{"_id":"661839660de6c7eb140bf284","slug":"durga-mata-the-great-goddess-of-pali-is-the-great-river-of-grace-lalitpur-news-c-131-1-ltp1002-113140-2024-04-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lalitpur News: कृपा की महासिंधु हैं पाली की बड़ी भवानी दुर्गा माता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lalitpur News: कृपा की महासिंधु हैं पाली की बड़ी भवानी दुर्गा माता
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
पाली-ललितपुर। नीलकंठेश्वर की नगरी विंध्यांचल की सुरम्य वादियों में विराजित बड़ी भवानी माता मंदिर है। यहां शक्ति की देवी मां दुर्गा, मां लक्ष्मी, देवी संतोषी के साथ विराजित होकर सच्चे मन से आने वाले हर वक्त की मुराद पूरी करती हैं। यहां चमत्कार के जो प्रत्यक्षदर्शी बने वे मातारानी की महिमा के सामने नतमस्तक नजर आए। मंदिर जाने के लिए तीन पक्के रास्ते हैं। श्रद्धालु नीलकंठेश्वर मार्ग से जुड़े रास्ते से पैदल या छोटे-बड़े वाहन से आसानी से पहुंच सकते हैं।
यहां स्थापित दुर्गा मूर्ति का इतिहास बड़ा पुराना है, जिसे लोग पीढ़ी-दर सुनते आ रहे हैं। पहले खुले आसमान के नीचे मूर्ति स्थापित थी। मंदिर के बाहर एक चट्टान है, जिसमें मूर्ति की नक्कासी उकरी है। इसे लोग भैरोनाथ के रूप में पूजते हैं। जिसकी भी यहां मनोकामना पूर्ण हुई, उसने यहां सुंदरीकरण कराने शुरू कर दिए। मंदिर के गर्भगृह में बाईं तरफ सबसे पहले प्राचीन दुर्गा मूर्ति स्थापित है। इसके बाद छोटी दुर्गा मूर्ति है। कुछ साल पूर्व यहां माता लक्ष्मी के साथ माता संतोषी की मूर्ति स्थापित की गई। मनोरथ पूरा होने पर श्रद्धालु मातारानी के दरबार में जरूर आते हैं।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
....जब भंडारे से खत्म ही नहीं हो रहा था भोजन
कहा जाता है कि बड़ी भवानी माता मंदिर में करीब चालीस वर्ष पहले एक यज्ञ आयोजित किया गया था। यहां भंडारा आयोजित हुआ, जिसमें कन्या भोज के साथ नगर एवं आसपास के गांवों के लोगों का भोज रखा गया था। भंडारा एक दिन के आमंत्रित लोगों के हिसाब से तैयार किया गया था, लेकिन मातारानी की महिमा ऐसी हुई कि भंडारे से भोजन कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था। भंडारा चार दिन बराबर चलता रहा। लोग इस महिमा को देख बड़े आनंदित हो रहे थे। यज्ञाचार्य एवं ग्रामीणों ने माता रानी के सामने अनुनय विनय की तब जाकर पांचवें दिन लोगों के भरपेट भोजन के बाद भंडारा खाली हुआ। जिसने भी मातारानी की इस महिमा को देखा, वे सब नतमस्तक हो गए।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- --
बारिश की अर्जी को कभी खाली नहीं जाने दिया
एक और मान्यता है कि जब भी इंद्रदेव रूठे, आस्थावानों की टोली गाजे-बाजे के साथ बड़ी भवानी माता मंदिर में बारिश की अर्जी लगाती है। बरसात भी शुरू होने लगती है। कम बारिश होने पर अब भी महिलाएं गणमान्य लोगों को आस्था की हथकड़ी में बांध नगर भ्रमण कराती हैं, फिर भवानी माता मंदिर में उनको हथकड़ी से मुक्त करती हैं। इस यात्रा में सैकड़ों की संख्या में आज भी महिलाएं शामिल होती हैं।
-- -- -- -- -- -- -- -- -
डाकू भी आते थे आशीर्वाद लेने
कभी बुंदेलखंड के डाकू भी वारदात को अंजाम देने से पहले बड़ी भवानी का आशीर्वाद लेने आते थे। बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि दस्यु गिरोह के पूजा बब्बा, माधौसिंह, मोहर सिंह, मलखान सिंह के अलावा कई डाकुओं ने इस मंदिर में देवी के समक्ष कठिन साधना कर सिद्धियां प्राप्त कीं।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
