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Lalitpur News: मालखाने से 37 साल बाद मुक्त हुईं मूर्तियां
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। उमा-महेश्वर सहित तीन प्राचीन मूर्तियाें और मंदिरों के नौ अवशेषों को 37 साल बाद मालखाने मुक्त किया गया है। इनको बृहस्पतिवार को पुरातत्व संग्रहालय में पहुंच दिया गया है। विभाग इन मूर्तियों को संरक्षित करेगा।
पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 1987-88 में विभिन्न क्षेत्रों में खोज के दौरान तीन प्राचीन मूर्तियां और मंदिरों के नौ अवशेष मिले थे। इन्हें कलेक्ट्रेट स्थित मालखाने में रखवा दिया गया था। तब से ये मूर्तियां और अवशेष मालखाने में बंद थे। 37 साल बाद अब इन्हें पुरातत्व विभाग को सौंपा गया है। विभाग ने इनको पुरातत्व संग्रहालय स्थित कमरे में रखवा दिया है। इन मूर्तियों का दस्तावेजीकरण किया जाएगा, जिसके बाद इन्हें विद्यार्थियों को शोध के लिए और आम लोगों को देखने के लिए पुरातत्व संग्रहालय में रखा जाएगा।
पुरातत्व संग्रहालय की शान बढ़ाएंगी छठी शताब्दी की मूर्तियां
झांसी के क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी मनोज कुमार यादव ने बताया कि पुरातत्व संग्रहालय में नौवीं से दसवीं शताब्दी की दर्जनों मूर्तियां संरक्षित हैं। धौरी सागर से मिली 11वीं सदी की ब्रह्मा-ब्रह्माणी की मूर्तियां, कुचदों से मिली दसवीं सदी की विष्णु व भगवान वाराह की मूर्ति, दसवीं सदी की राधिका में कुबेर की मूर्ति, बिजरौठा से मिली दसवीं सदी की सूर्य की मूर्ति, धौरीसागर से मिली 11वीं सदी की नंदीश्वर की मूर्ति यहां संरक्षित हैं, जिसे लोग देख सकते हैं। अब छठी शताब्दी की ये मूर्तियां भी संग्रहालय की शान बढ़ाएंगी।
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ललितपुर। उमा-महेश्वर सहित तीन प्राचीन मूर्तियाें और मंदिरों के नौ अवशेषों को 37 साल बाद मालखाने मुक्त किया गया है। इनको बृहस्पतिवार को पुरातत्व संग्रहालय में पहुंच दिया गया है। विभाग इन मूर्तियों को संरक्षित करेगा।
पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 1987-88 में विभिन्न क्षेत्रों में खोज के दौरान तीन प्राचीन मूर्तियां और मंदिरों के नौ अवशेष मिले थे। इन्हें कलेक्ट्रेट स्थित मालखाने में रखवा दिया गया था। तब से ये मूर्तियां और अवशेष मालखाने में बंद थे। 37 साल बाद अब इन्हें पुरातत्व विभाग को सौंपा गया है। विभाग ने इनको पुरातत्व संग्रहालय स्थित कमरे में रखवा दिया है। इन मूर्तियों का दस्तावेजीकरण किया जाएगा, जिसके बाद इन्हें विद्यार्थियों को शोध के लिए और आम लोगों को देखने के लिए पुरातत्व संग्रहालय में रखा जाएगा।
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पुरातत्व संग्रहालय की शान बढ़ाएंगी छठी शताब्दी की मूर्तियां
झांसी के क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी मनोज कुमार यादव ने बताया कि पुरातत्व संग्रहालय में नौवीं से दसवीं शताब्दी की दर्जनों मूर्तियां संरक्षित हैं। धौरी सागर से मिली 11वीं सदी की ब्रह्मा-ब्रह्माणी की मूर्तियां, कुचदों से मिली दसवीं सदी की विष्णु व भगवान वाराह की मूर्ति, दसवीं सदी की राधिका में कुबेर की मूर्ति, बिजरौठा से मिली दसवीं सदी की सूर्य की मूर्ति, धौरीसागर से मिली 11वीं सदी की नंदीश्वर की मूर्ति यहां संरक्षित हैं, जिसे लोग देख सकते हैं। अब छठी शताब्दी की ये मूर्तियां भी संग्रहालय की शान बढ़ाएंगी।
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