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कम उपज देख दो किसानों की सदमे से मौत
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Mar 2016 01:43 AM IST
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farmer deth, lalitpur news
- फोटो : demopic
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चढ़रऊ/ललितपुर। बुंदेलखंड में फसल बर्बादी पर किसानों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बृहस्पतिवार को जब सारा देश रंग-गुलाल के त्योहार में मस्त था, उस समय कम उपज के सदमे में दो किसानों की जान चली गई।
महरौनी तहसील के ग्राम चढरऊ निवासी किसान रमेश पटेल (32) पुत्र रामचरण पटेल बृहस्पतिवार को अपने खेत पर गया था। रमेश के परिवार के पास 18 एकड़ जमीन है। उसने खेत में चार बोरा मटर बोई थी, लेकिन थ्रेसिंग के दौरान केवल दो बोरा मटर निकली तो वह सदमेे में आ गया। देर शाम तक उसके घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने खोजबीन शुरू की। वह खेत में आम के पेड़ के नीचे अचेत अवस्था में मिला। आनन-फानन में परिजन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मृतक के चचेरे भाई जगभान ने बताया कि इस बार कम बारिश व सिंचाई के सीमित संसाधनों के कारण बोए हुए बीज से भी कम उपज होने से रमेश परेशान था। पिछले दिनों ही उसने चने की थ्रेसिंग कराई थी। 80 किलो चना जिस खेत में बोया था, उसमें से केवल 40 किलो चना की उपज हुई। बृहस्पतिवार को ऐसा ही मंजर उसे मटर की थ्रेसिंग के दौरान देखने को मिला। रमेश के ऊपर किसान क्रेडिट कार्ड का तीन लाख रुपये कर्जा है। उसके दो पुत्र हैं।
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वहीं, किसान की बर्बादी का दूसरा मंजर बार थाना क्षेत्र के ग्राम डुलावन का है। ग्राम डुलावन निवासी हरप्रसाद कुशवाहा (38) पुत्र टुडू कुशवाहा बृहस्पतिवार की शाम खेत की रखवाली करने घर से निकला था। सुबह उसके घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने खेत पर जाकर जानकारी की। खेत पर हरप्रसाद मृत अवस्था में मिला। मृतक के भाई फूलचंद्र ने बताया कि हरप्रसाद के ऊपर बैंक का करीब चार लाख रुपये कर्ज था। उसके तीन पुत्रियां व दो पुत्र हैं। बड़ी पुत्री की शादी की आस वह अच्छी फसल होने से लगाए था, लेकिन सिंचाई के साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण उसकी फसल सूख गई थी। इसी सदमे में उसकी मौत हो गई।
किसान ने मेडिकल में दम तोड़ा
झांसी। लहचूरा थानांतर्गत गांव रोरा में रतिराम (50) पुत्र नत्थू ने फसल नष्ट होने पर 18 मार्च को घर में मिट्टी का तेल उड़ेलकर आग लगा ली थी। परिजनों ने चिंताजनक हालत में उसको मेडिकल कालेज मेें भर्ती कराय था। उपचार के बावजूद उसको बचाया नहीं जा सका और शुक्रवार की सुबह उसने दम तोड़ दिया। परिजनों के अनुसार रतिराम ने फसल के लिए 80 हजार रुपये का कर्ज लिया था। फसल के नष्ट होने पर वह तनाव में था। इसी वजह से उसने आत्मदाह कर लिया।
प्रशासन कब समझेगा किसानों का दर्द?
