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गोदामें फल, अनाज के भंडारण बनी समस्या
amarujala
Updated Mon, 23 Jul 2018 12:51 AM IST
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anaj, lalitpur news
- फोटो : demo
बीते माहों में खरीद केंद्रों के माध्यम से खरीदे गए अनाज के भंडारण की समस्या खड़ी हो गई है। जहां 1800 मीट्रिक टन गेहूूं क्रय केंद्रों की गोदामों में रखा हुआ है। वहीं, 2440.550 मीट्रिक टन चना, मसूर के भंडारण के लिए कहीं जगह नहीं मिल रही है। ऐसे में अनाज का सुरक्षित भंडारण अधिकारियों के लिए चुनौती बन गया है।
एक अप्रैल से जून माह तक चल खरीद में 66 हजार 651.350 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई। इसी तरह 4886.050 मीट्रिक टन चना, मसूर खरीदा गया। इसमें से 2445.500 मीट्रिक टन चना, मसूर की डिलीवरी गोदामों में हो सकी। अवशेष 2440 .550 मीट्रिक टन चना, मसूर को रखने के लिए खाली गोदामों की तलाश की जा रही है। वहीं, 1800 मीट्रिक टन गेहूं भी गोदामों में पहुंचने से रह गया है। इस समय जिले में शायद ही कोई सरकारी और निजी गोदाम खाली हो, जिसमें इस अनाज को रखा जा सके। इस समस्या से निपटने के लिए अधिकारियों ने गोदामों अवशेष अनाज को रखने की संभावनाएं तलाशी तो रोड़ा गोदाम में कुछ स्थान खाली मिल गया। जहां क्रय केंद्रों पर रखे अनाज को पहुंचाने का काम शुरू हो गया है। लेकिन, यह समस्या एक दो दिन में फिर गहराने वाली है। ऐसी स्थिति में अधिकारियों के सामने अनाज को बाहर भेजने के लिए अलावा कोई चारा नहीं रह जाता है। फिलहाल अधिकारियों के लिए अनाज के सुरक्षित भंडारण की चुनौती खड़ी हो गई है।
चिरगांव में नहीं बनी बात
पिछले दिनों झांसी के चिरगांव में चना, मसूर के भंडारण के निर्देश जारी हुए थे लेकिन यहां कुछ ही दिनों डिलीवरी चल सकी। इसके बाद यहां किन्हीं कारणों के चलते आगे अनाज की डिलीवरी नहीं की जा सकी। वर्तमान में एसडब्ल्यूसी (स्टेट वेयर हाउस सेंटर) को इसके भंडारण की जिम्मेदारी सौपी गई है। इसके बाद भी भंडारण की समस्या का समाधान पूरी तरह नहीं हो पाया है।
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ट्रकों की हल्टिंग एवं स्थान अभाव से आई समस्या
गेहूं, चना, मसूर के भंडारण में समस्या आ रही है। जहां ट्रकों की 10 से 15 दिनों की हल्टिंग हो रही है। वहीं, स्थान की कमी बनी हुई है। वर्तमान में रोड़ा गोदाम में अनाज रखवाया जा रहा है। जरूरत पड़ेगी तो झांसी या अन्य जगह अनाज भेजा जाएगा।
अनूप कुमार द्विवेदी, सहायक निबंधक सहकारी समितियां
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एक अप्रैल से जून माह तक चल खरीद में 66 हजार 651.350 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई। इसी तरह 4886.050 मीट्रिक टन चना, मसूर खरीदा गया। इसमें से 2445.500 मीट्रिक टन चना, मसूर की डिलीवरी गोदामों में हो सकी। अवशेष 2440 .550 मीट्रिक टन चना, मसूर को रखने के लिए खाली गोदामों की तलाश की जा रही है। वहीं, 1800 मीट्रिक टन गेहूं भी गोदामों में पहुंचने से रह गया है। इस समय जिले में शायद ही कोई सरकारी और निजी गोदाम खाली हो, जिसमें इस अनाज को रखा जा सके। इस समस्या से निपटने के लिए अधिकारियों ने गोदामों अवशेष अनाज को रखने की संभावनाएं तलाशी तो रोड़ा गोदाम में कुछ स्थान खाली मिल गया। जहां क्रय केंद्रों पर रखे अनाज को पहुंचाने का काम शुरू हो गया है। लेकिन, यह समस्या एक दो दिन में फिर गहराने वाली है। ऐसी स्थिति में अधिकारियों के सामने अनाज को बाहर भेजने के लिए अलावा कोई चारा नहीं रह जाता है। फिलहाल अधिकारियों के लिए अनाज के सुरक्षित भंडारण की चुनौती खड़ी हो गई है।
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चिरगांव में नहीं बनी बात
पिछले दिनों झांसी के चिरगांव में चना, मसूर के भंडारण के निर्देश जारी हुए थे लेकिन यहां कुछ ही दिनों डिलीवरी चल सकी। इसके बाद यहां किन्हीं कारणों के चलते आगे अनाज की डिलीवरी नहीं की जा सकी। वर्तमान में एसडब्ल्यूसी (स्टेट वेयर हाउस सेंटर) को इसके भंडारण की जिम्मेदारी सौपी गई है। इसके बाद भी भंडारण की समस्या का समाधान पूरी तरह नहीं हो पाया है।
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ट्रकों की हल्टिंग एवं स्थान अभाव से आई समस्या
गेहूं, चना, मसूर के भंडारण में समस्या आ रही है। जहां ट्रकों की 10 से 15 दिनों की हल्टिंग हो रही है। वहीं, स्थान की कमी बनी हुई है। वर्तमान में रोड़ा गोदाम में अनाज रखवाया जा रहा है। जरूरत पड़ेगी तो झांसी या अन्य जगह अनाज भेजा जाएगा।
अनूप कुमार द्विवेदी, सहायक निबंधक सहकारी समितियां