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Lalitpur News: कांवड़ यात्रा निकाल किया नीलकंठेश्वर का जलाभिषेक
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ललितपुर। शहर के तुवन मंदिर प्रांगण से सोमवार को हिंदू संगठनों ने एक किलोमीटर लंबी कांवड़ यात्रा निकाली, जो शहर के मुख्यमार्गों से होते हुए कस्बा पाली स्थित नीलकंठेश्वर मंदिर पहुंची। वहां कांवड़ियों ने भगवान नीलकंठेश्वर का जलाभिषेक किया। कांवड़ यात्रा में आधा दर्जन से अधिक डीजे और झांकियों का प्रदर्शन भी किया गया।
सुबह करीब 11 बजे निकली कांवड़ यात्रा में सबसे आगे लोग धर्मध्वज लिए चल रहे थे और उनके साथ सैकड़ों लोग भगवा रंग का दुपट्टा पहने चल रहे थे। इस दौरान आधा दर्जन से अधिक यात्राएं अलग-अलग डीजे की धुन पर बम भोले के जयघोष के साथ आगे बढ़ रही थीं। जहां दिव्यांग ट्राई साइकिल से चल रहे थे, वहीं लड़कियां अपने कंधों पर कांवड़ रखे चल रही थीं। महिलाएं पीत वस्त्र पहनकर सिर पर मंगल कलश रखे हुए 28 किमी तक पैदल यात्रा कर नझाई गेट, पुरानी तहसील तिराहा, घंटाघर, सावरकर चौक, आजाद चौक, नदीपुरा, नेहरू महाविद्यालय से हाईवे होते हुए शाम को पाली पहुंचीं। वहां कांवड़ियों ने भगवान नीलकंठेश्वर का जलाभिषेक किया।
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भोलेनाथ व भूतों के स्वरूपों का नृत्य रहा आकर्षण का केंद्र : कांवड़ यात्रा में सबसे पीछे चल रहे खुले ट्राला पर वृंदावन की रासलीला का नृत्य करते राधा-कृष्ण और भगवान भोलेनाथ व उनके साथ भूतों के स्वरूपों का नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। भगवान भोलेनाथ की भव्य प्रतिमा की झांकी भी यात्रा के साथ चल रही थी।
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फूलों की हुई बारिश : शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह कांवड़ियों एवं यात्रा में शामिल लोगों को फल व पेय पदार्थों का वितरण किया गया। इसके साथ ही कांवड़ियों पर फूलों की बारिश की गई।
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लगा रहा लंबा जाम : कांवड़ यात्रा निकलने के चलते पूरे शहर में जाम की स्थिति बनी रही। सावरकर चौक से आजाद चौक, शहजाद नदी के पुल और नदीपुरा में बड़ी नहर तक आगे कांवड़ यात्रा तो पीछे जाम की स्थिति बनी रही। कैलगुवां तिराहा के पास लंबा जाम लगने से यातायात पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
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सुबह करीब 11 बजे निकली कांवड़ यात्रा में सबसे आगे लोग धर्मध्वज लिए चल रहे थे और उनके साथ सैकड़ों लोग भगवा रंग का दुपट्टा पहने चल रहे थे। इस दौरान आधा दर्जन से अधिक यात्राएं अलग-अलग डीजे की धुन पर बम भोले के जयघोष के साथ आगे बढ़ रही थीं। जहां दिव्यांग ट्राई साइकिल से चल रहे थे, वहीं लड़कियां अपने कंधों पर कांवड़ रखे चल रही थीं। महिलाएं पीत वस्त्र पहनकर सिर पर मंगल कलश रखे हुए 28 किमी तक पैदल यात्रा कर नझाई गेट, पुरानी तहसील तिराहा, घंटाघर, सावरकर चौक, आजाद चौक, नदीपुरा, नेहरू महाविद्यालय से हाईवे होते हुए शाम को पाली पहुंचीं। वहां कांवड़ियों ने भगवान नीलकंठेश्वर का जलाभिषेक किया।
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भोलेनाथ व भूतों के स्वरूपों का नृत्य रहा आकर्षण का केंद्र : कांवड़ यात्रा में सबसे पीछे चल रहे खुले ट्राला पर वृंदावन की रासलीला का नृत्य करते राधा-कृष्ण और भगवान भोलेनाथ व उनके साथ भूतों के स्वरूपों का नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। भगवान भोलेनाथ की भव्य प्रतिमा की झांकी भी यात्रा के साथ चल रही थी।
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फूलों की हुई बारिश : शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह कांवड़ियों एवं यात्रा में शामिल लोगों को फल व पेय पदार्थों का वितरण किया गया। इसके साथ ही कांवड़ियों पर फूलों की बारिश की गई।
लगा रहा लंबा जाम : कांवड़ यात्रा निकलने के चलते पूरे शहर में जाम की स्थिति बनी रही। सावरकर चौक से आजाद चौक, शहजाद नदी के पुल और नदीपुरा में बड़ी नहर तक आगे कांवड़ यात्रा तो पीछे जाम की स्थिति बनी रही। कैलगुवां तिराहा के पास लंबा जाम लगने से यातायात पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।