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ऐलोपैथी चिकित्सा पद्घति में कूदे आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथी डिग्रीधारी
Updated Tue, 19 Jun 2018 01:35 AM IST
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एलोपैथी पद्घति से इलाज दे रहे आयुर्वेदिक व होम्योपैथी डिग्रीधारी
इंजेक्शन एवं ड्रिप चढ़ाकर मरीजों की सेहत कर रहे खिलवाड़
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिले में एलोपैैथी चिकित्सा पद्धति का उपचार चिकित्सकों के लिए कमाई का जरिया साबित हो रहा है। शायद यही वजह है कि इसमें आयुर्वेदिक और होम्योपैथी डिग्रीधारी भी कूद पड़े हैं। नियमता होम्योपैथी चिकित्सक मरीजों के उपचार में इंजेक्शन का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं, इसके बाद भी वे ज्यादा कमाने की लालच में मरीज को इंजेक्शन लगाने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। इससे तमाम मरीजों की सेहत सुधरने की जगह खराब हो रही है।
बुंदेलखंड के अति पिछड़े जनपद में स्वास्थ्य सेवाएं भी ज्यादा अच्छी नहीं हैं। सरकारी चिकित्सालयों में जहां चिकित्सकों की कमी बनी हुई है तो वहीं जिले में एमबीबीएस डिग्रीधारी चिकित्सकों की निजी क्लीनिकों की संख्या भी बहुत कम है। इसका अनुचित फायदा आयुर्वेदिक व होम्योपैथी के कई चिकित्सक उठा रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में हासिल डिग्री के आधार पर अपनी क्लीनिक का पंजीकरण तो करा लिया है। लेकिन ऐसी क्लीनिकों में आयुर्वेदिक, होम्योपैथी पद्धति का इस्तेमाल कम एलोपैथी चिकित्सा का ज्यादा उपचार हो रहा है। ऐसे चिकित्सकों द्वारा एलोपैथी का उपचार करके मरीजों के जीवन से खिलवाड़ रहे हैं। कई ऐसे पंजीकृत निजी क्लीनिक भी हैं, जहां झोलाछाप डाक्टरों को भी प्रश्रय दिया जा रहा है। हद तो तब हो जाती है जब होम्योपैथी क्लीनिक में एलोपैथी चिकित्सा के साथ इंजेक्शन का इस्तेमाल होता है। इतना ही नहीं, वे मरीजों को ड्रिप भी लगा रहे हैं। इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारी अनजान बने हुए हैं। इसका फायदा उक्त चिकित्सक उठा रहे हैं। इसका खामियाजा लोगों को कई बार अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है। आए दिन कई ऐसे केस सामने आते हैं कि इंजेक्शन पक गया तो इंजेक्शन के रिएक्शन से मरीज की सेहत बिगड़ गई। कई रेफर कर दिए जाते हैं। ऐसे में मरीजों को महानगरों का महंगा उपचार कराना मुश्किल हो जाता है।
एक नजर पंजीकृत संख्या
जिले के स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत क्लीनिक हैं। इनमें 28 एमबीबीएस, 145 बीएएमएस, 14 बीएचएमएस, 14 डीएचएमएस, 10 बीडीएस, 03 बीएएमसी चिकित्सक विभिन्न जगहों पर अपनी क्लीनिक खोले हुए हैं।
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नहीं करने देगें चिकित्सा पद्घति के विपरीत उपचार
शासन की मंशा अनुसार जो चिकित्सा पद्धति की डिग्री की है, उसके मानकों के विपरीत यदि कोई चिकित्सक उपचार करता है तो ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डा. राजेश भारती, नोडल अधिकारी
जांच कर की जाएगी कार्रवाई
होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति में इंजेक्शन लगाने के अधिकार नहीं हैं। यदि किसी चिकित्सक द्वारा ऐसा किया जा रहा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
डा. लक्ष्मीकांत पांडेय, जिला होम्योपैथी अधिकारी
19 एलोपैथी दवाओं का कर सकते आयुर्वेदिक चिकित्सक इस्तेमाल
शासन के नियमानुसार 19 एलोपैथी दवाओं का उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक कर सकते हैं साथ ही कुछ दवाओं में इंजेक्शन भी लगा सकते हैं। शासनादेेश के विपरीत यदि आयुर्वेदिक चिकित्सक अन्य दवाओं का उपयोग कर रहे हैं तो उनकी जांच की जाएगी।
