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मतदान बहिष्कार ने विकास की खोली पोल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 27 Feb 2017 12:20 AM IST
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- फोटो : demo
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विधानसभा चुनाव के चौथे चरण में महरौनी विधानसभा क्षेत्र के आधा दर्जन गांव के लोगों ने मतदान का बहिष्कार कर केंद्र व राज्य सरकारों के विकास कार्यों के दावों की हवा निकाल दी है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के छह दशक बाद भी उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। इस मामले में जनप्रतिनिधियों और अफसरों को जवाब देते नहीं बन रहा है।
प्रदेश के विधानसभा चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दल कई मुद्दों पर चुनाव लड़ रहे हैं। समाजवादी पार्टी काम बोलता है, के नारे को लेकर पांच साल की उपलब्धियां चुनाव में गिना रही है। वहीं, बीजेपी के नेता केंद्र सरकार की हितकारी योजनाओं को रख रहे हैं। भाजपा व सपा जोरशोर से विकास के मुद्दों को हवा दे रही है। चौथे चरण में ललितपुर जिले की ललितपुर व महरौनी विधानसभा क्षेत्र के लिए मतदान हुआ। इस दौरान महरौनी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम बमराना, गदनपुर, सक्तू, बारचौन, बुदनी, बरखेड़ा, धौलपुरा, पारौल के लोगों ने हवा निकालकर रख दी है। दिलचस्प बात यह है कि इन गांवों के लोग छह महीने से अपनी समस्याओं को अफसरों व जनप्रतिनिधियों के समक्ष रख रहे थे। इसके बाद भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया। मजबूरन, ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार का निर्णय लेना पड़ा।
उनका कहना है कि बरखेरा नदी पर पुल नहीं बनने से निकलना दूभर हो गया है। वहीं, डोंगराखुर्द से दिदौनिया तक सड़क का निर्माण नहीं कराया गया है। इसके अलावा पांडव वन को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की मांग कर रहे थे। इसे सभी से नजरअंदाज कर दिया। जब मतदान के दिन ग्रामीण वोट डालने नहीं पहुंचे तो अफसरों व उम्मीदवारों के हाथपैर फूल गए और रूठे ग्रामीणों को मनाने के लिए मौके पर पहुंच गए। इस दौरान ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे अफसरों को खूब खरी खोटी सुनाई। हालांकि ग्राम बुदनी व धौलपुरा के ग्रामीण अफसरों के समझाने पर मान गए और मतदान में शामिल हो गए। लेकिन, अन्य चार गांव अपनी मांग पर डटे रहे। जिससे कई उम्मीदवारों के जीत का गणित बिगड़ गया है।
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प्रचार में नेताओं ने नहीं दी तरजीह
महरौनी विधानसभा क्षेत्र के चुनाव प्रचार में बसपा महासचिव सतीश मिश्रा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य, केंद्रीय मंत्री उमा भारती व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर, महान दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशवदेव मौर्य पहुंचे। लेकिन, ग्रामीणों के मतदान बहिष्कार को गंभीरता से नहीं लिया।
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प्रदेश के विधानसभा चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दल कई मुद्दों पर चुनाव लड़ रहे हैं। समाजवादी पार्टी काम बोलता है, के नारे को लेकर पांच साल की उपलब्धियां चुनाव में गिना रही है। वहीं, बीजेपी के नेता केंद्र सरकार की हितकारी योजनाओं को रख रहे हैं। भाजपा व सपा जोरशोर से विकास के मुद्दों को हवा दे रही है। चौथे चरण में ललितपुर जिले की ललितपुर व महरौनी विधानसभा क्षेत्र के लिए मतदान हुआ। इस दौरान महरौनी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम बमराना, गदनपुर, सक्तू, बारचौन, बुदनी, बरखेड़ा, धौलपुरा, पारौल के लोगों ने हवा निकालकर रख दी है। दिलचस्प बात यह है कि इन गांवों के लोग छह महीने से अपनी समस्याओं को अफसरों व जनप्रतिनिधियों के समक्ष रख रहे थे। इसके बाद भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया। मजबूरन, ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार का निर्णय लेना पड़ा।
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उनका कहना है कि बरखेरा नदी पर पुल नहीं बनने से निकलना दूभर हो गया है। वहीं, डोंगराखुर्द से दिदौनिया तक सड़क का निर्माण नहीं कराया गया है। इसके अलावा पांडव वन को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की मांग कर रहे थे। इसे सभी से नजरअंदाज कर दिया। जब मतदान के दिन ग्रामीण वोट डालने नहीं पहुंचे तो अफसरों व उम्मीदवारों के हाथपैर फूल गए और रूठे ग्रामीणों को मनाने के लिए मौके पर पहुंच गए। इस दौरान ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे अफसरों को खूब खरी खोटी सुनाई। हालांकि ग्राम बुदनी व धौलपुरा के ग्रामीण अफसरों के समझाने पर मान गए और मतदान में शामिल हो गए। लेकिन, अन्य चार गांव अपनी मांग पर डटे रहे। जिससे कई उम्मीदवारों के जीत का गणित बिगड़ गया है।
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प्रचार में नेताओं ने नहीं दी तरजीह
महरौनी विधानसभा क्षेत्र के चुनाव प्रचार में बसपा महासचिव सतीश मिश्रा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य, केंद्रीय मंत्री उमा भारती व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर, महान दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशवदेव मौर्य पहुंचे। लेकिन, ग्रामीणों के मतदान बहिष्कार को गंभीरता से नहीं लिया।