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कांशीराम कालोनी में समस्याएं ही समस्याएं
lalitpur
Updated Tue, 31 Jan 2017 12:46 AM IST
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कांशीराम कालोनी
- फोटो : Amar Ujala
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शहर में स्थित सात कांशीराम कालोनियों में रहने वाले लगभग दो हजार परिवार समस्याओं से जूझ रहे हैं। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। सीवर टैंक की फैली हुई गंदगी भी लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है। शहर क्षेत्र में कुल सात कांशीराम कालोनियों का निर्माण कराया गया था। वार्ड नंबर 01 क्षेत्र में तीन कालोनियां बनी हुई हैं मुहल्ला नारायणपुरा कालोनी में 32 परिवार रहते हैं। मुहल्ला खिरकापुरा कालोनी में 64 परिवार और सुरईघाट कालोनी में करीब साढ़े तीन सौ परिवार रहते हैं। वार्ड नंबर 11 गोविंद नगर में स्थित कालोनी में साढ़े तीन सौ परिवार और वार्ड 10 आईटीआई कालोनी में भी साढ़े तीन सौ परिवार रहते हैं। इसके अलावा वार्ड नंबर 07 में राजकीय महाविद्यालय के पास दो अलग-अलग कांशीराम कालोनियां बनी हुुई हैं। यह शहर की सबसेे बड़ी कांशीराम कालोनी है। इन दोनों कालोनियों में लगभग 450-450 परिवार निवास करते हैं। इन कालोनियों में सफाई व्यवस्था को हमेशा ही अनदेखा किया गया है।
पूर्व में स्थानीय लोगों द्वारा अनेकों बार शिकायत की गई इसके बाद नगर पालिका द्वारा इन कालोनियों में नियमित रुप से साफ-सफाई के लिए कर्मचारियों को तैनाती की गई, लेकिन सफाई कर्मचारियों द्वारा नियमित रुप से सफाई नहीं की जा रही है। लगभग समस्त कालोनियों में एक सप्ताह में दो दिन कर्मचारी पहुंचते हैं और पक्की सड़कों से सारी गंदगी को एकत्रित करके वहीं कालोनी में स्थित खाली मैदान में फेंक देते हैं। जब खाली जगहों पर गंदगी का अंबार लग जाता है तो कचरे का उठान करने की बजाए कर्मचारियों द्वारा कचरे को आग के हवाले कर दिया जाता है, जो नियमों के खिलाफ है। जमा गंदगी और जले हुए कचरे के कारण कालोनी में रहने वाले परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सीवर की सबसे बड़ी समस्या
इन कालोनियों में सबसे बड़ी समस्या सीवर टैंकों की है। प्रत्येक कालोनियों के पीछे वाले हिस्से में सीवर टैंक बने हुए हैं, जो हमेशा ही गंदगी से बजबजाते रहते हैं। इन टैंकों को ढकने की उचित व्यवस्था नहीं है। नियमित सफाई नहीं होने के कारण इसकी गंदगी नालियों व आस-पास के क्षेत्र में बहती रहती है। गंदगी व बदबू के कारण स्थानीय लोगों का वहां से निकलना भी दूभर हो जाता है। इसके अलावा खुले इन सीवर टैंकों के कारण बाहर खेल रहे बच्चों की सुरक्षा पर भी भय बना रहता है। बतातें चलें कि पूर्व में एक बच्चे की खुले पड़े सीवर टैंक में डूबने से मौत हो गई थी।
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चौथे माले से गिरता है गंदा पानी
कांशीराम आवासीय कालोनी की समस्त इमारतों में चार माले हैं। समस्त मंजिलों पर बने कमरों से निकलने वाले गंदे पानी को नाली तक पहुंचाने के लिए जो पाइप लगाए गए थे, अधिकांश निकल चुके हैं जिससे ऊपर के मालों पर रहने वाले लोगों का गंदा पानी काफी ऊंचाई से गिरता है, जिससे आस-पास काफी गंदगी जमा हो जाती है। इसके अलावा कालोनियों की दीवारें भी काफी गंदी हो चुकी हैं।
इनका कहना है
