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कल्याण सिंह का तालबेहट से रहा है गहरा नाता
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- फोटो : talbehat taal.jpg
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तालबेहट। भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य, प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री कल्याण सिंह का तालबेहट नगर से गहरा नाता रहा है। अंतिम बार उनका नगर में आगमन रामजन्म मंदिर निर्माण के समय वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के रथ यात्रा के समय हुआ था।
अयोध्या में भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए कार सेवकों पर गोली न चलाने का आदेश देने वाले, राम मंदिर के लिए अपनी कुर्सी छोड़कर पूरे देश में हिंदुत्व का परचम लहराने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का जनपद सहित और तालबेहट नगर से गहरा नाता रहा है। अपनी राजनीति के प्रारम्भिक दौर में उन्होंने कई बार तालबेहट का दौरा किया।
2002 में उन्होंने भाजपा से अपने को अलग करते हुए राष्ट्रीय क्रांति पार्टी की स्थापना की और इसके बाद वर्ष 2004 में हुए चुनाव में भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा था। कुछ वर्षो बाद उन्होंने फिर भाजपा का दामन थामा लेकिन वर्ष 2009 में फिर भाजपा छोड़ दी। वर्ष 2013 में पुन: भाजपा में आने के बाद फिर कभी भाजपा न छोड़ने की बात कही। देश में जब लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा पूरे देश में धूम धूम कर हिंदुत्व का जोश भर रही थी, उस समय ललितपुर में रथ यात्रा की तैयारियों के सिलसिले में अंतिम बार कल्याण सिंह नगर के पेट्रोल पंप पर कुछ समय के लिए रुके थे। उनके निकट के लोगों में सीताराम नरवरिया जबराताल, मुरारी लाल गुप्ता, महेश रजक और देवेन्द्र कुमार प्रमुख थे।
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इसके अलावा एक बार उनका नगर पंचायत कार्यालय में तत्कालीन अध्यक्ष पुरुषोत्तम नारायण लिटौरिया, पार्षद मधु अगरिया, संतोष पाठक ने भी उनका स्वागत किया था।
देवगढ़ में पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव में भी दिया था योगदान
ललितपुर। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ललितपुर में पूर्व में कई बार आ चुके हैं। वर्ष 1991 में देवगढ़ में आयोजित पंचकल्याणक एवं गजरथ महोत्सव में भी वह शामिल हुए थे और उन्होंने देवगढ़ के विकास के लिए तीस लाख रुपये से अधिक की राशि जारी की थी। इसमें सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य व सुरक्षा की सुविधाएं शामिल की गई थीं। वह वर्ष 1987 में नृसिंह मंदिर के पास स्थित धर्मशाला में मदनपुर के रघुनाथ सिंह विधायक के साथ आए थे। वह तालबेहट के माताटीला में आडवाणी जी से मिलने भी पहुंचे थे, उस समय प्रदेश के गृह राज्यमंत्री सूर्यप्रताप शाही भी उनके साथ आए थे। जबकि, उन्होंने चुनावी रैलियां भी की थी, जिसके तहत वर्ष 2012 में जखौरा एवं महरौनी में उन्होंने चुनावी सभाएं संबोधित की थीं।
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अयोध्या में भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए कार सेवकों पर गोली न चलाने का आदेश देने वाले, राम मंदिर के लिए अपनी कुर्सी छोड़कर पूरे देश में हिंदुत्व का परचम लहराने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का जनपद सहित और तालबेहट नगर से गहरा नाता रहा है। अपनी राजनीति के प्रारम्भिक दौर में उन्होंने कई बार तालबेहट का दौरा किया।
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2002 में उन्होंने भाजपा से अपने को अलग करते हुए राष्ट्रीय क्रांति पार्टी की स्थापना की और इसके बाद वर्ष 2004 में हुए चुनाव में भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा था। कुछ वर्षो बाद उन्होंने फिर भाजपा का दामन थामा लेकिन वर्ष 2009 में फिर भाजपा छोड़ दी। वर्ष 2013 में पुन: भाजपा में आने के बाद फिर कभी भाजपा न छोड़ने की बात कही। देश में जब लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा पूरे देश में धूम धूम कर हिंदुत्व का जोश भर रही थी, उस समय ललितपुर में रथ यात्रा की तैयारियों के सिलसिले में अंतिम बार कल्याण सिंह नगर के पेट्रोल पंप पर कुछ समय के लिए रुके थे। उनके निकट के लोगों में सीताराम नरवरिया जबराताल, मुरारी लाल गुप्ता, महेश रजक और देवेन्द्र कुमार प्रमुख थे।
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इसके अलावा एक बार उनका नगर पंचायत कार्यालय में तत्कालीन अध्यक्ष पुरुषोत्तम नारायण लिटौरिया, पार्षद मधु अगरिया, संतोष पाठक ने भी उनका स्वागत किया था।
देवगढ़ में पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव में भी दिया था योगदान
ललितपुर। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ललितपुर में पूर्व में कई बार आ चुके हैं। वर्ष 1991 में देवगढ़ में आयोजित पंचकल्याणक एवं गजरथ महोत्सव में भी वह शामिल हुए थे और उन्होंने देवगढ़ के विकास के लिए तीस लाख रुपये से अधिक की राशि जारी की थी। इसमें सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य व सुरक्षा की सुविधाएं शामिल की गई थीं। वह वर्ष 1987 में नृसिंह मंदिर के पास स्थित धर्मशाला में मदनपुर के रघुनाथ सिंह विधायक के साथ आए थे। वह तालबेहट के माताटीला में आडवाणी जी से मिलने भी पहुंचे थे, उस समय प्रदेश के गृह राज्यमंत्री सूर्यप्रताप शाही भी उनके साथ आए थे। जबकि, उन्होंने चुनावी रैलियां भी की थी, जिसके तहत वर्ष 2012 में जखौरा एवं महरौनी में उन्होंने चुनावी सभाएं संबोधित की थीं।