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जामनी बांध के क्षेत्र में पैदा होने वाले खरबूजे की है अलग पहचान

Sat, 05 Jun 2021 01:16 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 05 Jun 2021 01:16 AM IST
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jamni dam, melon farming
जामनी बांध क्षेत्र में उगी खरबूज की फसल - फोटो : LALITPUR
डोंगरा खुर्द/ललितपुर। जामनी बांध क्षेत्र में पैदा होने वाले खरबूजे की अलग ही पहचान है। यहां के खरबूजे की मिठास ज्यादा होने से बाजार में खूब मांग है। किसानों के लिए खरबूजे की खेती मुनाफे का सौदा साबित हो रही है।
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जनपद में अनेक बांध हैं, इनके आसपास के गांव में किसान खरबूजे की खेती के लिए आकर्षित हो रहे हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर ट्राली के माध्यम से इसे ललितपुर मंडी में बेचने के लिए पहुंच रहे हैं। कुछ किसान कस्बा एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लगने वाले हाट बाजारों में भी इसे बेच कर मुनाफा कमा रहे हैं।
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जामनी बांध क्षेत्र का खरबूजा जिले में पहली पसंद बना हुआ है। यहां का खरबूजा जनपद के अलावा बाहरी व्यापारी हाथों हाथ खरीद रहे हैं। अब से कुछ साल पहले तक जिले में तरबूज एवं खरबूजे की खेती नहीं होती थी। जिले में कानपुर क्षेत्र एवं अन्य जगहों से खरबूजा एवं तरबूज व्यापारी मंगाते थे। इससे स्थानीय लोगों को इन्हें खरीदने में ज्यादा पैसे देने पड़ते थे। जब से यहां मौसमी फल की खेती होने लगी है, तब से किसानों के साथ स्थानीय लोगों को इसका फायदा हो रहा है। वर्तमान में जिले के राजघाट, सजनाम, जामनी बांध सहित कई बांध क्षेत्रों में इन मौसमी फलों की अच्छी पैदावार हो रही है। इसका नतीजा है कि जनपद में खरबूजा एवं तरबूज दस व बीस रुपये किलो में बिक रहा है। थोक भाव में लगभग पांच रुपये किलो के हिसाब से बिक रहा है। इन दिनों आम आदमी इन मौसमी फलों का स्वाद ले रहे हैं। वर्तमान में कोरोना की वजह से फलों की मांग बढ़ी है। इसमें खरबूजा व तरबूज भी शामिल हैं। इससे किसान खुश हैं, उन्हें फलों की बिक्री के लिए परेशान नहीं होना पड़ रहा है। किसानों की मानें तो पांच एकड़ की खेती में किसान को डेढ़ लाख रुपये का फायदा होता है।
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पांच एकड़ जमीन में खरबूजा की खेती किए हुए हैं। इसमें लागत करीब 75 हजार रुपये की आई है। लॉकडाउन की वजह से इस बार भोपाल और इंदौर की मंडी नहीं मिल पाई, जिससे मुनाफा कम मिला। जामनीबांध का खरबूजा (फलिया ) काफी प्रसिद्ध है, जो नाम से ही बिकती है। दशरथ तिवारी, किसान।

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क्षेत्र के किसान ज्यादातर खरबूजा की खेती कर रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों रोजगार भी मिलता है। जामनीबांध की मिट्टी उपयुक्त होने से यहां के खरबूजे में काफी मिठास रहती है। इससे बाहर के खरीदार इसे आसानी से खरीद ले जाते हैं। दो साल से लॉकडाउन से बाहर के व्यापारी यहां खरीदारी के लिए नहीं आ पा रहे हैं, इससे मुनाफा में कमी आई है। काशीराम पटेल, किसान ।

खेत में बेचने के लिए रखे खरबूज के फल

खेत में बेचने के लिए रखे खरबूज के फल- फोटो : LALITPUR

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