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मूलभूत सुविधाओं से वंचित गोविंद नगर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 29 Sep 2016 12:29 AM IST
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gndgi, lalitpur news
- फोटो : amar ujala, lalitpur news
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ललितपुर। शहजाद नदी के उस पार पुराने सागर मार्ग पर बसे मुहल्ला गोविंद नगर में रहने वाले हजारों परिवार आज भी विकास की बाट जोह रहे हैं। यहां ॉबिजली, पेयजल, पक्की सडक़ें, नाली और साफ-सफाई का अभाव है। इससे स्थानीय लोगों में काफी रोष है। लोगों का कहना है कि केवल चुनावों के दौरान ही नेताओं व जन प्रतिनिधियों को उनकी याद आती है इसके बाद कोई भी इनका हाल व समस्याओं को पूछने के लिए क्षेत्र में झांकने नहीं आता है।
वार्ड नंबर 11 में स्थित मुहल्ला गोविंद नगर के कुछ इलाकों की स्थिति तो गांवों से भी बदतर है। मुहल्ले में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है कि किसी गांव में पहुंच गए हैं। मुहल्ले की मुख्य सड़क के दोनों ओर बनी नालियां पूरी तरह से उखड़ गई हैं। कुछ जगहों पर नालियों के अवशेष भी नहीं बचे हुए हैं। इससे इलाके में हमेशा ही जलभराव की स्थिति बनी रहती है। वहीं मुहल्ले के अंतिम छोर पर बसे इलाके की स्थिति तो काफी बदतर है। यहां पर तीन सौ से अधिक परिवार रहते हैं, इस इलाके की सड़कों पर नगर पालिका द्वारा बिछाई गई पेवर ब्रेक्स कई जगहों से उखड़ गई है। सड़कें कई जगहों पर बड़े-बड़े गढ्डों में तबदील हो गई हैं।
मुहल्ले में नाली का अभाव है, पूरे इलाके में कुछ ही जगहों पर पक्की नाली का निर्माण किया गया है। पक्की नाली नहीं होने के कारण पूरे इलाके का गंदा पानी सड़कों व खाली पड़े मैदानों में ही जमा होता रहता है। उखड़ चुकी सड़कों पर जलभराव होने के कारण सड़कों पर कीचड़ की स्थिति बन गई है। मुहल्ले वासियों को आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां पर मार्ग प्रकाश की भी काफी समस्या है।
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घनी आबादी में लगे दर्जनों खंभे अभी भी स्ट्रीट लाइट के बिना खड़े हैं। स्थानीय लोगों ने स्ट्रीट लाइट लगवाने की मांग की है, लेकिन नगर पालिका का कहना है कि विभाग में स्ट्रीट लाइट उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही इस इलाके में जलसंस्थान द्वारा पानी की पाइप लाइन नहीं डाली गई है। इलाके की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह से हैंडपंपों के सहारे पर है। भीषण गर्मी व सूखे के दौरान स्थानीय लोगों को नलों की कमी काफी खलती है।
गंदगी व मच्छरों से त्रस्त हैं लोग
मुहल्ले में कहीं पर भी नगर पालिका द्वारा डस्टबिन की व्यवस्था नहीं की गई है। सफाई कर्मचारी भी हफ्तों बीतने के बाद सफाई के लिए आते हैं। मजबूरी में लोगों को अपने घरों में जमा कचरा आस-पास खुले पड़े खाली प्लाटों में फेंकना पड़ता है। गंदगी से मच्छरों का प्रकोप है। यहां बनी नालियां गंदगी से बजबजा रही हैं। स्थानीय निवासी प्रेम नामदेव ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी राकेश कुमार को शिकायती पत्र देकर मुहल्ले में साफ-सफाई कराने की मांग की है।
सहरिया बस्ती में नहीं बिजली
मुहल्ला के बीचों-बीच में वर्षों पुरानी सहरिया बस्ती बसी हुई है, जिसे रावतयाना मुहल्ले के नाम से जाना जाता है। इस मुहल्ले में सहारिया समुदाय के करीब पचास परिवार निवास करते हैं। इस इलाके में दो-तीन मकानों को छोड़कर अन्य किसी भी मकान में बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है। मार्ग प्रकाश की भी व्यवस्था नहीं है, जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अंधेरे के कारण यहां पर अराजकतत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। सफाई, पानी व अन्य सुविधाएं न होने से लोगों में जनप्रतिनिधियों व वार्ड पार्षद के प्रति काफी रोष है।
