बंडई बांध मुआवजा: हाईकोर्ट का राज्य सरकार से जवाब तलब

lalitpur Updated Thu, 03 Nov 2016 12:24 AM IST
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न्याय
न्‍याय - फोटो : demo pic

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ललितपुर/मड़ावरा। बंडई बांध से प्रभावित किसानों को मुआवजा वितरण में हुई धांधली का मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र व राज्य सरकार से मुआवजा नीति के बारे में तीन नवंबर तक जवाब मांगा है।
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बंडई बांध परियोजना की शुरुआत से ही अधिग्रहित की जाने वाली जमीन को लेकर धांधली की शिकायतें उठती रहीं है। सिंचाई विभाग के कुछ कर्मियों ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर आदिवासियों से सस्ते दामों पर खरीदकर विभाग को रजिस्ट्री कर मोटा मुआवजा पा लिया। मुआवजे के नाम पर हुई इस धांधली के खिलाफ बुंदेलखंड सेवा संस्थान ने किसानों का हक दिलाने के लिए उनके अनुरोध पर बंडई बांध परियोजना में किए गए भ्रष्टाचार के विरुद्ध किसानों के अधिकारों की पैरवी करने के लिए एक जनहित याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर किया था। अधिवक्ता अभिजीत और सुष्मिता मुखर्जी के उच्च न्यायालय इलाहाबाद में जनहित याचिका संख्या 49877 ध 2016 में पैरवी की जा रही है। इस मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार से किसानों को मुआवजा एवं पुनर्वास सुविधा देने संबंधित जवाब देने के लिए तीन नवंबर को तलब किया है। जनपद में पहली किसानों ने अपने हक के लिए एकजुट होकर लड़ाई लड़ने का मन बनाया है। किसानों को उम्मीद है कि उन्हें कोर्ट से न्याय मिलेगा। धांधली का मामला केवल जमीन खरीदने का नहीं है, बल्कि दलालों द्वारा किसानों को मुआवजा दिलाने के नाम पर जबरदस्ती ट्रैक्टर दिलाने का भी है। करीब दो दर्जन से ज्यादा किसानों को जबरन ट्रैक्टर थमा दिया गया। ट्रैक्टर लेने के बाद ही किसानों को मुआवजा मिल सका।
एक जिलेदार आरोपों के घेरे में
बंडई बांध परियोजना में सबसे ज्यादा आरोप सिंचाई निर्माण खंड प्रथम के जिलेदार पर लगाए गए हैं। हाईकोर्ट में जमा किए गए दस्तावेजों में भी इस जिलेदार के कारनामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। किसानों ने आरोप लगाया है, कि बंडई बांध परियोजना शुरु होने से पहले ही सिंचाई विभाग के इस कर्मचारी द्वारा अपने साले सूरज व ससुर दयाराम के नाम पर कई एकड़ जमीन सस्ती दरों पर खरीद ली गई। फिर इसी जमीन को सिंचाई विभाग को बांध बनाने के लिए देकर अच्छा खासा मुआवजा पा लिया। किसानों का आरोप है, कि उन्हें अंधेरे में रखकर उनकी जमीन को हथिया लिया गया है।

मुझ पर लगाए गए आरोप गलत है। मैंने किसी भी रिश्तेदार के नाम पर कोई जमीन नहीं ली है। मैं शपथ् पत्र दे सकता हूं कि दयाराम मेरा ससुर नहीं है और न ही सूरज मेरा साला है। हाईकोर्ट में मेरे बारे में दी गई जानकारी गलत है।
- रामकुमार जिलेदार  सिंचाई निर्माण खंड प्रथम
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