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जिले के किसी भी जीआईसी में नहीं प्रधानाचार्य
amarujala
Updated Sat, 14 Apr 2018 01:51 AM IST
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school, lalitpur news
- फोटो : demo
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जिले में कक्षा 9वीं से 12 वीं तक की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शासन ने सात राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) खुलवाए थे, लेकिन इनमें से किसी में भी प्रधानाचार्य की तैनाती नहीं है। इसके अलावा राजकीय हाईस्कूलों में भी प्रधानाध्यापकों को अतिरिक्त प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है।
इन विद्यालयों को बनाने के लिए शासन ने अरबों रुपये खर्च किए थे, लेकिन इन विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है। सातों जीआईसी विद्यालयों में छात्रों को पढ़ाने के लिए कुल 62 प्रवक्ताओं और 103 सहायक अध्यापकों के पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में इन कॉलेजों में पढ़ने वाले लगभग 16 हजार छात्रों को पढ़ाने के लिए मात्र 10 प्रवक्ता और सिर्फ 46 सहायक अध्यापक ही तैनात हैं। इस तरह कुल 52 प्रवक्ताओं और 57 सहायक अध्यापकों की जगह अब भी खाली पड़ी है। वहीं जनपद में बने समस्त 31 राजकीय हाईस्कूल की बात करें जो इनमें से मात्र 13 में ही प्रधानाध्यापक की तैनाती है, बकाया 18 विद्यालयों की जिम्मेदारी प्रभारियों के भरोसे चल रही है।
इसके साथ ही इन राजकीय हाईस्कूलों में कुल स्वीकृत 189 सहायक अध्यापकों के पदों में से केवल 31 ही सहायक अध्यापक हैं। इन राजकीय हाईस्कूलों को 18 प्रधानाध्यापकों और 158 सहायक अध्यापकों की आवश्यकता है। राजकीय हाईस्कूल व इंटरमीडिएट विद्यालयों की तरह जनपद में संचालित अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के भी यही दुर्दशा है। इन सभी अशासकीय सहायता प्राप्त 11 विद्यालयों में मात्र चार विद्यालयों में प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक तैनात हैं बकाया 7 विद्यालयों में प्रभारियों से काम चलाया जा रहा है। इसी तरह इन विद्यालयों में 42 पदों 32 प्रवक्ता तैनात हैं और 10 पद रिक्त हैं। वहीं सहायक अध्यापकों के कुल स्वीकृत 154 पदों परमात्र 87 सहायक शिक्षक ही तैनात है। जबकि 67 पद रिक्त चल रहे हैं।
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जिला मुख्यालय पर भी हालात बेकार
जिला मुख्यालय पर दो राजकीय इंटर कॉलेज हैं, जिसमें एक बालक व एक बालिका है। मुख्यालय पर बने राजकीय बालिका इंटर कॉलेज हमेशा ही साढ़े चार हजार से अधिक विद्यार्थियों की संख्या रहती है। लेकिन इन बच्चों को पढ़ाने के लिए 14 प्रवक्ताओं में से केवल एक ही प्रवक्ता है और कुल 20 सहायक अध्यापकों पर 13 सहायक अध्यापक हैं। इसी तरह राजकीय इंटर कॉलेज में सात में से केवल तीन ही प्रवक्ता तैनात हैं। और 23 सहायक अध्यापकों में से केवल 12 ही सहायक अध्यापक हैं। दोनों ही इंटर कॉलेजों में एक प्रधानाध्यापक नहीं है।
13 राजकीय हाईस्कूल बिना शिक्षक के
जनपद में कुल 31 राजकीय हाईस्कूल हैं, इनके लिए कुल 13 प्रधानाध्यापक और 31 सहायक अध्यापक तैनात है। इन 31 में से 18 विद्यालयों में प्रधानाध्यापक नहीं है। 16 विद्यालय ऐसे हैं, जहां पर एक भी सहायक अध्यापक की तैनाती हैं। वहीं 13 राजकीय हाईस्कूल ऐसे हैं जहां पर एक भी प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक नहीं है। प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी अन्य विद्यालयों के प्रधानाध्यापक को दी गई है। वहीं यहां की पढ़ाई व्यवस्था पीटीए के अस्थाई शिक्षकों के भरोसे पर चल रही है।
शासन को लिखेंगे पत्र
जनपद के राजकीय विद्यालयों में प्रधानाचार्यों, प्रधानाध्यापकों, प्रवक्ता व सहायक अध्यापकों की भारी कमी है। इस कमी को पूरा करने के लिए शासन को पत्र भेजे गए हैं। वर्तमान में पीटीए से तैनात अस्थाई शिक्षकों से काम लिया जा रहा है।
- वीरेंद्र कुमार दुबे
जिला विद्यालय निरीक्षक, ललितपुर।
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इन विद्यालयों को बनाने के लिए शासन ने अरबों रुपये खर्च किए थे, लेकिन इन विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है। सातों जीआईसी विद्यालयों में छात्रों को पढ़ाने के लिए कुल 62 प्रवक्ताओं और 103 सहायक अध्यापकों के पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में इन कॉलेजों में पढ़ने वाले लगभग 16 हजार छात्रों को पढ़ाने के लिए मात्र 10 प्रवक्ता और सिर्फ 46 सहायक अध्यापक ही तैनात हैं। इस तरह कुल 52 प्रवक्ताओं और 57 सहायक अध्यापकों की जगह अब भी खाली पड़ी है। वहीं जनपद में बने समस्त 31 राजकीय हाईस्कूल की बात करें जो इनमें से मात्र 13 में ही प्रधानाध्यापक की तैनाती है, बकाया 18 विद्यालयों की जिम्मेदारी प्रभारियों के भरोसे चल रही है।
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इसके साथ ही इन राजकीय हाईस्कूलों में कुल स्वीकृत 189 सहायक अध्यापकों के पदों में से केवल 31 ही सहायक अध्यापक हैं। इन राजकीय हाईस्कूलों को 18 प्रधानाध्यापकों और 158 सहायक अध्यापकों की आवश्यकता है। राजकीय हाईस्कूल व इंटरमीडिएट विद्यालयों की तरह जनपद में संचालित अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के भी यही दुर्दशा है। इन सभी अशासकीय सहायता प्राप्त 11 विद्यालयों में मात्र चार विद्यालयों में प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक तैनात हैं बकाया 7 विद्यालयों में प्रभारियों से काम चलाया जा रहा है। इसी तरह इन विद्यालयों में 42 पदों 32 प्रवक्ता तैनात हैं और 10 पद रिक्त हैं। वहीं सहायक अध्यापकों के कुल स्वीकृत 154 पदों परमात्र 87 सहायक शिक्षक ही तैनात है। जबकि 67 पद रिक्त चल रहे हैं।
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जिला मुख्यालय पर भी हालात बेकार
जिला मुख्यालय पर दो राजकीय इंटर कॉलेज हैं, जिसमें एक बालक व एक बालिका है। मुख्यालय पर बने राजकीय बालिका इंटर कॉलेज हमेशा ही साढ़े चार हजार से अधिक विद्यार्थियों की संख्या रहती है। लेकिन इन बच्चों को पढ़ाने के लिए 14 प्रवक्ताओं में से केवल एक ही प्रवक्ता है और कुल 20 सहायक अध्यापकों पर 13 सहायक अध्यापक हैं। इसी तरह राजकीय इंटर कॉलेज में सात में से केवल तीन ही प्रवक्ता तैनात हैं। और 23 सहायक अध्यापकों में से केवल 12 ही सहायक अध्यापक हैं। दोनों ही इंटर कॉलेजों में एक प्रधानाध्यापक नहीं है।
13 राजकीय हाईस्कूल बिना शिक्षक के
जनपद में कुल 31 राजकीय हाईस्कूल हैं, इनके लिए कुल 13 प्रधानाध्यापक और 31 सहायक अध्यापक तैनात है। इन 31 में से 18 विद्यालयों में प्रधानाध्यापक नहीं है। 16 विद्यालय ऐसे हैं, जहां पर एक भी सहायक अध्यापक की तैनाती हैं। वहीं 13 राजकीय हाईस्कूल ऐसे हैं जहां पर एक भी प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक नहीं है। प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी अन्य विद्यालयों के प्रधानाध्यापक को दी गई है। वहीं यहां की पढ़ाई व्यवस्था पीटीए के अस्थाई शिक्षकों के भरोसे पर चल रही है।
शासन को लिखेंगे पत्र
जनपद के राजकीय विद्यालयों में प्रधानाचार्यों, प्रधानाध्यापकों, प्रवक्ता व सहायक अध्यापकों की भारी कमी है। इस कमी को पूरा करने के लिए शासन को पत्र भेजे गए हैं। वर्तमान में पीटीए से तैनात अस्थाई शिक्षकों से काम लिया जा रहा है।
- वीरेंद्र कुमार दुबे
जिला विद्यालय निरीक्षक, ललितपुर।