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न्यायालय: गैंगस्टर के चार अपराधियों को चार-चार वर्ष की सजा
Updated Thu, 27 Sep 2018 01:16 AM IST
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गैंगेस्टर के चार अपराधियों को चार-चार वर्ष की सजा
न्यायालय ने पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड लगाया
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। अपर जिला और सत्र न्यायाधीश जगदीश कुमार की अदालत ने थाना जाखलौन अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों के चार अपराधियों को गैंगेस्टर एक्ट में दोषी पाते हुए चार-चार वर्ष के सश्रम कारवास और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में अतिरिक्त सजा भी भुगतना होगी।
सहायक शासकीय अधिवक्ता बादाम सिंह यादव ने बताया कि 11 वर्ष पूर्व थाना जाखलौन थानाध्यक्ष रामऔतार वर्मा ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि वह 17 दिसंबर वर्ष 2007 को हमराही सिपाहियों के साथ क्षेत्र में शांति व्यवस्था के लिए गश्त कर रहे थे। जैसे ही वह हमराही फोर्स के ग्राम धौर्रा, कपासी, भारौन, माताखेड़ा से गश्त करता हुआ ग्राम जहाजपुरा पहुंचा, तो जनता के कुछ लोगों ने सहमी आवाज व दबी जुबान से बताया कि ग्राम जहाजपुर के संतोष खंगार पुत्र बाबूलाल, ग्राम अमउखेड़ा निवासी भज्जू यादव, बलराम पुत्रगण हुकुम सिंह यादव, एवं ग्राम देवगढ़ निवासी राजेश यादव पुत्र गजराज सिंह का एक संगठित गिरोह है, जिसका गैंग लीडर संतोष खंगार है। उनके भय व आतंक के कारण कोई भी पत्थर की लीज नहीं ले पाता है और लीज सुदा खदान पर संतोष कुमार खंगार व उसके गैंग के सक्रिय सदस्य अवैध रुप से कब्जा करके भारी मात्रा में पत्थरका कटान अपने लाभ के लिए करते हैं। इनके भय व आतंक के कारण जनता का कोई भी व्यक्ति थाने पर मुकदमा लिखाने व गवाही देने का साहस नहीं कर पाता है। इस प्रकार के गैंग द्वारा किए गए कार्य गैंगस्टर एक्ट के तहत दंडनीय अपराध है। इनके आपराधिक इतिहास के तहत इन पर चोरी, खनिज परिहार नियमावली1993 व धारा 4/21खान तथा खनिज अधिनियम (95) धारा 3/4 लोक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना निवारण अधिनियम, थाना जाखलौन में पंजीकृत हुआ था। इस संगठित गिरोह का यह कृत्य उत्तर प्रदेश गिरोह बंद एवं समाज विरोधी क्रिया कलाप निवारण अधिनियम 1986 का अपराध है। थानाध्यक्ष की तहरीर पर पुलिस ने उक्त चारों आरोपियों के खिलाफ 17 दिसंबर 2007 को रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के उपरांत न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश (गैंगस्टर कोर्ट) ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए उक्त सभी अपराधियों संतोष खंगलार, भज्जू, बलराम व राजेश यादव को गैंगस्टर एक्ट के तहत दोषी पाते हुए चार-चार वर्ष का कारावास और पांच-पांच हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर सभी अपराधियों को तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
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न्यायालय ने पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड लगाया
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। अपर जिला और सत्र न्यायाधीश जगदीश कुमार की अदालत ने थाना जाखलौन अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों के चार अपराधियों को गैंगेस्टर एक्ट में दोषी पाते हुए चार-चार वर्ष के सश्रम कारवास और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में अतिरिक्त सजा भी भुगतना होगी।
सहायक शासकीय अधिवक्ता बादाम सिंह यादव ने बताया कि 11 वर्ष पूर्व थाना जाखलौन थानाध्यक्ष रामऔतार वर्मा ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि वह 17 दिसंबर वर्ष 2007 को हमराही सिपाहियों के साथ क्षेत्र में शांति व्यवस्था के लिए गश्त कर रहे थे। जैसे ही वह हमराही फोर्स के ग्राम धौर्रा, कपासी, भारौन, माताखेड़ा से गश्त करता हुआ ग्राम जहाजपुरा पहुंचा, तो जनता के कुछ लोगों ने सहमी आवाज व दबी जुबान से बताया कि ग्राम जहाजपुर के संतोष खंगार पुत्र बाबूलाल, ग्राम अमउखेड़ा निवासी भज्जू यादव, बलराम पुत्रगण हुकुम सिंह यादव, एवं ग्राम देवगढ़ निवासी राजेश यादव पुत्र गजराज सिंह का एक संगठित गिरोह है, जिसका गैंग लीडर संतोष खंगार है। उनके भय व आतंक के कारण कोई भी पत्थर की लीज नहीं ले पाता है और लीज सुदा खदान पर संतोष कुमार खंगार व उसके गैंग के सक्रिय सदस्य अवैध रुप से कब्जा करके भारी मात्रा में पत्थरका कटान अपने लाभ के लिए करते हैं। इनके भय व आतंक के कारण जनता का कोई भी व्यक्ति थाने पर मुकदमा लिखाने व गवाही देने का साहस नहीं कर पाता है। इस प्रकार के गैंग द्वारा किए गए कार्य गैंगस्टर एक्ट के तहत दंडनीय अपराध है। इनके आपराधिक इतिहास के तहत इन पर चोरी, खनिज परिहार नियमावली1993 व धारा 4/21खान तथा खनिज अधिनियम (95) धारा 3/4 लोक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना निवारण अधिनियम, थाना जाखलौन में पंजीकृत हुआ था। इस संगठित गिरोह का यह कृत्य उत्तर प्रदेश गिरोह बंद एवं समाज विरोधी क्रिया कलाप निवारण अधिनियम 1986 का अपराध है। थानाध्यक्ष की तहरीर पर पुलिस ने उक्त चारों आरोपियों के खिलाफ 17 दिसंबर 2007 को रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के उपरांत न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश (गैंगस्टर कोर्ट) ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए उक्त सभी अपराधियों संतोष खंगलार, भज्जू, बलराम व राजेश यादव को गैंगस्टर एक्ट के तहत दोषी पाते हुए चार-चार वर्ष का कारावास और पांच-पांच हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर सभी अपराधियों को तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
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