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कम पड़ रहे इंजेक्शन, प्रभावित हो रहा परिवार नियोजन
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ललितपुर। जिले में इंजेक्शनों की कमी से परिवार नियोजन कार्यक्रम प्रभावित हो रहा है। इंजेक्शन नहीं होने से नसबंदी नहीं हो पा रही हैं। मुख्यालय स्थित प्रसवोत्तर केंद्र पर पहले प्रतिदिन 50 से 60 नसबंदी होती थीं, लेकिन इंजेक्शनों की कमी के चलते यह 10 फीसदी कम हो गईं है। ऐसे में महिलाएं बिना नसबंदी कराए लौट रहीं है।
जनसंख्या नियंत्रण को लेकर चलाए जा रहे परिवार नियोजन कार्यक्रम के अंतर्गत नसबंदी ऑपरेशन किए जा रहे हैं। इसके लिए ब्लॉक स्तरीय अस्पताल सीएचसी /पीएचसी और मुख्यालय स्थित प्रसवोत्तर केंद्र पर शिविर लगाए जा रहे हैं।
शिविर में नसबंदी के लिए महिलाओं की अधिक भीड़ जुट रही है। स्थिति यह है कि शिविरों में भीड़ नियंत्रण करना तक मुश्किल हो रहा था। प्रतिदिन लगभग 100 से अधिक नसबंदी हो रही थीं। इनमें जिला मुख्यालय में पीपीसी पर ही 50 से 60 नसबंदी हो रही थीं।
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लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग में नसबंदी के दौरान मरीजों को लगने वाले इंजेक्शनों की कमी हो गई है। स्टोर में जायलोकेन, पेंटाजोसिन, प्रोमेटाजिन और एक्टोपिन आदि इंजेक्शन नहीं हैं। आपूर्ति न होने से केंद्रों पर समय से नसबंदी ऑपरेशन शुरू नहीं हो रहे हैं। इंजेक्शन देरी से केंद्रों पर पहुंचाए जा रहे हैं। साथ ही 10 प्रतिशत नसबंदी में कमी आ गई है।
मंगलवार को मुख्यालय पर स्थित प्रसवोत्तर केंद्र पर सुबह से ही महिलाओं की भीड़ जमा थी। कई महिलाएं मासूमों को साथ लिए नसबंदी का इंतजार करतीं रहीं। लेकिन इंजेक्शनों की कमी से देर से नसबंदी शुरू हुई। साथ ही इंजेक्शनों की कमी से 60 की जगह 50 नसंबदी ही हो सकीं। कई महिलाएं बिना नसबंदी के वापस लौट गईं।
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नसबंदी के दौरान लगने वाले इंजेक्शनों की कमी पड़ गई है। लक्ष्य छह हजार के सापेक्ष चार हजार नसबंदी हो चुकी हैं। शेष लक्ष्य को जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। इंजेक्शनों की मांग की गई है। जल्द ही उपलब्ध हो जाएंगे। नसबंदी ऑपरेशन प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे।
- डॉ. जीपी शुक्ला , मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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जनसंख्या नियंत्रण को लेकर चलाए जा रहे परिवार नियोजन कार्यक्रम के अंतर्गत नसबंदी ऑपरेशन किए जा रहे हैं। इसके लिए ब्लॉक स्तरीय अस्पताल सीएचसी /पीएचसी और मुख्यालय स्थित प्रसवोत्तर केंद्र पर शिविर लगाए जा रहे हैं।
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शिविर में नसबंदी के लिए महिलाओं की अधिक भीड़ जुट रही है। स्थिति यह है कि शिविरों में भीड़ नियंत्रण करना तक मुश्किल हो रहा था। प्रतिदिन लगभग 100 से अधिक नसबंदी हो रही थीं। इनमें जिला मुख्यालय में पीपीसी पर ही 50 से 60 नसबंदी हो रही थीं।
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लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग में नसबंदी के दौरान मरीजों को लगने वाले इंजेक्शनों की कमी हो गई है। स्टोर में जायलोकेन, पेंटाजोसिन, प्रोमेटाजिन और एक्टोपिन आदि इंजेक्शन नहीं हैं। आपूर्ति न होने से केंद्रों पर समय से नसबंदी ऑपरेशन शुरू नहीं हो रहे हैं। इंजेक्शन देरी से केंद्रों पर पहुंचाए जा रहे हैं। साथ ही 10 प्रतिशत नसबंदी में कमी आ गई है।
मंगलवार को मुख्यालय पर स्थित प्रसवोत्तर केंद्र पर सुबह से ही महिलाओं की भीड़ जमा थी। कई महिलाएं मासूमों को साथ लिए नसबंदी का इंतजार करतीं रहीं। लेकिन इंजेक्शनों की कमी से देर से नसबंदी शुरू हुई। साथ ही इंजेक्शनों की कमी से 60 की जगह 50 नसंबदी ही हो सकीं। कई महिलाएं बिना नसबंदी के वापस लौट गईं।
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नसबंदी के दौरान लगने वाले इंजेक्शनों की कमी पड़ गई है। लक्ष्य छह हजार के सापेक्ष चार हजार नसबंदी हो चुकी हैं। शेष लक्ष्य को जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। इंजेक्शनों की मांग की गई है। जल्द ही उपलब्ध हो जाएंगे। नसबंदी ऑपरेशन प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे।
- डॉ. जीपी शुक्ला , मुख्य चिकित्सा अधिकारी