गोविंद नगर में स्थित कालोनी में रहने वाली महिला शरुननिशा बताती हैं कि कालोनी में हर रोज सफाई कर्मचारी नहीं आता है। इसके अलावा कालोनी से निकलने वाले सारे कचरे को मैदान में फेंक दिया जाता है। जब कचरे का ढेर लग जाता है, तो उसके आग के हवाले कर दिया जाता है। यही बात अन्य कालोनियों में रहने वाले लोगों ने भी कही है।
इनका कहना है
कालोनियों में नियमित रुप से सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए कर्मचारियों को तैनात किया गया है। यदि कर्मचारियों द्वारा काम में लापरवाही बरती जा रही है, तो कार्रवाई की जाएगी।
राकेश कुुमार
अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका।
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पूर्व में स्थानीय लोगों द्वारा अनेकों बार शिकायत की गई इसके बाद नगर पालिका द्वारा इन कालोनियों में नियमित रुप से साफ-सफाई के लिए कर्मचारियों को तैनाती की गई, लेकिन सफाई कर्मचारियों द्वारा नियमित रुप से सफाई नहीं की जा रही है। लगभग समस्त कालोनियों में एक सप्ताह में दो दिन कर्मचारी पहुंचते हैं और पक्की सड़कों से सारी गंदगी को एकत्रित करके वहीं कालोनी में स्थित खाली मैदान में फेंक देते हैं। जब खाली जगहों पर गंदगी का अंबार लग जाता है तो कचरे का उठान करने की बजाए कर्मचारियों द्वारा कचरे को आग के हवाले कर दिया जाता है, जो नियमों के खिलाफ है। जमा गंदगी और जले हुए कचरे के कारण कालोनी में रहने वाले परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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सीवर की सबसे बड़ी समस्या
इन कालोनियों में सबसे बड़ी समस्या सीवर टैंकों की है। प्रत्येक कालोनियों के पीछे वाले हिस्से में सीवर टैंक बने हुए हैं, जो हमेशा ही गंदगी से बजबजाते रहते हैं। इन टैंकों को ढकने की उचित व्यवस्था नहीं है। नियमित सफाई नहीं होने के कारण इसकी गंदगी नालियों व आस-पास के क्षेत्र में बहती रहती है। गंदगी व बदबू के कारण स्थानीय लोगों का वहां से निकलना भी दूभर हो जाता है। इसके अलावा खुले इन सीवर टैंकों के कारण बाहर खेल रहे बच्चों की सुरक्षा पर भी भय बना रहता है। बतातें चलें कि पूर्व में एक बच्चे की खुले पड़े सीवर टैंक में डूबने से मौत हो गई थी।
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चौथे माले से गिरता है गंदा पानी
कांशीराम आवासीय कालोनी की समस्त इमारतों में चार माले हैं। समस्त मंजिलों पर बने कमरों से निकलने वाले गंदे पानी को नाली तक पहुंचाने के लिए जो पाइप लगाए गए थे, अधिकांश निकल चुके हैं जिससे ऊपर के मालों पर रहने वाले लोगों का गंदा पानी काफी ऊंचाई से गिरता है, जिससे आस-पास काफी गंदगी जमा हो जाती है। इसके अलावा कालोनियों की दीवारें भी काफी गंदी हो चुकी हैं।
इनका कहना है
गोविंद नगर में स्थित कालोनी में रहने वाली महिला शरुननिशा बताती हैं कि कालोनी में हर रोज सफाई कर्मचारी नहीं आता है। इसके अलावा कालोनी से निकलने वाले सारे कचरे को मैदान में फेंक दिया जाता है। जब कचरे का ढेर लग जाता है, तो उसके आग के हवाले कर दिया जाता है। यही बात अन्य कालोनियों में रहने वाले लोगों ने भी कही है।
इनका कहना है
कालोनियों में नियमित रुप से सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए कर्मचारियों को तैनात किया गया है। यदि कर्मचारियों द्वारा काम में लापरवाही बरती जा रही है, तो कार्रवाई की जाएगी।
राकेश कुुमार
अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका।