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Lalitpur News: जामनी बांध का होगा ‘एक्सरे’, भीतर तलाशेंगे रिसाव का राज

Tue, 01 Sep 2026 01:25 AM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर Updated Tue, 01 Sep 2026 01:25 AM IST
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Jamni Dam to undergo search for the secret of the leak from within.
ललितपुर। 53 साल पुराने जामनी बांध में रिसाव का मर्ज अब सतह पर नहीं, बल्कि बांध के भीतर तलाशा जाएगा। रिसाव रोकने के लिए बांध के जलाशय वाले हिस्से में ब्लैकशॉटन, फिल्टर और पिचिंग समेत किए गए उपाय कारगर साबित नहीं हुए तो सिंचाई विभाग ने बांध की टोमोग्राफी कराने की तैयारी शुरू कर दी है। इस जांच के जरिये मिट्टी के बंध के भीतर पानी के संभावित रास्ते, कमजोर हिस्सों और असामान्य संरचना की पहचान करने का प्रयास किया जाएगा। इसके आधार पर आगे की मरम्मत की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
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विभाग ने टोमोग्राफी के लिए कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कार्ययोजना को स्वीकृति मिलने के बाद टेस्ट कराया जाएगा। रविवार को बांध का जलस्तर 402 मीटर से अधिक पहुंचने पर रिसाव शुरू हुआ था। इसकी सूचना पर एसडीएम मड़ावरा और सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों ने निचले क्षेत्र के ग्रामीणों को रिसाव से बांध को फिलहाल खतरा नहीं होने का भरोसा दिया।
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पानी रोकने की कोशिश हुई, लेकिन दूसरी राह से निकल गया
जामनी बांध में पूर्ण जलस्तर 403.55 मीटर है। बांध के भरने पर रिसाव की समस्या सामने आती रही है। इसे रोकने के लिए गर्मी में बांध के जलाशय वाले प्रभावित हिस्से के आसपास करीब 50-50 मीटर तक ब्लैकशॉटन और फिल्टर डालकर पिचिंग कराई गई थी। उम्मीद थी कि इससे पानी के रिसाव को रोका जा सकेगा। लेकिन मानसून में जलस्तर 402 मीटर से अधिक पहुंचते ही रिसाव दोबारा शुरू हो गया। खास बात यह है कि जिन स्थानों पर रिसाव रोकने के उपाय किए गए थे, वहां से पानी नहीं निकल रहा है। इससे विभाग को आशंका है कि बांध के भराव क्षेत्र से पानी मिट्टी के बंध के भीतर किसी दूसरे रास्ते से निचले हिस्से की ओर निकल रहा है।
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टोमोग्राफी बताएगी बांध के भीतर की कमजोरी
टोमोग्राफी को बांध का एक तरह का भौगोलिक एक्सरे माना जा सकता है। इसमें बांध की सतह के ऊपर से जांच कर उसके भीतर की संरचना में मौजूद असामान्य हिस्सों की पहचान की जाती है। पानी से प्रभावित क्षेत्र और सामान्य हिस्से के बीच अंतर के आधार पर बांध के भीतर संभावित रिसाव वाले जोन को चिन्हित करने में मदद मिल सकती है। इससे यह पता लगाने में सहायता मिलेगी कि पानी बांध के किस हिस्से में प्रवेश कर रहा है, भीतर किस दिशा में बढ़ रहा है और कहां से बाहर निकलने की संभावना है। इसके निष्कर्ष के आधार पर विशेषज्ञ आगे की जांच और मरम्मत का तरीका तय कर सकते हैं।
तो इसलिए रिसाव की वास्तविक वजह सामने आना जरूरी
जामनी बांध की समस्या इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था का प्रमुख आधार है। बांध की कुल भंडारण क्षमता 92.87 एमसीएम है, जबकि 84 एमसीएम उपयोगी जल है। इसमें से 67 एमसीएम पानी सिंचाई के लिए आरक्षित है। बांध से जुड़ी करीब 230 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली के माध्यम से लगभग 10 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है। इसके अलावा 1.42 एमसीएम पानी पेयजल और वाणिज्यिक उपयोग के लिए आरक्षित है। ऐसे में बांध के भीतर रिसाव की वास्तविक वजह सामने आना जरूरी है। यदि पानी के रास्ते की सही पहचान हो जाती है तो मरम्मत को अनुमान के बजाय प्रभावित हिस्से पर केंद्रित किया जा सकेगा।

403.55 मीटर तक भरते ही बढ़ता है दबाव
जामनी बांध का पूर्ण जलस्तर 403.55 मीटर और न्यूनतम जलस्तर 396.39 मीटर है। वर्तमान समस्या का संबंध जलस्तर बढ़ने के साथ बांध के भीतर बढ़ने वाले पानी के दबाव से भी जोड़ा जा रहा है। इसीलिए विभाग अब केवल रिसाव दिखाई देने वाले स्थान पर उपचार करने के बजाय उसके मूल स्रोत और अंदरूनी रास्ते की पहचान करना चाहता है।

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बांध से रिसाव बंद करने के लिए तमाम प्रयास किए गए हैं। रिसाव कम मात्रा में है और इससे बांध को कोई खतरा नहीं है। अब टोमोग्राफी टेस्ट कराने की तैयारी है। इसकी कार्ययोजना तैयार कर स्वीकृति के लिए शासन को भेजी जाएगी। स्वीकृति मिलने के बाद टेस्ट कराया जाएगा।
- रोहित बंसल, सहायक अभियंता, सिंचाई खंड
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