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Lalitpur News: ढाई वर्ष बाद भी सही नहीं हो सकी डिजिटल एक्स-रे मशीन
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग में चिकित्सक भले ही पर्याप्त हों, लेकिन मरीजों को परेशानी से जूझना पड़ रहा है। कारण, परामर्श तो मिल रहा, लेकिन जांच के लिए उन्हें बाहर जाना पड़ रहा है। यहां डिजिटल एक्स-रे मशीन ढाई वर्ष से खराब पड़ी है। ओपीडी में आने वाले लगभग 120 मरीजों में 50 से 60 मरीज निजी सेंटरों पर जांच करा रहे हैं। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) को जुलाई 2024 में एनएमसी की टीम ने मानकों की जांच के बाद मान्यता दे दी थी। हड्डी रोग विभाग में दो सह आचार्य, दो सहायक आचार्य, दो विशेषज्ञ चिकित्सक, एक एसआर और एक चिकित्साधिकारी तैनात हैं। इसकी तीन ओपीडी में प्रतिदिन करीब 150 मरीज आते हैं।
इनमें चिकित्सक 120 मरीजों को एक्स-रे कराने का परामर्श दे रहे हैं। लेकिन, मेडिकल कॉलेज में एक्स-रे मशीन खराब होने से मरीजों को दिक्कत हो रही है। ऐसे में 120 मरीजों में 50 से 60 तो मेडिकल में पुरानी मशीन से जांच करा रहे हैं।
पुरानी मशीनों में हल्का फ्रैक्चर नजर न आने से दिक्कत हो रही है। प्रतिदिन 50 से 60 मरीजों को बाहर जांच के लिए जाना पड़ रहा है। जहां उन्हें 400 से 500 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। कई निर्धन मरीज बिना जांच के ही वापस हो रहे हैं।
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अकेले मरीजों को ज्यादा दिक्कत : मेडिकल कॉलेज में आने वाले कई मरीज फ्रैक्चर होने पर जांच के लिए स्ट्रेचर के सहारे जाने को मजबूर हैं।
कई मरीज अकेले होते हैं, उन्हें जांच कराने में दिक्कत होती है। तीमारदार कम होने पर भी स्ट्रेचर खींचने में दिक्कत आती है। न
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ललितपुर। मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग में चिकित्सक भले ही पर्याप्त हों, लेकिन मरीजों को परेशानी से जूझना पड़ रहा है। कारण, परामर्श तो मिल रहा, लेकिन जांच के लिए उन्हें बाहर जाना पड़ रहा है। यहां डिजिटल एक्स-रे मशीन ढाई वर्ष से खराब पड़ी है। ओपीडी में आने वाले लगभग 120 मरीजों में 50 से 60 मरीज निजी सेंटरों पर जांच करा रहे हैं। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) को जुलाई 2024 में एनएमसी की टीम ने मानकों की जांच के बाद मान्यता दे दी थी। हड्डी रोग विभाग में दो सह आचार्य, दो सहायक आचार्य, दो विशेषज्ञ चिकित्सक, एक एसआर और एक चिकित्साधिकारी तैनात हैं। इसकी तीन ओपीडी में प्रतिदिन करीब 150 मरीज आते हैं।
इनमें चिकित्सक 120 मरीजों को एक्स-रे कराने का परामर्श दे रहे हैं। लेकिन, मेडिकल कॉलेज में एक्स-रे मशीन खराब होने से मरीजों को दिक्कत हो रही है। ऐसे में 120 मरीजों में 50 से 60 तो मेडिकल में पुरानी मशीन से जांच करा रहे हैं।
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पुरानी मशीनों में हल्का फ्रैक्चर नजर न आने से दिक्कत हो रही है। प्रतिदिन 50 से 60 मरीजों को बाहर जांच के लिए जाना पड़ रहा है। जहां उन्हें 400 से 500 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। कई निर्धन मरीज बिना जांच के ही वापस हो रहे हैं।
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अकेले मरीजों को ज्यादा दिक्कत : मेडिकल कॉलेज में आने वाले कई मरीज फ्रैक्चर होने पर जांच के लिए स्ट्रेचर के सहारे जाने को मजबूर हैं।
कई मरीज अकेले होते हैं, उन्हें जांच कराने में दिक्कत होती है। तीमारदार कम होने पर भी स्ट्रेचर खींचने में दिक्कत आती है। न