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पिता पुत्रों समेत तीन को गैंगस्टर में पांच वर्ष की सजा
Updated Fri, 24 Nov 2017 02:26 AM IST
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पिता-पुत्रों समेत तीन को गैंगेस्टर में पांच वर्ष की सजा
ललितपुर। समाज विरोधी क्रियाकलाप करने और गिरोह बनाकर अपराध करने में दोषी पिता व दो पुत्रों को अपर सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर प्रत्येक को छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया कि थाना नाराहट थानाध्यक्ष आरसी मिश्रा 25 जुलाई 2008 को कांस्टेबल जय प्रकाश व रामनरेश के साथ सरकारी जीप से गश्त पर थे। इसी दौरान उन्हें पता चला कि ग्राम झरावटा निवासी सुल्तान सिंह उर्फ गोटी, महेंद्र सिंह व जितेंद्र सिंह ठाकुर गिरोह बंद अपराधी है, जो गांव व आसपास के क्षेत्रों में अपराध करते हैं। उनके भय से कोई भी पुलिस थाना तक नहीं पहुंच रहा है और लगातार लोगों को धमका कर लूट व धनोपार्जन में लगे हुए हैं। सूचना पर थानाध्यक्ष ने मौके पर पहुंचकर सुल्तान सिंह, महेंद्र सिंह व जितेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया और थाना में रिपोर्ट पंजीकृत कराई। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। बृहस्पतिवार को न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की ओर से दी गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर निर्णय सुना दिया।
पूर्व में भी दर्ज किया गया है लूट का मुकदमा
उक्त मामले में अपराधी सुल्तान सिंह के खिलाफ पूर्व में भी वर्ष 2007 में लूट के मामले में परिवाद दायर किया गया था। इसके बाद चार फरवरी वर्ष 2008 में एक परिवाद घर में घुसकर मारपीट, लूट, गाली-गलौज जान से मारने की धमकी आदि धाराओं में दर्ज हुआ था। 12 जुलाई 2008 को घर में घुसकर मारपीट करने, अनुसूचित जाति जनजाति के अपराध में की धारा का मामला दर्ज हुआ। फिर 22 फरवरी 1999 को एसओ अतुल हमीद ने सुल्तान सिंह के खिलाफ 3 यूपी गुंडा एक्ट की कार्यवाई की गई और 28 फरवरी 2002 को उसे दो माह के लिए जिलाबदर किया गया था। फिर 18 जुलाई 2007 को एसओ संतोष गिरी ने सुल्तान सिंह को तमंचा, दो कारतूस के साथ गिरफ्तार किया था।
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ललितपुर। समाज विरोधी क्रियाकलाप करने और गिरोह बनाकर अपराध करने में दोषी पिता व दो पुत्रों को अपर सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर प्रत्येक को छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया कि थाना नाराहट थानाध्यक्ष आरसी मिश्रा 25 जुलाई 2008 को कांस्टेबल जय प्रकाश व रामनरेश के साथ सरकारी जीप से गश्त पर थे। इसी दौरान उन्हें पता चला कि ग्राम झरावटा निवासी सुल्तान सिंह उर्फ गोटी, महेंद्र सिंह व जितेंद्र सिंह ठाकुर गिरोह बंद अपराधी है, जो गांव व आसपास के क्षेत्रों में अपराध करते हैं। उनके भय से कोई भी पुलिस थाना तक नहीं पहुंच रहा है और लगातार लोगों को धमका कर लूट व धनोपार्जन में लगे हुए हैं। सूचना पर थानाध्यक्ष ने मौके पर पहुंचकर सुल्तान सिंह, महेंद्र सिंह व जितेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया और थाना में रिपोर्ट पंजीकृत कराई। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। बृहस्पतिवार को न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की ओर से दी गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर निर्णय सुना दिया।
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पूर्व में भी दर्ज किया गया है लूट का मुकदमा
उक्त मामले में अपराधी सुल्तान सिंह के खिलाफ पूर्व में भी वर्ष 2007 में लूट के मामले में परिवाद दायर किया गया था। इसके बाद चार फरवरी वर्ष 2008 में एक परिवाद घर में घुसकर मारपीट, लूट, गाली-गलौज जान से मारने की धमकी आदि धाराओं में दर्ज हुआ था। 12 जुलाई 2008 को घर में घुसकर मारपीट करने, अनुसूचित जाति जनजाति के अपराध में की धारा का मामला दर्ज हुआ। फिर 22 फरवरी 1999 को एसओ अतुल हमीद ने सुल्तान सिंह के खिलाफ 3 यूपी गुंडा एक्ट की कार्यवाई की गई और 28 फरवरी 2002 को उसे दो माह के लिए जिलाबदर किया गया था। फिर 18 जुलाई 2007 को एसओ संतोष गिरी ने सुल्तान सिंह को तमंचा, दो कारतूस के साथ गिरफ्तार किया था।
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