वार्ड पार्षद चुनाव के बाद कभी भी हमारी समस्याएं जानने के लिए नहीं आए हैं। चुनाव के पहले विकास व बिजली के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन पार्षद बनने के बाद कभी दोबारा चेहरा तक नहीं दिखाया है और न ही कभी उनकी समस्याओं व मांगों को उठाया है।
रज्जो
स्थानीय सहरिया महिला
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वार्ड नंबर 11 में स्थित मुहल्ला गोविंद नगर के कुछ इलाकों की स्थिति तो गांवों से भी बदतर है। मुहल्ले में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है कि किसी गांव में पहुंच गए हैं। मुहल्ले की मुख्य सड़क के दोनों ओर बनी नालियां पूरी तरह से उखड़ गई हैं। कुछ जगहों पर नालियों के अवशेष भी नहीं बचे हुए हैं। इससे इलाके में हमेशा ही जलभराव की स्थिति बनी रहती है। वहीं मुहल्ले के अंतिम छोर पर बसे इलाके की स्थिति तो काफी बदतर है। यहां पर तीन सौ से अधिक परिवार रहते हैं, इस इलाके की सड़कों पर नगर पालिका द्वारा बिछाई गई पेवर ब्रेक्स कई जगहों से उखड़ गई है। सड़कें कई जगहों पर बड़े-बड़े गढ्डों में तबदील हो गई हैं।
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मुहल्ले में नाली का अभाव है, पूरे इलाके में कुछ ही जगहों पर पक्की नाली का निर्माण किया गया है। पक्की नाली नहीं होने के कारण पूरे इलाके का गंदा पानी सड़कों व खाली पड़े मैदानों में ही जमा होता रहता है। उखड़ चुकी सड़कों पर जलभराव होने के कारण सड़कों पर कीचड़ की स्थिति बन गई है। मुहल्ले वासियों को आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां पर मार्ग प्रकाश की भी काफी समस्या है।
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घनी आबादी में लगे दर्जनों खंभे अभी भी स्ट्रीट लाइट के बिना खड़े हैं। स्थानीय लोगों ने स्ट्रीट लाइट लगवाने की मांग की है, लेकिन नगर पालिका का कहना है कि विभाग में स्ट्रीट लाइट उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही इस इलाके में जलसंस्थान द्वारा पानी की पाइप लाइन नहीं डाली गई है। इलाके की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह से हैंडपंपों के सहारे पर है। भीषण गर्मी व सूखे के दौरान स्थानीय लोगों को नलों की कमी काफी खलती है।
गंदगी व मच्छरों से त्रस्त हैं लोग
मुहल्ले में कहीं पर भी नगर पालिका द्वारा डस्टबिन की व्यवस्था नहीं की गई है। सफाई कर्मचारी भी हफ्तों बीतने के बाद सफाई के लिए आते हैं। मजबूरी में लोगों को अपने घरों में जमा कचरा आस-पास खुले पड़े खाली प्लाटों में फेंकना पड़ता है। गंदगी से मच्छरों का प्रकोप है। यहां बनी नालियां गंदगी से बजबजा रही हैं। स्थानीय निवासी प्रेम नामदेव ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी राकेश कुमार को शिकायती पत्र देकर मुहल्ले में साफ-सफाई कराने की मांग की है।
सहरिया बस्ती में नहीं बिजली
मुहल्ला के बीचों-बीच में वर्षों पुरानी सहरिया बस्ती बसी हुई है, जिसे रावतयाना मुहल्ले के नाम से जाना जाता है। इस मुहल्ले में सहारिया समुदाय के करीब पचास परिवार निवास करते हैं। इस इलाके में दो-तीन मकानों को छोड़कर अन्य किसी भी मकान में बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है। मार्ग प्रकाश की भी व्यवस्था नहीं है, जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अंधेरे के कारण यहां पर अराजकतत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। सफाई, पानी व अन्य सुविधाएं न होने से लोगों में जनप्रतिनिधियों व वार्ड पार्षद के प्रति काफी रोष है।
वार्ड पार्षद चुनाव के बाद कभी भी हमारी समस्याएं जानने के लिए नहीं आए हैं। चुनाव के पहले विकास व बिजली के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन पार्षद बनने के बाद कभी दोबारा चेहरा तक नहीं दिखाया है और न ही कभी उनकी समस्याओं व मांगों को उठाया है।
रज्जो
स्थानीय सहरिया महिला