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मनरेगा में नहीं हो सकेगा फर्जीवाड़ा
Lalitpur
Updated Thu, 07 Dec 2017 02:02 AM IST
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- फोटो : demo
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मनरेगा के कामों में अब फर्जीवाड़ा नहीं हो सकेगा। भारत सरकार ने पारदर्शी कामकाज को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें रजिस्टरों की संख्या बाइस से घटाकर सात कर दी है तो कार्यस्थल के फोटो अपलोड करने की अनिवार्यता कर दी है। इससे धरातल पर काम दिखाई देने की उम्मीद बंध गई है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पंजीकृत कार्ड धारकों को स्थानीय स्तर पर सौ दिन का रोजगार प्रदान किया जाता है, लेकिन मनमानी के चलते तमाम कार्डधारकों को नियमित रोजगार नहीं मिल पाता है। वहीं, काम में फर्जीवाड़े की शिकायतें भी आती रहती हैं। भारत सरकार ने इससे निपटने के लिए योजना में पारदर्शी कामकाज को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। न केवल फर्जी जॉबकार्डों का चिह्नींकरण किया जा रहा है, बल्कि कार्यस्थल की फोटो की अनिवार्यता भी कर दी है। अब मस्टररोल जारी होते ही कार्यस्थल की फोटो वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। दूसरी फोटो साठ प्रतिशत काम पूरा होने के पहले और उसके बाद काम पूरा होने के उपरांत वेबसाइट पर फोटो अपलोड करने का नियम बनाया है। इसी आधार पर भुगतान की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके अलावा रजिस्टरों की संख्या में भी कटौती कर दी गई है। अब जाबकार्ड रजिस्टर, ग्राम सभा का आडिट रजिस्टर, रोजगार रजिस्टर, कार्य रजिस्टर, परिसंपत्ति रजिस्टर, शिकायत रजिस्टर एवं मटेरियल रजिस्टर ही तैयार करने होंगे। इससे पहले बाइस रजिस्टर बनवाए जाते थे। इससे कामकाज में सुधार आने की संभावना जताई जा रही है।
हर महीने लगेगा रोजगार दिवस
अब प्रत्येक ग्राम सभा में हर महीने रोजगार दिवस आयोजित किया जाएगा। इसमें काम की मांग व जाबकार्ड बनाने का कार्य होगा।
पत्थर के होंगे साइन बोर्ड
अब लोहे की जगह पत्थर के साइन बोर्ड कार्यस्थल पर लगाए जाएंगे। आमतौर पर देखा गया है कि लोहे के साइन बोर्ड कार्यस्थल से उखाड़ दिए जाते थे। इससे कार्यस्थल पर कार्य को लेकर संशय बना रहता था।
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मनरेगा कर्मी किए जा रहे प्रशिक्षित
भारत सरकार ने जो योजना में बदलाव किए हैं, उसके संबंध में तकनीकी सहायक, ग्राम विकास अधिकारी व रोजगार सेवकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
मानीटरिंग टीम करेगी निरीक्षण
मनरेगा में सात प्रकार के रजिस्टर बनवाए जा रहे हैं। वहीं, रिकार्ड भी दुरुस्त किया जा रहा है। भारत सरकार की मानीटरिंग टीम जल्द ही इसका अवलोकन करने के लिए जिले में आएगी।
जय सिंह
उपायुुक्त श्रम रोजगार
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महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पंजीकृत कार्ड धारकों को स्थानीय स्तर पर सौ दिन का रोजगार प्रदान किया जाता है, लेकिन मनमानी के चलते तमाम कार्डधारकों को नियमित रोजगार नहीं मिल पाता है। वहीं, काम में फर्जीवाड़े की शिकायतें भी आती रहती हैं। भारत सरकार ने इससे निपटने के लिए योजना में पारदर्शी कामकाज को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। न केवल फर्जी जॉबकार्डों का चिह्नींकरण किया जा रहा है, बल्कि कार्यस्थल की फोटो की अनिवार्यता भी कर दी है। अब मस्टररोल जारी होते ही कार्यस्थल की फोटो वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। दूसरी फोटो साठ प्रतिशत काम पूरा होने के पहले और उसके बाद काम पूरा होने के उपरांत वेबसाइट पर फोटो अपलोड करने का नियम बनाया है। इसी आधार पर भुगतान की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके अलावा रजिस्टरों की संख्या में भी कटौती कर दी गई है। अब जाबकार्ड रजिस्टर, ग्राम सभा का आडिट रजिस्टर, रोजगार रजिस्टर, कार्य रजिस्टर, परिसंपत्ति रजिस्टर, शिकायत रजिस्टर एवं मटेरियल रजिस्टर ही तैयार करने होंगे। इससे पहले बाइस रजिस्टर बनवाए जाते थे। इससे कामकाज में सुधार आने की संभावना जताई जा रही है।
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हर महीने लगेगा रोजगार दिवस
अब प्रत्येक ग्राम सभा में हर महीने रोजगार दिवस आयोजित किया जाएगा। इसमें काम की मांग व जाबकार्ड बनाने का कार्य होगा।
पत्थर के होंगे साइन बोर्ड
अब लोहे की जगह पत्थर के साइन बोर्ड कार्यस्थल पर लगाए जाएंगे। आमतौर पर देखा गया है कि लोहे के साइन बोर्ड कार्यस्थल से उखाड़ दिए जाते थे। इससे कार्यस्थल पर कार्य को लेकर संशय बना रहता था।
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मनरेगा कर्मी किए जा रहे प्रशिक्षित
भारत सरकार ने जो योजना में बदलाव किए हैं, उसके संबंध में तकनीकी सहायक, ग्राम विकास अधिकारी व रोजगार सेवकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
मानीटरिंग टीम करेगी निरीक्षण
मनरेगा में सात प्रकार के रजिस्टर बनवाए जा रहे हैं। वहीं, रिकार्ड भी दुरुस्त किया जा रहा है। भारत सरकार की मानीटरिंग टीम जल्द ही इसका अवलोकन करने के लिए जिले में आएगी।
जय सिंह
उपायुुक्त श्रम रोजगार