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गुरयाना पारौल सड़क पर चलना जोखिम भरा सफर
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गुरयाना पारौल सड़क पर टूटी पुलिया।
- फोटो : LALITPUR
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ङोगरा खुर्द (ललितपुर)। गुरयाना- पारौल की सड़क खस्ताहाल हो चुकी है। जगह-जगह बड़े- बड़े गड्ढे हो गए हैं। सड़क पर कई जगह तो दो- तीन फीट तक गहरे गड्ढे हो गए हैं। पांच किलोमीटर सड़क पर चलना जोखिम भरा सफर रहता है।
दर्जनों गांवों के लोग इसी सड़क से निकलते हैं। वाहन चालक आएदिन गिरकर चोटिल हो रहे हैं। वाहन चलाना तो दूर इस मार्ग पर पैदल चलना भी मुश्किल है। सड़क बनते समय गुणवत्ता का बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया गया था और गड्ढों में काली मिट्टी का प्रयोग किया गया था। इसी कारण सड़क ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकी। सड़क बनने से डोंगरा खुर्द, पटना, पारौल, बरखेरा, गुरयाना, सिगंरवारा, बरौदिया, चादौरा, देवरी आदि गांवों के लोगों को आवागमन में सहूलियत मिलती। ग्रामीणों का कहना है कि मरम्मत के बाद सड़क एक साल भी नहीं चली और गड्ढों में तब्दील हो गई। गुरयाना से आगे पुलिया टूटी पड़ी है जिससे वहां दुर्घटना की आशंका हर पल बनी रहती है। बताया कि इस मार्ग पर छह बसों का संचालन होता है। इसके अतिरिक्त तमाम डग्गामार वाहनों की भरमार है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से जनहित में सड़क निर्माण कराए जाने की मांग की है।
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पांच किलोमीटर की दूरी तय करने में बीस मिनट का समय लगता है। बरसात के दिनों में राहगीरों को आवागमन में दिक्कत आती हैं। दीपक कुमार
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मरम्मत के कुछ समय बाद ही सड़क के गड्ढों में तब्दील हो जाने से गुरयाना पारौल सड़क का ग्रामीणों को कभी फायदा नहीं हुआ। दिलीप सिंह।
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दर्जनों गांवों के लोग इसी सड़क से निकलते हैं। वाहन चालक आएदिन गिरकर चोटिल हो रहे हैं। वाहन चलाना तो दूर इस मार्ग पर पैदल चलना भी मुश्किल है। सड़क बनते समय गुणवत्ता का बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया गया था और गड्ढों में काली मिट्टी का प्रयोग किया गया था। इसी कारण सड़क ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकी। सड़क बनने से डोंगरा खुर्द, पटना, पारौल, बरखेरा, गुरयाना, सिगंरवारा, बरौदिया, चादौरा, देवरी आदि गांवों के लोगों को आवागमन में सहूलियत मिलती। ग्रामीणों का कहना है कि मरम्मत के बाद सड़क एक साल भी नहीं चली और गड्ढों में तब्दील हो गई। गुरयाना से आगे पुलिया टूटी पड़ी है जिससे वहां दुर्घटना की आशंका हर पल बनी रहती है। बताया कि इस मार्ग पर छह बसों का संचालन होता है। इसके अतिरिक्त तमाम डग्गामार वाहनों की भरमार है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से जनहित में सड़क निर्माण कराए जाने की मांग की है।
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पांच किलोमीटर की दूरी तय करने में बीस मिनट का समय लगता है। बरसात के दिनों में राहगीरों को आवागमन में दिक्कत आती हैं। दीपक कुमार
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मरम्मत के कुछ समय बाद ही सड़क के गड्ढों में तब्दील हो जाने से गुरयाना पारौल सड़क का ग्रामीणों को कभी फायदा नहीं हुआ। दिलीप सिंह।

ुरयाना पारौल सड़क पर गड्ढों में भरा पानी।- फोटो : LALITPUR
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