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धनतेरस पर जमकर हुई खरीदारी
lalitpur
Updated Sat, 29 Oct 2016 12:47 AM IST
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ख्ारीदारी
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। धनतेरस के दिन बाजार गुलजार रहे। आकर्षक सजाई गई दुकानों में खूब खरीदारी की गई। शहर का मुख्य आकर्षण का केंद्र शुक्रवार को बर्तन बाजार रहा। वहां रात तक लोगों ने दुकानों पर पहुंचकर खूब खरीदारी की। वहीं शहर में वाहनों के शोरुम भी खूब सजाए गए और ग्राहकों को लुभाने के लिए किसी ने चांदी के सिक्के तो किसी ने बैग बांटे।
शहर में धनतेरस को लेकर लोगों द्वारा द्वारा कई दिनों से तैयारियां की जा रही थी। स्टील व पीतल के बर्तनों से लेकर सोने-चांदी और वाहनों व इलैक्ट्रॉनिक सामान की खरीददारी की प्लानिंग लोगों द्वारा की गई थी। ऐसे में कारोबारियों ने भी बाजारों में पहले से तैयारी कर ली थी और धनतेरस के दिन ग्राहकों को लुभाने के लिए दुकानों को आकर्षक अंदाज में सजाया गया।
शहर में मुख्य रूप से लोहा-पीतल मार्केट में वर्षों की परंपरा के अनुसार इस बार भी बर्तन बाजार लगाया गया, जो आकर्षण का केंद्र रहा। लोगों ने स्टील व पीतल के बर्तनों की खूब खरीदारी की। वहीं शहर में विभिन्न वाहन शोरुमों को भी आकर्षक तरीके से सजाया गया और लोगों को वाहनों की खरीददारी को लुभाने के लिए तरह-तरह के ऑफर रखे गए। किसी ने चांदी का सिक्का बांटा, तो किसी ने आकर्षक बैग वाहन खरीदारों को गिफ्ट किया। किसी वाहन शोरुम पर एक सैकड़ा तक वाहनों की बिक्री रही, तो बहुत से शोरुम पर यह आंकड़ा ढाई सौ तक भी पहुंच गया। देर शाम को खरीददारी के बाद लोगों ने शुभ मुहुर्त में विभिन्न सामान बर्तन, सोना, चांदी, वाहन, इलैक्ट्रॉनिक सामानों के साथ भगवान कुबेर की शुभमुहुर्त में पूर्ण विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की।
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हिन्दू धर्म में धनतेरस को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन धन के देवता कुबेर और आयुर्वेद के देव धनवंतरि की पूजा की जाती है। इसीलिए इसे धनतेरस कहा जाता है। स्कन्द पुराण के अनुसार इस दिन धन्वंतरि देव अमृत कलश के साथ सागर मंथन से निकले थे, जिससे इस दिन धनतेरस के साथ-साथ धनवंतरि जयंती को मनाने का भी प्रचलन है। दीवाली से दो दिन पहले शुक्रवार को यह त्यौहार शहर में हर्षोल्लास और विधि विधान के साथ मनाया गया।
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शहर में धनतेरस को लेकर लोगों द्वारा द्वारा कई दिनों से तैयारियां की जा रही थी। स्टील व पीतल के बर्तनों से लेकर सोने-चांदी और वाहनों व इलैक्ट्रॉनिक सामान की खरीददारी की प्लानिंग लोगों द्वारा की गई थी। ऐसे में कारोबारियों ने भी बाजारों में पहले से तैयारी कर ली थी और धनतेरस के दिन ग्राहकों को लुभाने के लिए दुकानों को आकर्षक अंदाज में सजाया गया।
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शहर में मुख्य रूप से लोहा-पीतल मार्केट में वर्षों की परंपरा के अनुसार इस बार भी बर्तन बाजार लगाया गया, जो आकर्षण का केंद्र रहा। लोगों ने स्टील व पीतल के बर्तनों की खूब खरीदारी की। वहीं शहर में विभिन्न वाहन शोरुमों को भी आकर्षक तरीके से सजाया गया और लोगों को वाहनों की खरीददारी को लुभाने के लिए तरह-तरह के ऑफर रखे गए। किसी ने चांदी का सिक्का बांटा, तो किसी ने आकर्षक बैग वाहन खरीदारों को गिफ्ट किया। किसी वाहन शोरुम पर एक सैकड़ा तक वाहनों की बिक्री रही, तो बहुत से शोरुम पर यह आंकड़ा ढाई सौ तक भी पहुंच गया। देर शाम को खरीददारी के बाद लोगों ने शुभ मुहुर्त में विभिन्न सामान बर्तन, सोना, चांदी, वाहन, इलैक्ट्रॉनिक सामानों के साथ भगवान कुबेर की शुभमुहुर्त में पूर्ण विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की।
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हिन्दू धर्म में धनतेरस को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन धन के देवता कुबेर और आयुर्वेद के देव धनवंतरि की पूजा की जाती है। इसीलिए इसे धनतेरस कहा जाता है। स्कन्द पुराण के अनुसार इस दिन धन्वंतरि देव अमृत कलश के साथ सागर मंथन से निकले थे, जिससे इस दिन धनतेरस के साथ-साथ धनवंतरि जयंती को मनाने का भी प्रचलन है। दीवाली से दो दिन पहले शुक्रवार को यह त्यौहार शहर में हर्षोल्लास और विधि विधान के साथ मनाया गया।