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बिना सुविधाओं के स्टेडियम में कैसे आएगा कोई खिलाड़ी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 01 Aug 2016 12:17 AM IST
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stadiem, lalitpur news
- फोटो : amar ujala, lalitpur news
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ललितपुर। जिला मुख्यालय पर नेहरू महाविद्यालय के पीछे नेशनल हाईवे पर बने स्पोर्ट्स स्टेडियम का शुभारंभ वर्ष 1992 में किया गया था। यह जनपद का इकलौता स्टेडियम है। लेकिन स्टेडियम के अधिकारी व कोच अब तक युवाओं को अपनी ओर आकर्षित नहीं कर पाए हैं। इसका सबसे मुख्य कारण स्टेडियम में किसी तरह की व्यवस्था नहीं होना है। इन वर्षों में लगभग समस्त खेलों के कोच आ चुके हैं, लेकिन स्टेडियम का नाम किसी भी खेल में आगे नहीं बढ़ पाया है।
शुरुआत में कुछ खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गई हैं, लेकिन इसके बाद अधिकारियों ने इस ओर कोई खास दिलचस्पी नहीं ली है। स्टेडियम में एक ही मैदान है, जहां पर क्रिकेट, फुटबाल, हॉकी, दौड़ व वॉलीबाल के मिश्रित प्लेटफार्म बना हुआ है। वर्तमान में स्टेडियम में फुटबाल के कोच तैनात हैं इसलिए मैदान के दोनों छोड़ पर फुटबॉल के गोल पोस्ट लगे हुए हैं, लेकिन इन दोनों गोलपोस्ट की नेट फटी गई है, जो केवल नाम मात्र के लगी हुई है।
हॉकी पोस्ट की भी यही स्थिति है। रखरखाव के अभाव में खेल का मैदान किसी पार्क की तरह बन गया है, जहां बड़ी-बड़ी घास खड़ी हुई हैं। स्टेडियम में लाखों रुपये की लागत से खरीदे गए जिम के उपकरण वर्षों से धूल खा रहे हैं।
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रखरखाव के नाम पर प्रतिमाह हजारों खर्च
मैदान में खड़ी बड़ी-बड़ी घास इस बात का सबूत है कि मैदान के रखरखाव की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। घास के कारण वॉलीबाल कोर्ट गायब है। स्टेडियम प्रशासन द्वारा मैदान के रखरखाव के नाम प्रतिमाह हजारों रुपये खर्च किए जाते हैं। मैदान की घास काटने, सफाई करने, चौकीदारी व अन्य कार्य के लिए यहां पर संविदा के माध्यम से चार कर्मचारी को नियुक्त किया गया है। हजारों रुपये खर्च करने के बाद भी यहां की स्थिति बदतर बनी हुई है।
अब तक नहीं हो सकी बास्केटबाल कोर्ट
तत्कालीन जिलाधिकारी जुहेर बिन सगीर ने बास्केटबाल कोर्ट का निर्माण पूर्ण कराने में दिलचस्पी ली थी, इसके बाद कोर्ट के कुछ हिस्से का निर्माण शुरू हुआ। लेकिन उनके स्थानांतरण होने के बाद से ही निर्माण कार्य फिर से बंद हो गया है। यहां के अधिकारी का कहते हैं कि जल्द ही कोर्ट का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।
हॉल की छप से टपकता है पानी
इनडोर गेम के लिए यहां पर एक हॉल बना हुआ है, जिसमें टेबिल टेनिस व बैडमिंटन खेलने की व्यवस्था है, लेकिन इस हॉल की छत से बरसात का पानी रिसता है। अधिकारियों का कहना है कि हॉल की पूरी छत की मरम्मत की जाएगी, जिसमें लंबे बजट की आवश्यकता पड़ेगी। मुख्यालय से बजट स्वीकृत होने के बाद ही छत की मरम्मत का कार्य हो सकेगा। गौरतलब है कि इसी रिसती हुई छत के नीचे जिला के अधिकारी गण प्रतिदिन सुबह बैड-मिंटन खेलने के लिए आते हैं।
केवल फुटबाल कोच ही तैनात
स्टेडियम में वर्तमान में केवल फुटबाल कोच नियुक्त है, जिनका नाम रामचंद्र हैं, यहीं उपक्रीड़ा अधिकारी का प्रभार लिए हुए हैं। इसके साथ स्टाफ में एक लिपिक व चौकीदार तैनात है। बाकी चार कर्मचारी संविदा पर रखे गए हैं। उपक्रीड़ा अधिकारी ने बताया कि स्टेडियम में 18 वर्ष से अधिक उम्र का एक भी खिलाड़ी ने यहां पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। वहीं 30 बच्चों ने रजिस्ट्रेशन कराया हुआ है, लेकिन वह नियमित रूप से नहीं आ रहे हैं। वहीं इनडोर गेम के लिए भी 10 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया हुआ है, जो 2,800 रुपये वार्षिक रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा करते हैं। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का 60 रुपये में वार्षिक रजिस्ट्रेशन किया जाता है और अठारह वर्ष से अधिक खिलाड़ियों को 210 रुपये प्रतिमाह शुल्क देना पड़ता है। इनका कहना है कि स्थानीय युवाओं में स्पोटर्स के प्रति काफी कम रुझान है।
