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मिट्टी में घटते जीवांश पर चिंता प्रकट की
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Wed, 23 Dec 2015 01:12 AM IST
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ललितपुर। इफ्को के तत्वावधान में जिला सहकारी सम्मेलन का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने इफ्को के कृषि रसायनों की जानकारी दी। साथ ही मिट्टी में घटते जा रहे जीवांश पर चिंता प्रकट की।
एक होटल में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी अरुण कुमार उपाध्याय रहे। उन्होंने कृषि और सहकारिता के क्षेत्र से जुड़े विभिन्न अधिकारियों से कहा कि मिट्टी में जीवांश पदार्थ की लगातार घटती मात्रा चिंता का विषय है। ऐसे में सभी अधिकारियों का दायित्व है कि कृषकों को पशुपालन की तरफ प्रेरित करें, जिससे गोबर की खाद के रूप में अनमोल खाद प्राप्त हो। इससे कृषि के क्षेत्र सुधार होगा। उन्होंने इफ्को के कृषि रसायनों के क्षेत्र में पदार्पण को सही कदम बताया। साथ ही इफ्को से अपेक्षा की है कि जैविक रसायन का इस्तेमाल किया जाएं।
उप कृषि निदेशक हंसराज ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं में दिए जाने वाले अनुदान को अब पंजीकृत किसानों के खाते में ही दिया जा रहा है। किसानों को बिना पंजीकरण के किसी प्रकार का अनुदान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने बताया कि बेरोजगार कृषि स्नातकों को एग्री-बिजनेस सेंटर खुलवाने की योजना है, जिनमें एक ही स्थान पर किसानों को तकनीकी जानकारी प्राप्त हो सकेगी।
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क्षेत्र अधिकारी इफ्को केपी सिंह ने कहा कि इफ्को की विश्वसनीयता से सभी लोग परिचित हैं। इफ्को अब कृषि रसायनों के क्षेत्र में भी कदम रख चुकी है। वरिष्ठ प्रबंधक (कृषि सेवाएं) इफ्को एके काकरान ने जल विलेय उर्वरकों की प्रयोग विधि बताई। साथ ही कहा कि जल विलेय उर्वरकों का प्रयोग कर उर्वरकों की 20 से 25 प्रतिशत तक कम की जा सकती है।
मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक इफ्को आरएस भगौर ने कहा कि किसानों द्वारा संस्तुत मात्रा से अधिक उर्वरक प्रयोग करने के बावजूद उत्पादन में गिरावट आ रही है। इसका मुख्य कारण जमीन में जीवांश पदार्थ की कमी, द्वितीयक और सूक्ष्म तत्वों की कमी है। किसानों को गोबर की खाद व हरी खाद के प्रयोग के लिए प्रेरित करें। कार्यक्रम में सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता दिनेश कुमार शुक्ला, जिला कृषि अधिकारी बृजेश कुमार, भूमि संरक्षण अधिकारी रवि चंद्र प्रकाश, डीजीएम जिला सहकारी बैंक पंकज कुमार, जिला प्रबंधक पीसीएफ दिव्यांसु, सहायक विकास अधिकारी प्रमोद कुशवाहा और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। संचालन केपी सिंह ने किया।
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एक होटल में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी अरुण कुमार उपाध्याय रहे। उन्होंने कृषि और सहकारिता के क्षेत्र से जुड़े विभिन्न अधिकारियों से कहा कि मिट्टी में जीवांश पदार्थ की लगातार घटती मात्रा चिंता का विषय है। ऐसे में सभी अधिकारियों का दायित्व है कि कृषकों को पशुपालन की तरफ प्रेरित करें, जिससे गोबर की खाद के रूप में अनमोल खाद प्राप्त हो। इससे कृषि के क्षेत्र सुधार होगा। उन्होंने इफ्को के कृषि रसायनों के क्षेत्र में पदार्पण को सही कदम बताया। साथ ही इफ्को से अपेक्षा की है कि जैविक रसायन का इस्तेमाल किया जाएं।
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उप कृषि निदेशक हंसराज ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं में दिए जाने वाले अनुदान को अब पंजीकृत किसानों के खाते में ही दिया जा रहा है। किसानों को बिना पंजीकरण के किसी प्रकार का अनुदान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने बताया कि बेरोजगार कृषि स्नातकों को एग्री-बिजनेस सेंटर खुलवाने की योजना है, जिनमें एक ही स्थान पर किसानों को तकनीकी जानकारी प्राप्त हो सकेगी।
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क्षेत्र अधिकारी इफ्को केपी सिंह ने कहा कि इफ्को की विश्वसनीयता से सभी लोग परिचित हैं। इफ्को अब कृषि रसायनों के क्षेत्र में भी कदम रख चुकी है। वरिष्ठ प्रबंधक (कृषि सेवाएं) इफ्को एके काकरान ने जल विलेय उर्वरकों की प्रयोग विधि बताई। साथ ही कहा कि जल विलेय उर्वरकों का प्रयोग कर उर्वरकों की 20 से 25 प्रतिशत तक कम की जा सकती है।
मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक इफ्को आरएस भगौर ने कहा कि किसानों द्वारा संस्तुत मात्रा से अधिक उर्वरक प्रयोग करने के बावजूद उत्पादन में गिरावट आ रही है। इसका मुख्य कारण जमीन में जीवांश पदार्थ की कमी, द्वितीयक और सूक्ष्म तत्वों की कमी है। किसानों को गोबर की खाद व हरी खाद के प्रयोग के लिए प्रेरित करें। कार्यक्रम में सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता दिनेश कुमार शुक्ला, जिला कृषि अधिकारी बृजेश कुमार, भूमि संरक्षण अधिकारी रवि चंद्र प्रकाश, डीजीएम जिला सहकारी बैंक पंकज कुमार, जिला प्रबंधक पीसीएफ दिव्यांसु, सहायक विकास अधिकारी प्रमोद कुशवाहा और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। संचालन केपी सिंह ने किया।