दिया गया है। बैंक फसल बीमा कराने के लिए किसानों को बाध्य नहीं कर सकेेंगे। यदि किसान फसल बीमा नहीं कराना चाहता है, तो बैंक को एक प्रार्थनापत्र देकर प्रीमियम राशि को काटने से रोक सकेंगे। इसके बाद किसान की फसल का बीमा नहीं होगा। किसान बैंक को फसल बीमा की अंतिम तिथि से एक सप्ताह पहले बैंक को प्रार्थना पत्र नहीं देगा तो बैंक खाते से प्रीमियम राशि काटकर बीमा कर दिया जाएगा।
डेढ़ लाख से अधिक किसान हैं ऋणी
बीते वर्षों से किसान आपदाओं की मार झेल रहा है। इससे आर्थिक स्थिति दयनीय बनी हुई है। जिले में अधिकांश किसान कर्ज तले दबे हैं। कृषि विभाग में दो लाख 41 हजार किसान पंजीकृत हैं, इनमें से डेढ़ लाख किसान बैंकों में ऋणी हैं। अब तक इन किसानों की फसल का बीमा बैंक ही करते थे, लेकिन अब किसान फसल बीमा की प्रीमियम राशि को कटने से रोक सकेंगे।
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किसान बैंकों में प्रार्थनापत्र देकर फसल बीमा के लिए काटी जाने वाली प्रीमियम राशि को रोक सकेंगे। इसके लिए अंतिम तिथि से एक सप्ताह पहले प्रार्थनापत्र देना होगा।
- वत्सलनाथ, क्षेत्रीय प्रबंधक, ओरयिंटल इंश्योरेंश कंपनी
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आपदाओं से राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना संचालित की है, जिसमें किसानों को प्रीमियम राशि देकर बीमा कराना होता है। बीमा से किसानों को आपदाओं में नष्ट होने वाली फसलों के नुकसान का आकलन कर क्लेम दिया जाता है, जो किसानों के सीधे का बैंक खाते में जाता है। अब तक फसल बीमा दो प्रकार से होता रहा है। गैर ऋणी किसानों को आधार कार्ड, जमीन के दस्तावेज व बैंक की पास बुक के साथ बीमा कंपनी के पोर्टल पर विवरण दर्ज होने के बाद बीमा होता है। इसके अलावा जो किसान बैंकों में ऋणी होते हैं, उनका बैंक खाते से प्रीमियम राशि काट कर फसल बीमा कर दिया जाता है। लेकिन, अब फसल बीमा के नियमों में परिवर्तन कर दिया गया है। बैंक फसल बीमा कराने के लिए किसानों को बाध्य नहीं कर सकेेंगे। यदि किसान फसल बीमा नहीं कराना चाहता है, तो बैंक को एक प्रार्थनापत्र देकर प्रीमियम राशि को काटने से रोक सकेंगे। इसके बाद किसान की फसल का बीमा नहीं होगा। किसान बैंक को फसल बीमा की अंतिम तिथि से एक सप्ताह पहले बैंक को प्रार्थना पत्र नहीं देगा तो बैंक खाते से प्रीमियम राशि काटकर बीमा कर दिया जाएगा।
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डेढ़ लाख से अधिक किसान हैं ऋणी
बीते वर्षों से किसान आपदाओं की मार झेल रहा है। इससे आर्थिक स्थिति दयनीय बनी हुई है। जिले में अधिकांश किसान कर्ज तले दबे हैं। कृषि विभाग में दो लाख 41 हजार किसान पंजीकृत हैं, इनमें से डेढ़ लाख किसान बैंकों में ऋणी हैं। अब तक इन किसानों की फसल का बीमा बैंक ही करते थे, लेकिन अब किसान फसल बीमा की प्रीमियम राशि को कटने से रोक सकेंगे।
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किसान बैंकों में प्रार्थनापत्र देकर फसल बीमा के लिए काटी जाने वाली प्रीमियम राशि को रोक सकेंगे। इसके लिए अंतिम तिथि से एक सप्ताह पहले प्रार्थनापत्र देना होगा।
- वत्सलनाथ, क्षेत्रीय प्रबंधक, ओरयिंटल इंश्योरेंश कंपनी