फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   ham apne bude chirajo pr khuv itrav

‘हम अपने बूढ़े चिरागों पर खूब इतराए’

Wed, 12 Aug 2020 01:03 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 12 Aug 2020 01:03 AM IST
विज्ञापन
ham apne bude chirajo pr khuv itrav
एक दशक पूर्व ललितपुर में मुशायरे के दौरान उर्स कमेटी के सदस्यों के साथ मौजूद राहत इंदौरी। - फोटो : LALITPUR
‘हम अपने बूढ़े चिरागों पर खूब इतराए’
विज्ञापन

ललितपुर। अंतर्राष्ट्रीय प्रख्यात शायर राहत इंदौरी ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। इससे उनके चाहने वालों में मायूसी छा गई है। उनका जुड़ाव ललितपुर से रहा है। वे कई बार ललितपुर स्थित हजरत सदनशाह बाबा के सालाना उर्स में मुशायरा पढ़ चुके हैं। इसके पूर्व वर्ष 2009-10 में इसी मंच पर मुशायरा पढ़ते समय हार्ट अटैक आ गया था। हालांकि, तत्काल उपचार मिलने के बाद वह ठीक हो गए थे। उनका ये शेर मशहूर हुआ, जिसमें सुनाया कि हम अपने बूढ़े चिरागों पर खूब इतराए, और उसको भूल गए जो हवा चलाता है।
ललितपुर जिले से उनकी यादें जुड़ी हुई हैं। राहत इंदौरी जनपद में सात आठ मर्तबा आ चुके हैं। वर्ष 2009-10 में बाबा सदनशाह की दरगाह पर सालाना उर्स के मुशायरे में आए थे। इसी दौरान शेर पढ़ते समय उन्हें दिल का दौरा पड़ गया था। उसी समय मुशायरा संचालक असर ललितपुरी, अजीज कुरैशी अपने साथियों के साथ मुशायरा छोड़कर उन्हें जिला अस्पताल ले गए थे। वहां एक-दो घंटे रहने के बाद रेस्ट हाउस आराम के लिए ले गए थे। अगले दिन उन्हें भोपाल ट्रेन बैठाया और उनके साथ एक व्यक्ति भी साथ गया था। भोपाल में उनके पुत्र लेने आए थे। इसके बाद वे इंदौर रवाना हो गए थे। शायर असर ललितपुरी बताते हैं कि उन्होंने बाबा सदनशाह के सालाना उर्स में मुशायरे में सुनाया था कि कब्र के पत्थर के नीचे थी मेरी अइयाशियां, और मेरे आमाल का साया मेरे बच्चों पर था। इसी शेर को पढ़ ही रहे थे कि उन्हें अटैक आ गया था। जिले में आखिरी बार जेल चौराहा स्थित हजरत बाबा जलालुउद्दीन शाह रहमत उल्लाह अलैह की दरगाह पर सालाना उर्स में मुशायरा पढ़ा था। बारह मई 2018 को उन्होंने सुनाया था कि हमारे मुंह से जो निकले वही सदाकत है, हमारे मुंह में तुम्हारी जबान थोड़ी है। इस शेर पर खूब तालियां बजी थीं। इस मुशायरे में डा. सागर त्रिपाठी मुंबई, एजाज अंसारी दिल्ली, जमील खैरावादी, जाहिद नैय्यर अमरावती, कलीम दानिश कानपुरी, जलाल मैकश भोपाल, राजीव राज प्रतापगढ़, नूूरी परवीन एटा, जेबा राना ग्वालियर, सोनिया शबनम ललितपुर शामिल हुई थीं।
विज्ञापन

राहत इंदौरी बहुत बड़े शायर थे। उनके शेर पर कई गाने काफी चर्चित रहे। खुद्दार फिल्म का मशहूर गीत तुम सा कोई प्यारा, कोई मायूसी नहीं है, क्या चीज हो तुम खुद तुम्हे मालूम नहीं है, काफी पसंद किया गया। असर ललितपुरी, शायर
विज्ञापन
विज्ञापन

राहत इंदौरी जज्बाती शायर थे, वे जोश में शेर पढ़ा करते थे, पूरी ऊर्जा के साथ शेर को पढ़ते थे। इस वजह से उन्हें उर्स के मुशायरे में हार्ट अटैक आ गया था। अजीज कुरैशी जनरल सैक्रेटी, उर्स कमेटी, हजरत बाबा सदनशाह
राहत इंदौरी का शेर जिसमें सुनाया था कि हाथों में तलवार नहीं, आंखों में पानी चाहिए, यह खुदा हमें दुश्मन भी खानदानी चाहिए, जिंदगी का हुनर भी आना चाहिए, जंग जब अपनो से हो तो हार जाना चाहिए। काफी सुर्खियों में रहा। अब्दुल रहमान, नायब सदर, उर्स कमेटी हजरत बाबा सदनशाह

मैं नूर बन के जमाने में फ़ैल जाऊंगा, तुम आफ़ताब में कीड़े निकालते रहना। उनका एक और शेर जो उस दिन पढ़ा था वो मैं आज तक नहीं भूला हूं। उसके कुछ दिन पहले राजीव गांधी का इंतेकाल हुआ था, तभी उन्होंने ये शेर पढ़ा था कि बदला हुआ मिजाज नए मौसमों का है ,फूलों के पास जाने में खतरा बमों का है। जहीर ललितपुरी, शायर
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed