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मुरझाने लगी हैं फसलें, नुकसान की आशंका से किसान परेशान

Sun, 19 Jul 2020 11:21 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jul 2020 11:21 PM IST
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crops destroying, hope for raining
पाली। तहसील पाली और आसपास के किसानों की चिंता बढ़ गई है। पिछले पंद्रह दिन से पानी नहीं बरसने के कारण उनकी खरीफ की फसलें मुरझाने लगी हैं। यदि जल्द ही एक या दो दिन में पानी नहीं बरसेगा, तो किसानों को नुकसान होना तय है। किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका सता रही है।
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इस साल खरीफ सीजन में उड़द, मूंग, सोयाबीन की बुवाई की गई है। पिछली बार हुई अतिवृष्टि के कारण पूरी फसल नष्ट हो गई थी। इस कारण मानसून समय पर आने से किसानों को अच्छी फसल की उम्मीद थी। पानी बरसने के बाद किसानों ने उड़द, मूंग, मूंगफली, सोयाबीन आदि की बुवाई कर दी है। लेकिन, पिछले पंद्रह दिन से अच्छी बरसात नहीं होने के कारण अब किसानों को फसलों के खराब होने का अंदेशा सता रहा है। कई किसानों द्वारा खेतों में डाला गया बीज नष्ट हो गया है। इस कारण उन्होंने दोबारा बुवाई कर दी है। फसलें लहलहाने लगीं, लेकिन पानी नहीं बरसने के कारण अब किसानों को चिंता सता रही है।
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खेत में खरपतवार बढ़ रहे हैं
खेतों में खरपतवार नष्ट करने के लिए उन्हें कीटनाशक दवा का छिड़काव करना है, लेकिन पानी की कमी के कारण नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण खेत में खरपतवार बढ़ रहे हैं। खरपतवार हटाने के लिए दवा खरीदने के बाद किसान खेतों में डाल नहीं पा रहे हैं, क्योंकि दवा के साथ पानी बहुत जरूरी है। अन्यथा की स्थिति में फसल झुलस जाएगी। तहसील क्षेत्र के करीब 40 हजार किसानों ने उड़द, सोयाबीन आदि फसलों की बुवाई कर दी है, लेकिन पानी नहीं बरसने के कारण वह चिंतित हो रहे हैं।
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बारिश नहीं होने से तेज धूप का प्रकोप है, जिससे कीट पतंगे फसलों के पत्तों को खा रहे हैं और खरपतवार बढ़ रहे हैं। पिछले साल हुई बारिश से फसलें बर्बाद हो गई थीं। इस बार सूखे का अंदेशा मंडरा रहा है।
- मलखान सिंह, ग्राम सिमरधा
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देश में कई जगह बाढ़ की स्थिति बन रही है तो क्षेत्र में पानी नहीं बरस रहा है। यदि सूखा पड़ा तो बहुत हालात बिगड़ जाएंगे। अगर पानी नहीं बरसा तो किसानों के पास कुछ नहीं बचेगा। बहुत परेशानी हो रही।
- प्रवीन यादव, ग्राम राजगढ़
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दस दिन और बारिश नहीं हुई तो खेतों की खड़ी फसलें सूख जाएंगी। पिछले साल की तरह किसानों के हाथ खाली रहेंगे, अब इससे होने वाले नुकसान को किसान सहन नहीं कर पाएगा और टूट जाएगा।

- महिपाल सिंह पटेल, ग्राम सलैया
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दो एकड़ में फसल बोई थी, लेकिन अंकुरित नहीं होने के कारण दोबारा जुताई करनी पड़ी। हमारे जैसे कई किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ी है। अगर पानी नहीं बरसा तो किसानों को बहुत परेशानी हो जाएगी।
- महेश कुशवाहा, पाली
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