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अगर पूर्ण विश्राम चाहते हो तो धर्म की शरण को स्वीकार करो-सुधासागर
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ललितपुर। श्री अभिनंदनोदय तीर्थ में श्रमण मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने धर्मसभा को में कहा कि हर व्यक्ति आकुलता से जीवन जी रहा है। वह पल भर में ही हर कार्य की सफल होना चाहता है। मन चाहा कॉलेज मिला तो पढाई की चिंता, पढ़ लिया तो नौकरी की चिंता, नौकरी मिली तो शादी की चिंता, शादी हो गई तो कुल दीपक की चिंता। पूरा जीवन इसी आपाधापी में निकल जाता है।
मुनिश्री ने कहा कि मन की व्याकुलताएं विश्राम नहीं लेती, शरीर थक जाता है, यौवन बीत जाता, बुढ़ापा दस्तक देने लगता और एक दिन अधूरे सपनों के साथ हम इस संसार से विदा हो जाते है। अपने पूर्वजों के जीवन से हम कोई सबक नहीं लेते और पुन: हमारा जीवन चक्र भी वैसा ही घूमने लगता जैसा हमारे पूर्वजों ने जिया और हम भी इस संसार में खो जाते हैं। इच्छाओं की पूर्ति न होने के कारण वह थक रहा है यही जिंदगी का अपशगुन है।
मुनि श्री ने कहा आकुलित जीवन में धर्म ही सहारा है धर्म का मूल सिद्धांत अभाव में सदभाव की अनुभूति करना है। पूर्ण की अनुभूति किए बिना आनंद की अनुभूति हो ही नहीं सकती और यह भी सत्य है कि संसार में आज तक कोई पूर्ण हो ही नहीं सका। पूर्ण हुए बिना इच्छाए भी थकती नहीं हैं गतिमान होकर दौड़ती रहती हैं। अगर पूर्ण विश्राम चाहते हो तो धर्म की शरण को स्वीकार करो, अभाव में सदभाव का अनुभव करो। उन्होंने कहा इच्छाओं के बोझ के कारण आज हर व्यक्ति बेबस और लाचार नजर आ रहा है।
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भगवान का श्रावकों ने किया अभिषेक
शुक्रवार को प्रात:काल मूलननायक अभिनंदनाथ भगवान का श्रावकों ने अभिषेक किया। इसके उपरांत मुनिश्री के मुखारविंद से शांतिधारा का पुर्ण्याजन विनोद उमरिया परिवार एवं अनिल कुमार, अंकुर जैन परिवार को मिला। इसके बाद श्रावक श्रेष्ठि परिवारों ने आचार्य श्री के चित्र का अनावरण एवं मुनि श्री का पद प्रक्षालन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
आहारदान का मिला सौभाग्य
निर्यापक मुनि सुधासागर महाराज को आहारदान आनंद जैन परिवार, मुनि पूज्यसागर महाराज आहारदान डॉ महेंद्र शशांक जैन परिवार को, ऐलक धैर्य सागर के पडगाहन आहारदान महेंद्र जैन, मनोज जैन पंचम नगर परिवार एवं क्षुल्लक गंभीर सागर को आहारदान अशोक कुमार, राजेंद्रकुमार परिवार को मिला।
मुनि श्री द्वारा मिल रहा समयसार ग्रंथ का बोध
श्रमण संस्कृति संस्थान की ओर से श्री समयसार प्रशिक्षण शिविर में मुनि सुधासागर महाराज ने बच्चों को धर्म का मर्म समयसार ग्रंथ के माध्यम से बताया। गुरु मुख से समयसार सुनकर शिविरार्थी उसके महत्व समझ सके। मुनिश्री के मुखारविंद से हुई शांतिधारा का सौभाग्य सुरेंद्र कुमार अभिनंदन एवं हेमंत जैन रमेश जैन, दीपक बुखारिया परिवार को प्राप्त हुआ। इसकी व्यवस्थाओं में ब्र. मनोज, ब्र. सविता, अनीता मोदी सहित महिला मंडल का सक्रिय योगदान रहा।
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मुनिश्री ने कहा कि मन की व्याकुलताएं विश्राम नहीं लेती, शरीर थक जाता है, यौवन बीत जाता, बुढ़ापा दस्तक देने लगता और एक दिन अधूरे सपनों के साथ हम इस संसार से विदा हो जाते है। अपने पूर्वजों के जीवन से हम कोई सबक नहीं लेते और पुन: हमारा जीवन चक्र भी वैसा ही घूमने लगता जैसा हमारे पूर्वजों ने जिया और हम भी इस संसार में खो जाते हैं। इच्छाओं की पूर्ति न होने के कारण वह थक रहा है यही जिंदगी का अपशगुन है।
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मुनि श्री ने कहा आकुलित जीवन में धर्म ही सहारा है धर्म का मूल सिद्धांत अभाव में सदभाव की अनुभूति करना है। पूर्ण की अनुभूति किए बिना आनंद की अनुभूति हो ही नहीं सकती और यह भी सत्य है कि संसार में आज तक कोई पूर्ण हो ही नहीं सका। पूर्ण हुए बिना इच्छाए भी थकती नहीं हैं गतिमान होकर दौड़ती रहती हैं। अगर पूर्ण विश्राम चाहते हो तो धर्म की शरण को स्वीकार करो, अभाव में सदभाव का अनुभव करो। उन्होंने कहा इच्छाओं के बोझ के कारण आज हर व्यक्ति बेबस और लाचार नजर आ रहा है।
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भगवान का श्रावकों ने किया अभिषेक
शुक्रवार को प्रात:काल मूलननायक अभिनंदनाथ भगवान का श्रावकों ने अभिषेक किया। इसके उपरांत मुनिश्री के मुखारविंद से शांतिधारा का पुर्ण्याजन विनोद उमरिया परिवार एवं अनिल कुमार, अंकुर जैन परिवार को मिला। इसके बाद श्रावक श्रेष्ठि परिवारों ने आचार्य श्री के चित्र का अनावरण एवं मुनि श्री का पद प्रक्षालन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
आहारदान का मिला सौभाग्य
निर्यापक मुनि सुधासागर महाराज को आहारदान आनंद जैन परिवार, मुनि पूज्यसागर महाराज आहारदान डॉ महेंद्र शशांक जैन परिवार को, ऐलक धैर्य सागर के पडगाहन आहारदान महेंद्र जैन, मनोज जैन पंचम नगर परिवार एवं क्षुल्लक गंभीर सागर को आहारदान अशोक कुमार, राजेंद्रकुमार परिवार को मिला।
मुनि श्री द्वारा मिल रहा समयसार ग्रंथ का बोध
श्रमण संस्कृति संस्थान की ओर से श्री समयसार प्रशिक्षण शिविर में मुनि सुधासागर महाराज ने बच्चों को धर्म का मर्म समयसार ग्रंथ के माध्यम से बताया। गुरु मुख से समयसार सुनकर शिविरार्थी उसके महत्व समझ सके। मुनिश्री के मुखारविंद से हुई शांतिधारा का सौभाग्य सुरेंद्र कुमार अभिनंदन एवं हेमंत जैन रमेश जैन, दीपक बुखारिया परिवार को प्राप्त हुआ। इसकी व्यवस्थाओं में ब्र. मनोज, ब्र. सविता, अनीता मोदी सहित महिला मंडल का सक्रिय योगदान रहा।