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दीपावली आज, दीपों से जगमगाएगा सारा शहर
lalitpur
Updated Wed, 07 Nov 2018 01:39 AM IST
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दीपावली आज
- फोटो : amarujala
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बुधवार को कार्तिक मास की अमावस्या पर दीपावली पर्व शहर में धूमधाम से मनाया जाएगा। ब्रह्मपुराण के अनुसार इस दिन माता लक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ पृथ्वी लोक पर हर घर में जाकर विचरण करतीं है। दीपावली पर घरों में पूजन करने के लिए शाम छह बजे से रात्रि साढ़े आठ बजे तक विशेष मुहूर्त है। हालांकि साधना आराधना के लिए रात्रि में दो बजे तक का भी मुहूर्त है।
धनतेरस से लेकर भाई दूज तक पांच दिवसीय दीपावली का पर्व भारतीय संस्कृति में वैज्ञानिक, दार्शनिक और विशेष धार्मिक महत्व रखता है। ज्योतिषाचार्य डा. ओम प्रकाश शास्त्री ने बताया कि पांच दिवसीय पर्व के प्रथम दिन भगवान धनवंतरि जी की आराधना की जाती है। दीपावली बुधवार को है और दिन सुबह 7:20 से 9:37 तक शुभ स्थिर लग्न में पूजा का मुहूर्त है। जबकि व्यापारिक प्रतिष्ठानों में 1:30 से 3:01 तक शुभ स्थिर लग्न में व्यापारिक पूजा का शुभ मुहूर्त बताया गया है। व्यापारिक प्रतिष्ठानों में सभी प्रतिष्ठानों के स्वामी 1:30 से 3:01 तक भगवती महालक्ष्मी भगवान कुबेर आदि का पूजन व हवन संपन्न करें। सायंकाल छह बजे से रात्रि आठ बजे तक सभी लोग अपने आवासों में शुभ मुहूर्त बताया गया है। इसके बाद ही बुधवार को ही रात्रि कालीन बेला में जो भगवती महालक्ष्मी की विशेष आराधना करना चाहते हैं वे रात के 12:00 से 2:00 के मध्य स्थिर लग्न में भगवती महालक्ष्मी की विशेष आराधना संपन्न करें। इस प्रकार यह स्थिर लग्न के शुभ मुहूर्त इस वर्ष दीपावली पूजन के लिए श्रेष्ठ माना गया है। दीपावली के दिन घरों में शुभ मुहूर्त में पूजन के लिए मिट्टी की ग्वालिन, लक्ष्मी, कुबेर, और श्रीगणेश पूजन का विशेष महत्व होता है। बुंदेलखंड में इस दिन लक्ष्मीपूजन के दौरान विभिन्न मिठाई, पकवानों के साथ मां लक्ष्मी को भोग लगाया जाता है। मिट्टी के बर्तनों में खीला, बताशा एवं मिठाई रखी जाती है। मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी के पूजन के लिए 16 दीपक और दो मलिया प्रज्जवलित कर पूजन का रिवाज है। मिट्टी की ग्वालिन प्रतिमा पर बने आठ या सौलह दीपक भी बने होते हैं। जिन्हें घी की बत्ती लगाकर प्रज्जवलित किया जाता है।
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धनतेरस से लेकर भाई दूज तक पांच दिवसीय दीपावली का पर्व भारतीय संस्कृति में वैज्ञानिक, दार्शनिक और विशेष धार्मिक महत्व रखता है। ज्योतिषाचार्य डा. ओम प्रकाश शास्त्री ने बताया कि पांच दिवसीय पर्व के प्रथम दिन भगवान धनवंतरि जी की आराधना की जाती है। दीपावली बुधवार को है और दिन सुबह 7:20 से 9:37 तक शुभ स्थिर लग्न में पूजा का मुहूर्त है। जबकि व्यापारिक प्रतिष्ठानों में 1:30 से 3:01 तक शुभ स्थिर लग्न में व्यापारिक पूजा का शुभ मुहूर्त बताया गया है। व्यापारिक प्रतिष्ठानों में सभी प्रतिष्ठानों के स्वामी 1:30 से 3:01 तक भगवती महालक्ष्मी भगवान कुबेर आदि का पूजन व हवन संपन्न करें। सायंकाल छह बजे से रात्रि आठ बजे तक सभी लोग अपने आवासों में शुभ मुहूर्त बताया गया है। इसके बाद ही बुधवार को ही रात्रि कालीन बेला में जो भगवती महालक्ष्मी की विशेष आराधना करना चाहते हैं वे रात के 12:00 से 2:00 के मध्य स्थिर लग्न में भगवती महालक्ष्मी की विशेष आराधना संपन्न करें। इस प्रकार यह स्थिर लग्न के शुभ मुहूर्त इस वर्ष दीपावली पूजन के लिए श्रेष्ठ माना गया है। दीपावली के दिन घरों में शुभ मुहूर्त में पूजन के लिए मिट्टी की ग्वालिन, लक्ष्मी, कुबेर, और श्रीगणेश पूजन का विशेष महत्व होता है। बुंदेलखंड में इस दिन लक्ष्मीपूजन के दौरान विभिन्न मिठाई, पकवानों के साथ मां लक्ष्मी को भोग लगाया जाता है। मिट्टी के बर्तनों में खीला, बताशा एवं मिठाई रखी जाती है। मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी के पूजन के लिए 16 दीपक और दो मलिया प्रज्जवलित कर पूजन का रिवाज है। मिट्टी की ग्वालिन प्रतिमा पर बने आठ या सौलह दीपक भी बने होते हैं। जिन्हें घी की बत्ती लगाकर प्रज्जवलित किया जाता है।
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