20 बरस से बड़ी भवानी माता मंदिर में पूजा कर रहे हैं। यहां मातारानी की अलग ही महिमा और चमत्कारिक दर्शन है। मंदिर में नवरात्र पर फुलवारी 64 खप्पर जवारे बोए जाते हैं।-रामकमल दास, पुजारी।
विज्ञापन
पाली-ललितपुर। नीलकंठेश्वर की नगरी विंध्यांचल की सुरम्य वादियों में विराजित बड़ी भवानी माता मंदिर है। यहां शक्ति की देवी मां दुर्गा, मां लक्ष्मी, देवी संतोषी के साथ विराजित होकर सच्चे मन से आने वाले हर वक्त की मुराद पूरी करती हैं। यहां चमत्कार के जो प्रत्यक्षदर्शी बने वे मातारानी की महिमा के सामने नतमस्तक नजर आए। मंदिर जाने के लिए तीन पक्के रास्ते हैं। श्रद्धालु नीलकंठेश्वर मार्ग से जुड़े रास्ते से पैदल या छोटे-बड़े वाहन से आसानी से पहुंच सकते हैं।
यहां स्थापित दुर्गा मूर्ति का इतिहास बड़ा पुराना है, जिसे लोग पीढ़ी-दर सुनते आ रहे हैं। पहले खुले आसमान के नीचे मूर्ति स्थापित थी। मंदिर के बाहर एक चट्टान है, जिसमें मूर्ति की नक्कासी उकरी है। इसे लोग भैरोनाथ के रूप में पूजते हैं। जिसकी भी यहां मनोकामना पूर्ण हुई, उसने यहां सुंदरीकरण कराने शुरू कर दिए। मंदिर के गर्भगृह में बाईं तरफ सबसे पहले प्राचीन दुर्गा मूर्ति स्थापित है। इसके बाद छोटी दुर्गा मूर्ति है। कुछ साल पूर्व यहां माता लक्ष्मी के साथ माता संतोषी की मूर्ति स्थापित की गई। मनोरथ पूरा होने पर श्रद्धालु मातारानी के दरबार में जरूर आते हैं।
विज्ञापन
....जब भंडारे से खत्म ही नहीं हो रहा था भोजन
कहा जाता है कि बड़ी भवानी माता मंदिर में करीब चालीस वर्ष पहले एक यज्ञ आयोजित किया गया था। यहां भंडारा आयोजित हुआ, जिसमें कन्या भोज के साथ नगर एवं आसपास के गांवों के लोगों का भोज रखा गया था। भंडारा एक दिन के आमंत्रित लोगों के हिसाब से तैयार किया गया था, लेकिन मातारानी की महिमा ऐसी हुई कि भंडारे से भोजन कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था। भंडारा चार दिन बराबर चलता रहा। लोग इस महिमा को देख बड़े आनंदित हो रहे थे। यज्ञाचार्य एवं ग्रामीणों ने माता रानी के सामने अनुनय विनय की तब जाकर पांचवें दिन लोगों के भरपेट भोजन के बाद भंडारा खाली हुआ। जिसने भी मातारानी की इस महिमा को देखा, वे सब नतमस्तक हो गए।
विज्ञापन
बारिश की अर्जी को कभी खाली नहीं जाने दिया
एक और मान्यता है कि जब भी इंद्रदेव रूठे, आस्थावानों की टोली गाजे-बाजे के साथ बड़ी भवानी माता मंदिर में बारिश की अर्जी लगाती है। बरसात भी शुरू होने लगती है। कम बारिश होने पर अब भी महिलाएं गणमान्य लोगों को आस्था की हथकड़ी में बांध नगर भ्रमण कराती हैं, फिर भवानी माता मंदिर में उनको हथकड़ी से मुक्त करती हैं। इस यात्रा में सैकड़ों की संख्या में आज भी महिलाएं शामिल होती हैं।
डाकू भी आते थे आशीर्वाद लेने
कभी बुंदेलखंड के डाकू भी वारदात को अंजाम देने से पहले बड़ी भवानी का आशीर्वाद लेने आते थे। बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि दस्यु गिरोह के पूजा बब्बा, माधौसिंह, मोहर सिंह, मलखान सिंह के अलावा कई डाकुओं ने इस मंदिर में देवी के समक्ष कठिन साधना कर सिद्धियां प्राप्त कीं।
20 बरस से बड़ी भवानी माता मंदिर में पूजा कर रहे हैं। यहां मातारानी की अलग ही महिमा और चमत्कारिक दर्शन है। मंदिर में नवरात्र पर फुलवारी 64 खप्पर जवारे बोए जाते हैं।-रामकमल दास, पुजारी।