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लो वोल्टेज एवं अघोषित कटौती के चलते जनरेटर से सिंचाई करने को मजबूर किसान
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खेत पर जनरेटर रखकर सिंचाई कर रहे किसान
- फोटो : LALITPUR
डोगरा खुर्द (ललितपुर)। बिरधा सब स्टेशन से जुड़े नाराहट फीडर के किसानों को इन दिनों लो वोल्टेज एवं अघोषित कटौती से जूझना पड़ रहा है। वहीं, लो वोल्टेज में नलकूप शोपीस साबित हो रहे हैं। इस कारण किसानों को जनरेटर का इंतजाम कर सिंचाई करनी रही है। इससे उनकी खेती की लागत राशि बढ़ती जा रही है। लगभग 50 गांव के किसान सिंचाई के लिए परेशान हैं।
रबी सीजन की खेतों में बुवाई चल रही है। इसे ध्यान में रखकर बिरधा सब स्टेशन से जुड़े नाराहट में दर्जनों गांव की बिजली का रोस्टर बनाया गया है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे बिजली आपूर्ति की बात कही जा रही है लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है। ग्रामीण क्षेत्रों में बमुश्किल 10 से 12 घंटे ही विद्युत आपूर्ति की जा रही है। जिन किसानों ने हजारों रुपये खर्च करके टयूबवेल का कनेक्शन लिए हैं, उनके नलकूप कनेक्शन शोपीस बनकर रह गए हैं। लो वोल्टेज में खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। इतना ही नहीं, अघोषित कटौती भी किसानों को परेशान कर रही है। ऐसे में किसानों को सिंचाई में जनरेटर का सहारा लेना पड़ रहा है। इस तरह किसानों को दोगुना रुपया व्यय सिंचाई पर करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि नाराहट फीडर के अधिकांश गांवों में करीब 350 किसानों ने स्थाई टयूबवेल का विद्युत कनेक्शन लिए हैं और लगभग 100 किसान अस्थाई कनेक्शन लिए है लेकिन उन्हें सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। इससे किसानों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है।
अघोषित कटौती व लो वोल्टेज से नल कूपों की मोटरें नहीं चलती हैं, जिससे किसानों को मजबूरी में जनरेटर रखने पड़ रहे हैं।- छोटू त्रिपाठी किसान डोगरा खुर्द
अघोषित कटौती व लो वोल्टेज से किसान जूझ रहे हैं। हजारों रुपये खर्च करके विद्युत कनेक्शन लिए थे। डीजल जलाना पड़ रहा है। लिए कनेक्शनों का कोई सहारा नहीं मिल रहा है।- मनोज कुमार दुबे किसान।
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विद्युत कनेक्शन के बाद भी जनरेटर किराए पर लेेना पड़ रहा है, ऐसे में किसानों को दोगुना नुकसान उठाना पड़ रहा है। अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है।- हरीराम दुबे
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रबी सीजन की खेतों में बुवाई चल रही है। इसे ध्यान में रखकर बिरधा सब स्टेशन से जुड़े नाराहट में दर्जनों गांव की बिजली का रोस्टर बनाया गया है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे बिजली आपूर्ति की बात कही जा रही है लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है। ग्रामीण क्षेत्रों में बमुश्किल 10 से 12 घंटे ही विद्युत आपूर्ति की जा रही है। जिन किसानों ने हजारों रुपये खर्च करके टयूबवेल का कनेक्शन लिए हैं, उनके नलकूप कनेक्शन शोपीस बनकर रह गए हैं। लो वोल्टेज में खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। इतना ही नहीं, अघोषित कटौती भी किसानों को परेशान कर रही है। ऐसे में किसानों को सिंचाई में जनरेटर का सहारा लेना पड़ रहा है। इस तरह किसानों को दोगुना रुपया व्यय सिंचाई पर करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि नाराहट फीडर के अधिकांश गांवों में करीब 350 किसानों ने स्थाई टयूबवेल का विद्युत कनेक्शन लिए हैं और लगभग 100 किसान अस्थाई कनेक्शन लिए है लेकिन उन्हें सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। इससे किसानों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है।
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अघोषित कटौती व लो वोल्टेज से नल कूपों की मोटरें नहीं चलती हैं, जिससे किसानों को मजबूरी में जनरेटर रखने पड़ रहे हैं।- छोटू त्रिपाठी किसान डोगरा खुर्द
अघोषित कटौती व लो वोल्टेज से किसान जूझ रहे हैं। हजारों रुपये खर्च करके विद्युत कनेक्शन लिए थे। डीजल जलाना पड़ रहा है। लिए कनेक्शनों का कोई सहारा नहीं मिल रहा है।- मनोज कुमार दुबे किसान।
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विद्युत कनेक्शन के बाद भी जनरेटर किराए पर लेेना पड़ रहा है, ऐसे में किसानों को दोगुना नुकसान उठाना पड़ रहा है। अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है।- हरीराम दुबे