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Lalitpur News: 89 वर्षों से निकाली जा रही हनुमान जयंती की शोभायात्रा
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। अंग्रेजी शासन काल में 89 वर्ष पहले हनुमान जयंती की शोभायात्रा की शुरुआत हुई थी, जिसने अब भव्य रूप ले लिया है। तब बैलगाड़ियों व मोर मोटर पर झांकियां निकाली जाती थीं। अब हनुमान जयंती पर एक दर्जन से अधिक अखाड़े और दो दर्जन से अधिक झांकियां, दर्जनों झंडे, ऊंट, घोड़ा आदि शामिल होते हैं।
ललितपुर में हनुमान जयंती महोत्सव पर्व अंग्रेजी शासन काल से मनाया जा रहा है। शहर में सबसे पहले वर्ष 1983 में हनुमान जयंती महोत्सव तुवन ग्राउंड में मनाया गया था। इसके बाद यह हर वर्ष मनाया जाने लगा, लेकिन वर्ष 1936 में हनुमान जयंती महोत्सव समिति द्वारा पहली बार शोभायात्रा निकाली गई थी, जिसमें हनुमानजी के स्वरूप एवं उनकी फोटो को रथों पर विराजमान करके गाजे बाजे के साथ नगर भ्रमण कराया गया था। यह शोभायात्रा ऐनकैंपेन ग्राउंड (अब तुवन मैदान) से शुरू होकर मुख्य मार्गों नझाई गेट, घंटाघर, सावरकर चौक, कटरा बाजार, महावीरपुरा होते हुए वापस ऐनकैंपेन ग्राउंड पहुंचती थी।
इस शोभायात्रा का जगह-जगह आरती करते हुए भव्य स्वागत किया जाता था। पहले शोभायात्रा बैलगाड़ी और मोट मोटर और फिर ट्रैक्टर व अन्य वाहनों पर निकाली जाने लगी। समय बदलने के साथ ही अब शोभायात्रा का स्वरूप भी भव्य हो गया है। अब हर वर्ष नए अखाड़े और नई झांकियां और संगठनों के आयोजन भी बढ़ते जा रहे हैं।
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वर्ष 1936 में जब हनुमान जयंती की शोभायात्रा निकाली गई तो तब सभी मंदिरों के ध्वज, भजन मंडलियां और हाथ ठेले पर झांकियां निकाली गईं। शुरुआत में मात्र दो झांकियां ही शामिल हुई थीं। इसके बाद वर्ष 1940 में भारत सेवा मंडल का पहला अखाड़ा इसमें शामिल हो गया। फिर शोभायात्रा भव्य बनाने के लिए झांकियों को बैलगाड़ी और फिर मोर मोटरों में सजाकर निकाला जाने लगा। इसके बाद झांकियों को जीप और ट्रैक्टर से निकालना शुरू किया गया। अब हनुमान जयंती की शोभायात्रा काफी भव्य रूप से निकाली जाती है, जिसमें शहर के 13 से अधिक अखाड़े, 25 से अधिक झांकियां और शहर के सभी प्रमुख हनुमान मंदिरों के ऊंचे ध्वज, कई भजन मंडलियां और कई संगठन शामिल होते हैं।
हनुमान जयंती की शोभायात्रा की शुरुआत तुवन मंदिर पर सभी मंदिरों के ध्वज के पहुंचने के बाद होती है। ध्वज पहुंचने पर यहां अखाड़ों का प्रदर्शन होता है, जिसके बाद ध्वज निकलने के साथ ही हनुमान जयंती की भव्य व विराट शोभायात्रा की शुरुआत होती है। इस शोभायात्रा को देखने के लिए शहर के साथ ही सभी ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं।
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फोटो-34
हनुमान जयंती पर शोभायात्रा की शुरुआत 89 वर्ष पहले वर्ष 1936 में हुई थी। तब से अब तक शोभायात्रा काफी भव्य हो गई है और अब इसमें 13 अखाड़े और 25 से अधिक झांकियां और भजन मंडलियां शामिल होकर इसे आकर्षक बनाते हैं।
बृजेश चतुर्वेदी, अध्यक्ष श्रीहनुमान जयंती महोत्सव समिति।
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फोटो-35
कैप्सन-हरविंदर सिंह सलूजा।
हनुमान जयंती की शोभायात्रा पहले की अपेक्षा अब काफी भव्य हो गई है। पहले सामान्य तरीके से शोभायात्रा निकालते थे, लेकिन अब कई अखाड़ों, झांकियों व भजन मंडलियां शामिल होती हैं।
-हरविंदर सिंह सलूजा, मंत्री।
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फोटो-36
ललितपुर में हनुमान जन्मोत्सव पर्व की शोभायात्रा पूरे बुंदेलखंड में सबसे बड़ी और भव्य तरीके से निकाली जाती है। पहले की अपेक्षा इसका काफी विस्तार किया गया है। अब इसमें दो दर्जन से अधिक अखाड़े और कई भजन मंडलियां शामिल होती हैं।
