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मंडलायुक्त ने पकड़ी निर्माण में घटिया सामग्री
ब्यूरो
Updated Mon, 28 Dec 2015 12:57 AM IST
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ललितपुर। मंडलायुक्त ने तहसील का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर नाराजगी जाहिर करते हुए गुणवत्तापरक कार्य कराने के निर्देश दिए। निरीक्षण के समय खतौनी नकल में ज्यादा पैसे लेने की स्वीकारोक्ति चर्चा का विषय बनी रही।
मंडलायुक्त के. राम मोहन राव ने नवनिर्मित तहसील में सबसे पहले चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को परखा। इस दौरान उन्होंने हवालात का निरीक्षण किया। हवालात की लंबाई-चौड़ाई की फीते से नपाई कराई। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए। इसके बाद परिसर में पार्क निर्माण का कार्य देखा। कार्यदायी संस्था पैकफेड अधिकारियों से ईंट की गुणवत्ता जांचने के निर्देश दिए।
मौके पर कराई गई जांच र्में इंट की गुणवत्ता खराब निकली। इसपर उन्होंने ईंटों को बदलवाने के निर्देश दिए। समीप में रखी गिट्टी को भी रिजेक्ट कर दिया। इस्तेमाल की जा रही सीमेंट व बालू के अनुपात की जानकारी ली। उन्होंने पैकफेड अधिकारियों को अच्छी गुणवत्ता की ईंटें, गिट्टी व अन्य निर्माण सामग्री लगाने को कहा। साथ ही उप जिलाधिकारी रमेश चंद्र को निर्माण की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए निर्देशित किया।
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इसी परिसर में होमगार्ड भवन को देखा। इस भवन पर राजस्व निरीक्षक कार्यालय लिखा था, जिसपर उन्होंने आपत्ति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि होमगार्ड के लिए भवन बना है, उन्हें ही इस्तेमाल करने दिया जाए। तहसीलदार अवधेेश निगम ने राजस्व निरीक्षकों के लिए भवन की कमी बताई। उन्होंने तहसील की नवनिर्मित कैंटीन के भवन को देखा, जिसकी गुणवत्ता पर भी उन्होंने सवाल उठाए।
मंडलायुक्त तहसील के मुख्य भवन में पहुंचे, जहां पर उन्होंने खतौनी जारी करने की ऑॅनलाइन प्रक्रिया को जाना। उस समय अजीबोगरीब स्थिति बन गई, जब मंडलायुक्त ने खतौनी जारी करने के पैसे पूछ लिए। इस पर कर्मचारी 15 रुपए लेने की बात करने लगे। मंडलायुक्त ने सही-सही बताने को कहा। एक प्रशासनिक अफसर तपाक से बोले पंद्रह रुपए कहा जाता है, लेकिन बीस रुपए लिए जाते हैं। यह सुनते ही कुछ पल के लिए सन्नाटा पसर गया। मंडलायुक्त ने इसे अनसुना करते हुए मीडियाकर्मियों से दूरियां बना ली, जो चर्चा का विषय बना रहा।
मंडलायुक्त ने तहसील के विभिन्न राजस्व अभिलेखों का निरीक्षण किया और मौके पर उपस्थित तहसीलदार, कानूनगो एवं अन्य कर्मचारियों को अभिलेखों का भली-भांति रखरखाव किए जाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के समय जिलाधिकारी डॉ. रूपेश कुमार, पुलिस अधीक्षक बालेंदु भूषण सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सत्येंद्र कुमार, अपर जिलाधिकारी मिथलेश कुमार त्रिवेदी, अपर पुलिस अधीक्षक सुधा सिंह आदि उपस्थित रहे।
वाह रे! सरकारी तंत्र
एक ओर जिले में सूखा पड़ने से अन्नदाता रोजी-रोटी के संकट में है और सरकारी मदद मिलने की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। वहीं, दूसरी ओर तहसील में खतौनी और नकल जारी करने की आड़ में निर्धारित से ज्यादा राशि ली जा रही है। कर्ज में डूबे किसानों से अतिरिक्त पैसा लेने पर उनका दिल भी नहीं पसीज रहा है। आज के घटनाक्रम ने अधिकारियों के कामकाज को भी सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है।
