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माही सेक्स रैकेट कांड की पुन: विवेचना की मांग, सुनवाई आज
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। सात वर्ष पूर्व सामूहिक दुष्कर्म व सैक्स रैकेट कांड में सभी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। जिसमें न्यायालय ने सजा सुनाते हुए, पुलिस को पुन: विवेचना के आदेश जारी किए थे। क्योंकि पुलिस पीड़िता व सैक्स रैकेट संचालिका का मोबाइल जब्त किया था, लेकिन उसकी कॉल डिटेल न्यायालय में प्रस्तुत नहीं थी। न्यायालय ने पुन: विवेचना कर अन्य आरोपियों को प्रकाश में लाने के निर्देश दिए थे।
अब अधिवक्ता निधि सिंह ने न्यायालय में याचिका देकर पुलिस से पुन: विवेचना कर आरोपपत्र दाखिल करने की अपील की है। इस प्रार्थनापत्र को स्वीकार करते हुए, न्यायालय ने इस प्रकरण में 7 सितंबर की तारीख दी है।
अधिवक्ता निधि सिंह ने न्यायालय में दायर याचिका में बताया कि सात वर्ष पूर्व शहर में पुलिस एक सेक्स रैकिट का खुलासा किया था। इसमें सरगना माही सहित कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। इसमें 31 जनवरी 2021 को सजा सुनाई गई थी, जिसमें राज चौहान, आलोक द्विवेदी, आमिर पठान, हरेंद्र सिंह बुंदेला, कल्यान, संचालिका माही उर्फ छाया परमार व देवेंद्र कुमार शुक्ला को दोषी बताया था।
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साथ ही आदेश में यह स्पष्ट किया था, कि पुलिस पूरे प्रकरण की फिर से विवेचना करे। क्योंकि पुलिस ने पीड़िता व सरगना माही के मोबाइल तो जब्त किए थे, लेकिन उनकी कॉल डिटेल न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की थी। न्यायालय ने उम्मीद जताई थी, कि इस प्रकरण जो आरोपी छूटे हैं, उनके चेहरे उजागर होंगे। न्यायालय के इस आदेश के पांच साल गुजर जाने के बाद भी पुलिस ने विवेचना नहीं की है।
पुलिस ने आदेश से किया था इन्कार
महिला अधिवक्ता निधि सिंह ने सूचना अधिकार के माध्यम से विवेचना के विषय में जानकारी चाही, तो जवाब में पुलिस ने न्यायालय के ऐसे किसी भी आदेश से इन्कार कर दिया था। जबकि न्यायालय ने सजा आदेश के पैरा क्रमांक 72 में इसका उल्लेख किया था।
सफेदपोशों के कारण डाला ठंडे बस्ते में
इस प्रकरण में कई सफेदपोश लोगों के नाम प्रकाश में आए थे। जिसके बाद सिफारिशों को दौर चला था। इसके बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
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ललितपुर। सात वर्ष पूर्व सामूहिक दुष्कर्म व सैक्स रैकेट कांड में सभी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। जिसमें न्यायालय ने सजा सुनाते हुए, पुलिस को पुन: विवेचना के आदेश जारी किए थे। क्योंकि पुलिस पीड़िता व सैक्स रैकेट संचालिका का मोबाइल जब्त किया था, लेकिन उसकी कॉल डिटेल न्यायालय में प्रस्तुत नहीं थी। न्यायालय ने पुन: विवेचना कर अन्य आरोपियों को प्रकाश में लाने के निर्देश दिए थे।
अब अधिवक्ता निधि सिंह ने न्यायालय में याचिका देकर पुलिस से पुन: विवेचना कर आरोपपत्र दाखिल करने की अपील की है। इस प्रार्थनापत्र को स्वीकार करते हुए, न्यायालय ने इस प्रकरण में 7 सितंबर की तारीख दी है।
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अधिवक्ता निधि सिंह ने न्यायालय में दायर याचिका में बताया कि सात वर्ष पूर्व शहर में पुलिस एक सेक्स रैकिट का खुलासा किया था। इसमें सरगना माही सहित कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। इसमें 31 जनवरी 2021 को सजा सुनाई गई थी, जिसमें राज चौहान, आलोक द्विवेदी, आमिर पठान, हरेंद्र सिंह बुंदेला, कल्यान, संचालिका माही उर्फ छाया परमार व देवेंद्र कुमार शुक्ला को दोषी बताया था।
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साथ ही आदेश में यह स्पष्ट किया था, कि पुलिस पूरे प्रकरण की फिर से विवेचना करे। क्योंकि पुलिस ने पीड़िता व सरगना माही के मोबाइल तो जब्त किए थे, लेकिन उनकी कॉल डिटेल न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की थी। न्यायालय ने उम्मीद जताई थी, कि इस प्रकरण जो आरोपी छूटे हैं, उनके चेहरे उजागर होंगे। न्यायालय के इस आदेश के पांच साल गुजर जाने के बाद भी पुलिस ने विवेचना नहीं की है।
पुलिस ने आदेश से किया था इन्कार
महिला अधिवक्ता निधि सिंह ने सूचना अधिकार के माध्यम से विवेचना के विषय में जानकारी चाही, तो जवाब में पुलिस ने न्यायालय के ऐसे किसी भी आदेश से इन्कार कर दिया था। जबकि न्यायालय ने सजा आदेश के पैरा क्रमांक 72 में इसका उल्लेख किया था।
सफेदपोशों के कारण डाला ठंडे बस्ते में
इस प्रकरण में कई सफेदपोश लोगों के नाम प्रकाश में आए थे। जिसके बाद सिफारिशों को दौर चला था। इसके बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।