-अमित तिवारी।
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ललितपुर। अंग्रेजी शासन काल में 89 वर्ष पहले हनुमान जयंती की शोभायात्रा की शुरुआत हुई थी, जिसने अब भव्य रूप ले लिया है। तब बैलगाड़ियों व मोर मोटर पर झांकियां निकाली जाती थीं। अब हनुमान जयंती पर एक दर्जन से अधिक अखाड़े और दो दर्जन से अधिक झांकियां, दर्जनों झंडे, ऊंट, घोड़ा आदि शामिल होते हैं।
ललितपुर में हनुमान जयंती महोत्सव पर्व अंग्रेजी शासन काल से मनाया जा रहा है। शहर में सबसे पहले वर्ष 1983 में हनुमान जयंती महोत्सव तुवन ग्राउंड में मनाया गया था। इसके बाद यह हर वर्ष मनाया जाने लगा, लेकिन वर्ष 1936 में हनुमान जयंती महोत्सव समिति द्वारा पहली बार शोभायात्रा निकाली गई थी, जिसमें हनुमानजी के स्वरूप एवं उनकी फोटो को रथों पर विराजमान करके गाजे बाजे के साथ नगर भ्रमण कराया गया था। यह शोभायात्रा ऐनकैंपेन ग्राउंड (अब तुवन मैदान) से शुरू होकर मुख्य मार्गों नझाई गेट, घंटाघर, सावरकर चौक, कटरा बाजार, महावीरपुरा होते हुए वापस ऐनकैंपेन ग्राउंड पहुंचती थी।
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इस शोभायात्रा का जगह-जगह आरती करते हुए भव्य स्वागत किया जाता था। पहले शोभायात्रा बैलगाड़ी और मोट मोटर और फिर ट्रैक्टर व अन्य वाहनों पर निकाली जाने लगी। समय बदलने के साथ ही अब शोभायात्रा का स्वरूप भी भव्य हो गया है। अब हर वर्ष नए अखाड़े और नई झांकियां और संगठनों के आयोजन भी बढ़ते जा रहे हैं।
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वर्ष 1936 में जब हनुमान जयंती की शोभायात्रा निकाली गई तो तब सभी मंदिरों के ध्वज, भजन मंडलियां और हाथ ठेले पर झांकियां निकाली गईं। शुरुआत में मात्र दो झांकियां ही शामिल हुई थीं। इसके बाद वर्ष 1940 में भारत सेवा मंडल का पहला अखाड़ा इसमें शामिल हो गया। फिर शोभायात्रा भव्य बनाने के लिए झांकियों को बैलगाड़ी और फिर मोर मोटरों में सजाकर निकाला जाने लगा। इसके बाद झांकियों को जीप और ट्रैक्टर से निकालना शुरू किया गया। अब हनुमान जयंती की शोभायात्रा काफी भव्य रूप से निकाली जाती है, जिसमें शहर के 13 से अधिक अखाड़े, 25 से अधिक झांकियां और शहर के सभी प्रमुख हनुमान मंदिरों के ऊंचे ध्वज, कई भजन मंडलियां और कई संगठन शामिल होते हैं।
हनुमान जयंती की शोभायात्रा की शुरुआत तुवन मंदिर पर सभी मंदिरों के ध्वज के पहुंचने के बाद होती है। ध्वज पहुंचने पर यहां अखाड़ों का प्रदर्शन होता है, जिसके बाद ध्वज निकलने के साथ ही हनुमान जयंती की भव्य व विराट शोभायात्रा की शुरुआत होती है। इस शोभायात्रा को देखने के लिए शहर के साथ ही सभी ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं।
फोटो-34
हनुमान जयंती पर शोभायात्रा की शुरुआत 89 वर्ष पहले वर्ष 1936 में हुई थी। तब से अब तक शोभायात्रा काफी भव्य हो गई है और अब इसमें 13 अखाड़े और 25 से अधिक झांकियां और भजन मंडलियां शामिल होकर इसे आकर्षक बनाते हैं।
बृजेश चतुर्वेदी, अध्यक्ष श्रीहनुमान जयंती महोत्सव समिति।
फोटो-35
कैप्सन-हरविंदर सिंह सलूजा।
हनुमान जयंती की शोभायात्रा पहले की अपेक्षा अब काफी भव्य हो गई है। पहले सामान्य तरीके से शोभायात्रा निकालते थे, लेकिन अब कई अखाड़ों, झांकियों व भजन मंडलियां शामिल होती हैं।
-हरविंदर सिंह सलूजा, मंत्री।
फोटो-36
ललितपुर में हनुमान जन्मोत्सव पर्व की शोभायात्रा पूरे बुंदेलखंड में सबसे बड़ी और भव्य तरीके से निकाली जाती है। पहले की अपेक्षा इसका काफी विस्तार किया गया है। अब इसमें दो दर्जन से अधिक अखाड़े और कई भजन मंडलियां शामिल होती हैं।
-अमित तिवारी।