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मंडलायुक्त के. राम मोहन राव ने नवनिर्मित तहसील में सबसे पहले चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को परखा। इस दौरान उन्होंने हवालात का निरीक्षण किया। हवालात की लंबाई-चौड़ाई की फीते से नपाई कराई। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए। इसके बाद परिसर में पार्क निर्माण का कार्य देखा। कार्यदायी संस्था पैकफेड अधिकारियों से ईंट की गुणवत्ता जांचने के निर्देश दिए।
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मौके पर कराई गई जांच र्में इंट की गुणवत्ता खराब निकली। इसपर उन्होंने ईंटों को बदलवाने के निर्देश दिए। समीप में रखी गिट्टी को भी रिजेक्ट कर दिया। इस्तेमाल की जा रही सीमेंट व बालू के अनुपात की जानकारी ली। उन्होंने पैकफेड अधिकारियों को अच्छी गुणवत्ता की ईंटें, गिट्टी व अन्य निर्माण सामग्री लगाने को कहा। साथ ही उप जिलाधिकारी रमेश चंद्र को निर्माण की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए निर्देशित किया।
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इसी परिसर में होमगार्ड भवन को देखा। इस भवन पर राजस्व निरीक्षक कार्यालय लिखा था, जिसपर उन्होंने आपत्ति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि होमगार्ड के लिए भवन बना है, उन्हें ही इस्तेमाल करने दिया जाए। तहसीलदार अवधेेश निगम ने राजस्व निरीक्षकों के लिए भवन की कमी बताई। उन्होंने तहसील की नवनिर्मित कैंटीन के भवन को देखा, जिसकी गुणवत्ता पर भी उन्होंने सवाल उठाए।
मंडलायुक्त तहसील के मुख्य भवन में पहुंचे, जहां पर उन्होंने खतौनी जारी करने की ऑॅनलाइन प्रक्रिया को जाना। उस समय अजीबोगरीब स्थिति बन गई, जब मंडलायुक्त ने खतौनी जारी करने के पैसे पूछ लिए। इस पर कर्मचारी 15 रुपए लेने की बात करने लगे। मंडलायुक्त ने सही-सही बताने को कहा। एक प्रशासनिक अफसर तपाक से बोले पंद्रह रुपए कहा जाता है, लेकिन बीस रुपए लिए जाते हैं। यह सुनते ही कुछ पल के लिए सन्नाटा पसर गया। मंडलायुक्त ने इसे अनसुना करते हुए मीडियाकर्मियों से दूरियां बना ली, जो चर्चा का विषय बना रहा।
मंडलायुक्त ने तहसील के विभिन्न राजस्व अभिलेखों का निरीक्षण किया और मौके पर उपस्थित तहसीलदार, कानूनगो एवं अन्य कर्मचारियों को अभिलेखों का भली-भांति रखरखाव किए जाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के समय जिलाधिकारी डॉ. रूपेश कुमार, पुलिस अधीक्षक बालेंदु भूषण सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सत्येंद्र कुमार, अपर जिलाधिकारी मिथलेश कुमार त्रिवेदी, अपर पुलिस अधीक्षक सुधा सिंह आदि उपस्थित रहे।
वाह रे! सरकारी तंत्र
एक ओर जिले में सूखा पड़ने से अन्नदाता रोजी-रोटी के संकट में है और सरकारी मदद मिलने की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। वहीं, दूसरी ओर तहसील में खतौनी और नकल जारी करने की आड़ में निर्धारित से ज्यादा राशि ली जा रही है। कर्ज में डूबे किसानों से अतिरिक्त पैसा लेने पर उनका दिल भी नहीं पसीज रहा है। आज के घटनाक्रम ने अधिकारियों के कामकाज को भी सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है।