फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   Jains celebrated the holy festival of Paryushan.

Lalitpur News: जैनियों ने मनाया पवित्र पर्यूषण महापर्व

Fri, 18 Sep 2026 01:12 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 18 Sep 2026 01:12 AM IST
विज्ञापन
Jains celebrated the holy festival of Paryushan.
ललितपुर। जैन धर्म का पवित्र पर्यूषण महापर्व शहर के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धा और भक्तिभाव से मनाया गया। सुबह से ही बड़ी संख्या में जैन समाज के पुरुष, महिलाएं और बच्चे मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे। श्रद्धालुओं ने देव, शास्त्र, गुरु के साथ चौबीसी भगवान, ऋषभदेव, पार्श्वनाथ और चंद्रप्रभु की सामूहिक पूजा कर जीवन में क्षमा, संयम और सद्भाव अपनाने का संकल्प ले रहे। जैन समाज के प्रबुद्ध वर्ग ने कहा कि विनम्रता की सीख देता है उत्तम मार्दव धर्म। पेश है बातचीत के अंश...
विज्ञापन


00000000

फोटो-34

मृदुता का भाव ही मार्दव है, जो सच्ची श्रद्धा से युक्त कोमलता है। यह धर्म आत्मा में मान कषाय के अभाव से प्रकट होता है। धन, दौलत और शान जैसी नाशवान चीजें इन्सान को अहंकारी बनाती हैं। शास्त्रों में ज्ञान, पूजा, कुल, जाति, बल, ऋद्धि, तप और शरीर के आठ मद बताए गए हैं। ये मद व्यक्ति को पतन की ओर ले जाते हैं।-डॉ. सुनील जैन संचय
विज्ञापन


0000000000

इन दस दिनों में हम सभी प्रात: उठकर जिनेंद्र भगवान की पूजा अर्चना और पाठ कर रहे हैं। दिन भर अपने मन को धार्मिक और सकारात्मक विचारों में लगाए रखेंगे। रात्रि भोजन का त्याग कर संयम का पालन करेंगे। अपने आचरण से आत्मशुद्धि का प्रयास करेंगे।-राहुल जैन
विज्ञापन
विज्ञापन


सुबह से ही शांति धारा, अभिषेक, पूजन, शुद्ध भोजन एक समय रात्रि भोजन का त्याग रहता है। पर्युषण पर्व, आत्मा को पवित्र और निर्मल बनाने का पर्व है।-सुषमा खजुरिया, पूर्व अध्यक्ष, जैन मिलन समाज

इन दिनों में हमारा प्रयास केवल पूजा पाठ तक ही सीमित नहीं रहेगा। हम अपने विचारों, वाणी और व्यवहार को भी शुद्ध करने का प्रयास करेंगी। राग द्वेष, मोह, माया और विषय वासनाओं से दूर रहकर आत्मचिंतन करेंगी। -सुनीता सराफ

हम अहिंसा परमो धर्म के सिद्धांत को अपने जीवन में अपनाएंगे। किसी भी जीव को मन, वचन और कर्म से कष्ट नहीं पहुंचाएंगे। छोटे से छोटे जीव के प्रति करुणा और दया रखेंगे। हमारा व्यवहार सभी प्राणियों के प्रति प्रेमपूर्ण रहेगा।-सन्मति सराफ

इन दिनों में भगवान की पूजा अर्चना, शांति अभिषेक किया जाएगा। कोशिश रहेगी कि हमारी वाणी या व्यवहार से किसी को कष्ट न पहुंचे। दशलक्षण पर्व के माध्यम से अपने जीवन को संयमित बनाने का प्रयास करेंगे।-डॉ. अक्षय टडैया, अध्यक्ष जैन समाज


दशलक्षण महापर्व पर उत्तम मार्दव धर्म की आराधना

महरौनी। दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिन नगर के दोनों जिनालयों में धार्मिक आयोजन हुए। श्रद्धालुओं ने उत्तम मार्दव धर्म का पालन किया। अजितनाथ बड़ा जैन मंदिर में मुनि विकौशल सागर के सानिध्य में जिनाभिषेक, शांतिधारा और पूजन हुआ। मुनिश्री ने मार्दव का अर्थ मान-कषाय का अभाव और विनम्रता बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को ज्ञान, धन, पद या प्रतिष्ठा का अहंकार त्यागना चाहिए। चंद्रप्रभु जिनालय में दिव्यांशी और अवनि जैन ने प्रवचन दिए। उन्होंने समझाया कि धन, रूप, ज्ञान, पद और प्रतिष्ठा का मद अहंकार पैदा करता है। अहंकार त्यागकर विनम्रता अपनाना ही उत्तम मार्दव धर्म की सच्ची आराधना है। पाठशाला के शिक्षकों और बच्चों ने रानी चेलना के जीवन पर आधारित एक नाटक प्रस्तुत किया। श्रद्धालुओं ने इसकी सराहना की।-संवाद
00000000
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed