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हृदय रोगियों का भगवान मालिक
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Thu, 16 Jul 2015 12:13 AM IST
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आईसीयू (इंसेंटिव केयर यूनिट) किसी भी अस्पताल की सबसे महत्वपूर्ण यूनिट होती है, जहां हृदय रोगियों को रखकर उपचार किया जाता है। आईसीयू में सभी पलंग एक मॉनीटर से जुड़े होते हैं। चिकित्सक स्थिति के अनुसार उपचार करके मरीजों की जान बचाते हैं। 20 वर्ष पूर्व ब्लड बैंक के बगल में आईसीयू की बिल्डिंग बनाई गई थी। उसके बाद नवनिर्मित ट्रामा सेंटर के बगल में नवीन आईसीयू बनाया गया है, लेकिन यह बिल्डिंग भी पुरानी की तरह सफेद हाथी साबित हो रही है। आईसीयू सुचारु न होने से डाक्टरों के सामने गंभीर हृदय रोगियों को मेडिकल कालेज झांसी रेफर करने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं रहता है। इस समस्या को अमर उजाला ने दो वर्ष पहले प्रकाशित समाचार ‘ओह हार्ट पेशेंट...झांसी रेफर ’ को प्रमुखता से उजागर किया था, जिसमें तत्कालीन सदर विधायक रमेश कुशवाहा और तत्कालीन केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री प्रदीप जैन आदित्य के प्रतिनिधि ने शासन - प्रशासन से पत्राचार करने का आश्वासन दिया था। इसके बाद शासन के प्रमुख सचिव ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र भेजकर आईसीयू सुचारु बनाने को आवश्यक बिल्डिंग, स्टाफ व संसाधन संबंधी जानकारियां मांगी थी। तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधीक्षक जिला चिकित्सालय ने चिकित्सालय परिसर में निर्मित बिल्डिंग का निरीक्षण कर शासन को ब्योरा भेज दिया, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। जिला अस्पताल में हायर सेंटर रेफर करने का सिलसिला जारी है।