डा. प्रतापसिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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इंजेक्शन एवं ड्रिप चढ़ाकर मरीजों की सेहत कर रहे खिलवाड़
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिले में एलोपैैथी चिकित्सा पद्धति का उपचार चिकित्सकों के लिए कमाई का जरिया साबित हो रहा है। शायद यही वजह है कि इसमें आयुर्वेदिक और होम्योपैथी डिग्रीधारी भी कूद पड़े हैं। नियमता होम्योपैथी चिकित्सक मरीजों के उपचार में इंजेक्शन का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं, इसके बाद भी वे ज्यादा कमाने की लालच में मरीज को इंजेक्शन लगाने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। इससे तमाम मरीजों की सेहत सुधरने की जगह खराब हो रही है।
बुंदेलखंड के अति पिछड़े जनपद में स्वास्थ्य सेवाएं भी ज्यादा अच्छी नहीं हैं। सरकारी चिकित्सालयों में जहां चिकित्सकों की कमी बनी हुई है तो वहीं जिले में एमबीबीएस डिग्रीधारी चिकित्सकों की निजी क्लीनिकों की संख्या भी बहुत कम है। इसका अनुचित फायदा आयुर्वेदिक व होम्योपैथी के कई चिकित्सक उठा रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में हासिल डिग्री के आधार पर अपनी क्लीनिक का पंजीकरण तो करा लिया है। लेकिन ऐसी क्लीनिकों में आयुर्वेदिक, होम्योपैथी पद्धति का इस्तेमाल कम एलोपैथी चिकित्सा का ज्यादा उपचार हो रहा है। ऐसे चिकित्सकों द्वारा एलोपैथी का उपचार करके मरीजों के जीवन से खिलवाड़ रहे हैं। कई ऐसे पंजीकृत निजी क्लीनिक भी हैं, जहां झोलाछाप डाक्टरों को भी प्रश्रय दिया जा रहा है। हद तो तब हो जाती है जब होम्योपैथी क्लीनिक में एलोपैथी चिकित्सा के साथ इंजेक्शन का इस्तेमाल होता है। इतना ही नहीं, वे मरीजों को ड्रिप भी लगा रहे हैं। इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारी अनजान बने हुए हैं। इसका फायदा उक्त चिकित्सक उठा रहे हैं। इसका खामियाजा लोगों को कई बार अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है। आए दिन कई ऐसे केस सामने आते हैं कि इंजेक्शन पक गया तो इंजेक्शन के रिएक्शन से मरीज की सेहत बिगड़ गई। कई रेफर कर दिए जाते हैं। ऐसे में मरीजों को महानगरों का महंगा उपचार कराना मुश्किल हो जाता है।
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एक नजर पंजीकृत संख्या
जिले के स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत क्लीनिक हैं। इनमें 28 एमबीबीएस, 145 बीएएमएस, 14 बीएचएमएस, 14 डीएचएमएस, 10 बीडीएस, 03 बीएएमसी चिकित्सक विभिन्न जगहों पर अपनी क्लीनिक खोले हुए हैं।
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नहीं करने देगें चिकित्सा पद्घति के विपरीत उपचार
शासन की मंशा अनुसार जो चिकित्सा पद्धति की डिग्री की है, उसके मानकों के विपरीत यदि कोई चिकित्सक उपचार करता है तो ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डा. राजेश भारती, नोडल अधिकारी
जांच कर की जाएगी कार्रवाई
होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति में इंजेक्शन लगाने के अधिकार नहीं हैं। यदि किसी चिकित्सक द्वारा ऐसा किया जा रहा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
डा. लक्ष्मीकांत पांडेय, जिला होम्योपैथी अधिकारी
19 एलोपैथी दवाओं का कर सकते आयुर्वेदिक चिकित्सक इस्तेमाल
शासन के नियमानुसार 19 एलोपैथी दवाओं का उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक कर सकते हैं साथ ही कुछ दवाओं में इंजेक्शन भी लगा सकते हैं। शासनादेेश के विपरीत यदि आयुर्वेदिक चिकित्सक अन्य दवाओं का उपयोग कर रहे हैं तो उनकी जांच की जाएगी।
डा. प्रतापसिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी