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जीवन में सत्संग कम रहे तो चलेगा लेकिन कुसंग से दूर रहें: विजय कौशल महाराज

Sun, 18 Feb 2024 02:09 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 18 Feb 2024 02:09 AM IST
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If there is less satsang in life then it will be fine but stay away from bad company: Vijay Kaushal Maharaj
अमर उजाला ब्यूरो
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ललितपुर। श्री रामकथा महामहोत्सव में शनिवार को श्रीराम वन गमन की कथा का वर्णन करते हुए संत विजय कौशल महाराज ने कहा कि जीवन में यदि सत्संग कम भी रहे तो भी चल सकता है, लेकिन कुसंग से सर्वथा दूर रहना चाहिए। कुसंग यह जीवन तो क्या अनेक जन्मों को भी नष्ट-भ्रष्ट कर देता है। उन्होंने कहा कि कुसंग वही है, जो काम छिपकर किया जाए। जिसके साथ छुपकर रहा जाए, जहां जाते या आते समय लोगों से नजर बचानी पड़े, ऐसे कुसंग से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि श्री रामचरित मानस में गोस्वामी जी ने नरक के वास को कुसंग से अच्छा माना है। विचार करें कुसंग जीवन के लिए कितना घातक है। कुसंग ने मंथरा का रूप रखकर महाराजा दशरथ जैसे यशस्वी परिवार में भी हलचल मचा दी तो यह कुसंग आम जीवों के लिए कितना घातक है। विवाहोपरांत सीता जी की विदाई की कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि बेटी की विदाई बड़ी कारुणिक घटना है। बेटी सदैव पराई ही मानी जाती है, किंतु विवाह के अवसर पर परिवार जन करुणा से भर जाते हैं। नेत्रों में झर-झर आंसू निकल आते हैं। विदेह राज जनक की दशा सीता जी की विदाई करते समय कुछ ऐसी ही थी। माता सुनैना ने जानकी को स्त्री धर्म की शिक्षा दी। चारों दूल्हे व दुल्हिनें अयोध्या आते हैं। अयोध्या की सुख समृद्धि का अलौकिक वर्णन मानस कार ने किया है।
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इसी बीच राजा दशरथ एक दिन राज्य सभा में विचार करते हैं। दूसरे दिन पर बात टलने के कारण उस रात ही मंथरा कैकेयी की बुद्धि बदल देती है जिससे वो कोपभवन चली जाती है। राजा दशरथ से रानी कैकेयी भरत के राजा बनाने एवं राम को चौदह वर्ष वनवास के दो वरदान मांगती है। राजा दशरथ सुनकर सन्न रह जाते हैं। मूर्च्छित होकर गिर पड़ते हैं। प्रातः काल कैकेयी प्रभु श्री राम को यह बात बताती है तो राम वन जाने को तैयार होते हैं। प्रेमवश जानकी व लक्ष्मण भी साथ जाते हैं। अयोध्या के नगरवासी साथ चलने की जिद करते हैं। सुमंत जी रथ में श्री राम, सीता व लक्ष्मण को लेकर प्रस्थान करते हैं। प्रथम रात्रि तमसा नदी पर विश्राम करते हैं।
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कथा के प्रारंभ अवसर पर मुख्य यजमान सरदार वीके सिंह धर्मपत्नी रुपिंदर कौर एवं आज के यजमान पं. धर्मेंद्र रावत व पत्नी वंदना रावत ने गौरी गणेश पूजन एवं व्यास पूजन संपन्न किया। महंत रामलखन दास महाराज ने पुष्प अर्पण कर व्यास पीठ का अभिनंदन किया। कथा के अंत में पं. रामेश्वर प्रसाद सडैया, गंधर्व सिंह लोधी, अनुज कांत दीक्षित, भरत राजा, अजय पटेरिया, मनीष सडै़या प्रदेश उपाध्यक्ष व्यापार मंडल, भोला शंकर पस्तोर, विष्णु अग्रवाल, राजेश यादव, अजय नायक, विकास राठौर आदि ने रामायण की आरती उतारी।

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आज चित्र-विचित्र महाराज की होगी भजन संध्या
आयोजक महंत राम लखनदास महाराज ने बताया, रविवार रात्रि आठ बजे से बाबा चित्र-विचित्र महाराज की भजन संध्या होगी। दोपहर की कथा यथासमय जारी रहेगी।
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श्री हनुमान चालीसा संपुटित पाठ हवन हुआ
तुवन मंदिर श्री हनुमान चालीसा संपुटित पाठ हवन एवं वैदिक मंत्रों से गुंजायमान है। श्री राम यज्ञ की क्रियाएं प्रातः बेला में होती हैं। कथा उपरांत प्रसाद वितरण में पं. राकेश तिवारी, संजय तिवारी, राजकुमार गोस्वामी, राघवेंद्र तिवारी, विकास गोस्वामी, राजू राजा, रवि राजा, राजेश पुरोहित, आनंद सेन आदि जुटे हैं।
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