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जाली नोट खपाने वाले की कुर्की
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2015 11:29 PM IST
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क्राइम ब्रांच इंचार्ज इंस्पेक्टर जुगेंद्र सिंह ने महरौनी इंस्पेक्टर जितेंद्र सिंह परिहार के साथ पश्चिम बंगाल के जिला मालदा थाना रतुआ ग्राम धनीकुंज बिहारी निवासी रामजीवन उर्फ मुहम्मद मंसूर के लाखों रुपए के गृहस्थी के सामान को जब्त करके कुर्की की कार्रवाई की। इसके पहले उसके खिलाफ गैंगेस्टर और अदालत के आदेशों की अवहेलना के आरोप में मुकदमे दर्ज कराए जा चुके हैं। पुलिस अधीक्षक प्रभाकर चौधरी ने अब उसकी गिरफ्तारी के लिए पुरस्कार घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। क्राइम ब्रांच की पड़ताल में नाम उजागर होने के बाद से रामजीवन उर्फ मुहम्मद मंसूर भूमिगत हो गया था।
मालूम हो कि 11 सितंबर 2014 को महरौनी पुलिस ने सीमावर्ती जिला टीकमगढ़ अंतर्गत ग्राम मोहनगढ़ निवासी मूर्ति, विनीता, गुमनियां, पानकुंवर, केशर एवं फूलवती को पांच-पांच सौ के जाली नोट महरौनी के बाजार में खपाते पकड़ा था। उनके कब्जे से 1,10, 500 रुपए की जाली करेंसी बरामद हुई थी। बाद में मोहनगढ़ निवासी काशीराम नामक ग्रामीण को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। मामले की जांच क्राइम ब्रांच की फाइनेंसियल फ्रॉड यूनिट को दी गई थी। मजदूर महिलाओं से पूछताछ के दौरान पता चला कि जाली नोट उन्हें दिल्ली में काम दिलाने वाले रामजीवन नामक ठेकेदार ने जिले में खपाने के लिए दिए थे। काशीराम की निशानदेही पर बरामद किए गए एलबम से उसका फोटोग्राफ और मोबाइल नंबर का पता चल गया। मोबाइल नंबर की सिम के आधार पर उसके वास्तविक नाम की पुष्टि हो गई। फोटोग्राफ व पते के आधार पर पुलिस टीम आरोपी के घर तक पहुंच गई, लेकिन वह मौजूद नहीं मिला था।
-का पता लगाने के लिए दिल्ली यूनिट को भी सक्रिय किया गया था।
मालूम हो कि 11 सितंबर 2014 को महरौनी पुलिस ने सीमावर्ती जिला टीकमगढ़ अंतर्गत ग्राम मोहनगढ़ निवासी मूर्ति, विनीता, गुमनियां, पानकुंवर, केशर एवं फूलवती को पांच-पांच सौ के जाली नोट महरौनी के बाजार में खपाते पकड़ा था। उनके कब्जे से 1,10, 500 रुपए की जाली करेंसी बरामद हुई थी। बाद में मोहनगढ़ निवासी काशीराम नामक ग्रामीण को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। मामले की जांच क्राइम ब्रांच की फाइनेंसियल फ्रॉड यूनिट को दी गई थी। मजदूर महिलाओं से पूछताछ के दौरान पता चला कि जाली नोट उन्हें दिल्ली में काम दिलाने वाले रामजीवन नामक ठेकेदार ने जिले में खपाने के लिए दिए थे। काशीराम की निशानदेही पर बरामद किए गए एलबम से उसका फोटोग्राफ और मोबाइल नंबर का पता चल गया। मोबाइल नंबर की सिम के आधार पर उसके वास्तविक नाम की पुष्टि हो गई। फोटोग्राफ व पते के आधार पर पुलिस टीम आरोपी के घर तक पहुंच गई, लेकिन वह मौजूद नहीं मिला था।
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-का पता लगाने के लिए दिल्ली यूनिट को भी सक्रिय किया गया था।