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शुरुआत में कुछ खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गई हैं, लेकिन इसके बाद अधिकारियों ने इस ओर कोई खास दिलचस्पी नहीं ली है। स्टेडियम में एक ही मैदान है, जहां पर क्रिकेट, फुटबाल, हॉकी, दौड़ व वॉलीबाल के मिश्रित प्लेटफार्म बना हुआ है। वर्तमान में स्टेडियम में फुटबाल के कोच तैनात हैं इसलिए मैदान के दोनों छोड़ पर फुटबॉल के गोल पोस्ट लगे हुए हैं, लेकिन इन दोनों गोलपोस्ट की नेट फटी गई है, जो केवल नाम मात्र के लगी हुई है।
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हॉकी पोस्ट की भी यही स्थिति है। रखरखाव के अभाव में खेल का मैदान किसी पार्क की तरह बन गया है, जहां बड़ी-बड़ी घास खड़ी हुई हैं। स्टेडियम में लाखों रुपये की लागत से खरीदे गए जिम के उपकरण वर्षों से धूल खा रहे हैं।
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रखरखाव के नाम पर प्रतिमाह हजारों खर्च
मैदान में खड़ी बड़ी-बड़ी घास इस बात का सबूत है कि मैदान के रखरखाव की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। घास के कारण वॉलीबाल कोर्ट गायब है। स्टेडियम प्रशासन द्वारा मैदान के रखरखाव के नाम प्रतिमाह हजारों रुपये खर्च किए जाते हैं। मैदान की घास काटने, सफाई करने, चौकीदारी व अन्य कार्य के लिए यहां पर संविदा के माध्यम से चार कर्मचारी को नियुक्त किया गया है। हजारों रुपये खर्च करने के बाद भी यहां की स्थिति बदतर बनी हुई है।
अब तक नहीं हो सकी बास्केटबाल कोर्ट
तत्कालीन जिलाधिकारी जुहेर बिन सगीर ने बास्केटबाल कोर्ट का निर्माण पूर्ण कराने में दिलचस्पी ली थी, इसके बाद कोर्ट के कुछ हिस्से का निर्माण शुरू हुआ। लेकिन उनके स्थानांतरण होने के बाद से ही निर्माण कार्य फिर से बंद हो गया है। यहां के अधिकारी का कहते हैं कि जल्द ही कोर्ट का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।
हॉल की छप से टपकता है पानी
इनडोर गेम के लिए यहां पर एक हॉल बना हुआ है, जिसमें टेबिल टेनिस व बैडमिंटन खेलने की व्यवस्था है, लेकिन इस हॉल की छत से बरसात का पानी रिसता है। अधिकारियों का कहना है कि हॉल की पूरी छत की मरम्मत की जाएगी, जिसमें लंबे बजट की आवश्यकता पड़ेगी। मुख्यालय से बजट स्वीकृत होने के बाद ही छत की मरम्मत का कार्य हो सकेगा। गौरतलब है कि इसी रिसती हुई छत के नीचे जिला के अधिकारी गण प्रतिदिन सुबह बैड-मिंटन खेलने के लिए आते हैं।
केवल फुटबाल कोच ही तैनात
स्टेडियम में वर्तमान में केवल फुटबाल कोच नियुक्त है, जिनका नाम रामचंद्र हैं, यहीं उपक्रीड़ा अधिकारी का प्रभार लिए हुए हैं। इसके साथ स्टाफ में एक लिपिक व चौकीदार तैनात है। बाकी चार कर्मचारी संविदा पर रखे गए हैं। उपक्रीड़ा अधिकारी ने बताया कि स्टेडियम में 18 वर्ष से अधिक उम्र का एक भी खिलाड़ी ने यहां पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। वहीं 30 बच्चों ने रजिस्ट्रेशन कराया हुआ है, लेकिन वह नियमित रूप से नहीं आ रहे हैं। वहीं इनडोर गेम के लिए भी 10 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया हुआ है, जो 2,800 रुपये वार्षिक रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा करते हैं। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का 60 रुपये में वार्षिक रजिस्ट्रेशन किया जाता है और अठारह वर्ष से अधिक खिलाड़ियों को 210 रुपये प्रतिमाह शुल्क देना पड़ता है। इनका कहना है कि स्थानीय युवाओं में स्पोटर्स के प्रति काफी कम रुझान है।