अभी तक बुंदेलखंड में सदमे से होने वाली मौतों में प्रशासन का रटा-रटाया जवाब रहा है। बृहस्पतिवार को जिले के दो युवा किसान सदमे से मौत के शिकार हो गए। जहां एक किसान की 38 वर्ष का था तो दूसरे की उम्र केवल 32 साल थी। इतनी कम उम्र में किसानों का सदमे से मर जाना जिले में सूखे की विभीषिका को बयां करता है। मृत किसानों के परिजनों की मानें तो इन किसानों को कभी कोई गंभीर बीमारी की शिकायत नहीं रही है। उनकी मौत सदमे से हुई है। ऐसे में प्रशासन कम इन किसानों का दर्द समझेगा, कहना बड़ा मुश्किल है।
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महरौनी तहसील के ग्राम चढरऊ निवासी किसान रमेश पटेल (32) पुत्र रामचरण पटेल बृहस्पतिवार को अपने खेत पर गया था। रमेश के परिवार के पास 18 एकड़ जमीन है। उसने खेत में चार बोरा मटर बोई थी, लेकिन थ्रेसिंग के दौरान केवल दो बोरा मटर निकली तो वह सदमेे में आ गया। देर शाम तक उसके घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने खोजबीन शुरू की। वह खेत में आम के पेड़ के नीचे अचेत अवस्था में मिला। आनन-फानन में परिजन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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मृतक के चचेरे भाई जगभान ने बताया कि इस बार कम बारिश व सिंचाई के सीमित संसाधनों के कारण बोए हुए बीज से भी कम उपज होने से रमेश परेशान था। पिछले दिनों ही उसने चने की थ्रेसिंग कराई थी। 80 किलो चना जिस खेत में बोया था, उसमें से केवल 40 किलो चना की उपज हुई। बृहस्पतिवार को ऐसा ही मंजर उसे मटर की थ्रेसिंग के दौरान देखने को मिला। रमेश के ऊपर किसान क्रेडिट कार्ड का तीन लाख रुपये कर्जा है। उसके दो पुत्र हैं।
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वहीं, किसान की बर्बादी का दूसरा मंजर बार थाना क्षेत्र के ग्राम डुलावन का है। ग्राम डुलावन निवासी हरप्रसाद कुशवाहा (38) पुत्र टुडू कुशवाहा बृहस्पतिवार की शाम खेत की रखवाली करने घर से निकला था। सुबह उसके घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने खेत पर जाकर जानकारी की। खेत पर हरप्रसाद मृत अवस्था में मिला। मृतक के भाई फूलचंद्र ने बताया कि हरप्रसाद के ऊपर बैंक का करीब चार लाख रुपये कर्ज था। उसके तीन पुत्रियां व दो पुत्र हैं। बड़ी पुत्री की शादी की आस वह अच्छी फसल होने से लगाए था, लेकिन सिंचाई के साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण उसकी फसल सूख गई थी। इसी सदमे में उसकी मौत हो गई।
किसान ने मेडिकल में दम तोड़ा
झांसी। लहचूरा थानांतर्गत गांव रोरा में रतिराम (50) पुत्र नत्थू ने फसल नष्ट होने पर 18 मार्च को घर में मिट्टी का तेल उड़ेलकर आग लगा ली थी। परिजनों ने चिंताजनक हालत में उसको मेडिकल कालेज मेें भर्ती कराय था। उपचार के बावजूद उसको बचाया नहीं जा सका और शुक्रवार की सुबह उसने दम तोड़ दिया। परिजनों के अनुसार रतिराम ने फसल के लिए 80 हजार रुपये का कर्ज लिया था। फसल के नष्ट होने पर वह तनाव में था। इसी वजह से उसने आत्मदाह कर लिया।
प्रशासन कब समझेगा किसानों का दर्द?
अभी तक बुंदेलखंड में सदमे से होने वाली मौतों में प्रशासन का रटा-रटाया जवाब रहा है। बृहस्पतिवार को जिले के दो युवा किसान सदमे से मौत के शिकार हो गए। जहां एक किसान की 38 वर्ष का था तो दूसरे की उम्र केवल 32 साल थी। इतनी कम उम्र में किसानों का सदमे से मर जाना जिले में सूखे की विभीषिका को बयां करता है। मृत किसानों के परिजनों की मानें तो इन किसानों को कभी कोई गंभीर बीमारी की शिकायत नहीं रही है। उनकी मौत सदमे से हुई है। ऐसे में प्रशासन कम इन किसानों का दर्द समझेगा, कहना बड़ा मुश्किल है।